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राष्ट्रवादी सरकारी कर्मी और नमाज़ वादी परोपोगंडा

by Nitin Tripathi
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मेरे एक परिचित हैं, बहुत सरल हृदय सामान्य व्यक्ति हैं, सरकारी कर्मी हैं. कई वर्षों पूर्व पे कमीशन की रिपोर्ट लागू करवाने के लिए लखनऊ में प्रदर्शन हो रहा था. परिचित को नया नया नेता गिरी का जोश आया था. कर्मचारी नेताओं की बात सुन जोश और बढ़ा. ये अंदर कि बात है पुलिस हमारे साथ है जैसे नारों ने तो जोश की आग में घी डाल दिया. पुलिस चारों ओर खड़ी थी और नेताओं के उकसाने पर परिचित और उनके मित्र हज़रत गंज में रोड जाम करने लगे. पुलिस ने लाठी चार्ज आरम्भ किया, तब तक इन्हें लग रहा था पुलिस वाले भी सरकारी कर्मी हैं ये क्यों लाठी चलाएँगे. अग़ल बग़ल देखा तो सारे असल नेता ग़ायब. जब बग़ल वाले के लाठी पड़ी तो समझ आया. यह भागे पर पुलिस के जवानों से भाग कहाँ जाओगे? पचास साल की एज में पुलिस की चार पाँच लाठियाँ कस कस के पड़ीं. आज तक दर्द होता है. समझ भी आ गया, फ़ालतू की नेता गिरी सबके बस की नहीं. अब वह सामान्य शहरी बन रहते हैं, तनख़्वाह
के साथ क़ानून व्यवस्था, इंफ़्रा इन सबकी कद्र करते हैं और नेता गिरी तो कब की बंद.
इन दिनों देख रहा हूँ अखिलेश के भड़काने पर विशेष कर सरकारी अध्यापकों का एक वर्ग OPS के नाम पर बिल्कुल पगलाया हुआ है. इस पगलप्पन में वह ढेरों विवादित मेसेज कर रहा है, सोसल मीडिया पोस्ट कर रहा है, यहाँ तक कि चुनावों में अवैध कार्य करने की बातें कर रहा है.
यक़ीन मानिए इन सब पर सरकार की नज़र है. नेता तो बच जाएँगे क्योंकि वह समझदार हैं. पर अति उत्साह में कुछ मास्टर OPS छोड़िए तनख़्वाह से भी हाथ धो बैठेंगे.
अनर्गल नेता गिरी से बचा जाए, मेरी सबको यही सलाह रहती है. अन्यथा बाबा के बुल डोजर से बड़े बड़े माफिया न बच पाए, यूँ चुट पुट पाँच दस वोट में बेमानी कराने की बात कराने वाले मास्सब बच जाएँगे सोचना भी हास्यास्पद है.
उत्तर प्रदेश के एक सामान्य नागरिक बन वह सरकार चुनिए जो आपको सुरक्षा दे, आपके धार्मिक अधिकारों को सुरक्षा दे, जिहादी गति विधियों पर कंट्रोल रखे, काशी अयोध्या के बाद मथुरा भी लाए. नेता गिरी नेताओं को ही करने दिया जाए 🙂
नोट: स्पष्ट कर दूँ ढेरों सरकारी कर्मी पूरी तरह से राष्ट्रवादी हैं और डंट कर खड़े हैं नमाज़ वादी परोपोगंडा के ख़िलाफ़

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