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विशेषज्ञों के प्रोफाइलों पर रूस व यूक्रेन की शांतिवार्ता

by Umrao Vivek Samajik Yayavar
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कल जब मैं फेसबुक में स्वयंभू अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों के प्रोफाइलों पर रूस व यूक्रेन की शांतिवार्ता के बीच से लीक हुई खबरों जैसे फर्जी ज्ञान की बातें पढ़ रहा था कि कीव से कर्फ्यू हटाया जाना शांतिवार्ता में तय हो गया है। तब मुझे यह समझ नहीं आया कि रूस व यूक्रेन क्या इस बहुत ही मामूली सी बात के लिए बातचीत कर रहे हैं कि कीव से कर्फ्यू हट जाए। कर्फ्यू तो वैसे भी सोमवार की सुबह से हटने वाला था ही, कर्फ्यू लगाते समय ही यह घोषणा की गई थी।
कीव में जब वीकेंड के लिए कर्फ्यू लगाया गया था तभी कहा गया था कि सोमवार की सुबह कर्फ्यू हट जाएगा। लगभग 39-40 घंटों का कर्फ्यू इसलिए लगाया गया था ताकि रूस के जो लोग कीव में सरकार के ऊंचे पदाधिकारियों की हत्या करने के लिए प्लांट किए गए हैं, उनको पकड़ा जा सके, उनको दंडित किया जा सके और इस प्रक्रिया में यूक्रेन की ओर से आम नागरिकों की क्षति कम से कम हो।
लगभग 40 घंटों बाद लगातार वाला कर्फ्यू सोमवार की सुबह से हट गया है (जैसा कि कर्फ्यू लगाए जाते समय ही घोषणा की गई थी) लेकिन जो अभी की स्थिति है उसके अनुसार प्रतिदिन रात में कर्फ्यू रहेगा।
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लेकिन भारत में फेसबुक के ज्ञानी जन, भारतीय मीडिया की बात छोड़िए, कुछ भारतीय दूतावासों तक ने ऐसी खबरें लगा रखीं थीं कि यूक्रेन व रूस की शांतिवार्ता से बात निकल कर आ रही है कि कीव से कर्फ्यू हटाया जा रहा है।
भारतीय मीडिया ऐसी खबरों से भरा पड़ा है। पता नहीं कौन से स्रोत हैं इन लोगों के पास जो शांतिवार्ता ढंग से शुरू होने के पहले ही, शांतिवार्ता के बीच में से खबरें निकलकर इन लोगों के पास आ जाती हैं। हो सकता है कि जैसे भारत मीटिंग्स में पानी पिलाने वाले को, फाइल झाड़ने पोछने वाले को, नास्ता पानी पहुंचाने वाले को या ऐसे ही सहयोगियों को कुछ पैसा देकर सेट करके अंदर की खबरें ले लेते हैं। वैसे ही यूक्रेन व रूस की इस मीटिंग में भी कुछ लोगों को सेट कर लिया हो जो अंदर की खबरें एडवांस में ही निकल कर आ जाती हों। जबकि झूठ व बकैती चाहे जितनी की जाए, लेकिन सच यही है भारतीय मीडिया को शांतिवार्ता होने के समय तक यह तक नहीं पता था कि आखिर बातचीत हो कौन से भवन-स्थान पर रही है। मतलब यह कि मूर्खता, सतहीपन व अगंभीरता इत्यादि की कोई हद नहीं।
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इतना भी कामनसेंस नहीं कि इतने तनावपूर्ण वातावरण में, घनघोर युद्ध की स्थिति में रूस व यूक्रेन की शांतिवार्ता में यह बात क्या मायने रखती है कि कीव से कर्फ्यू हटता है या नहीं। दूर-दूर तक कोई तुक ही नहीं है। इतना बेसिक कामनसेंस नहीं और काम करते हैं दूतावासों में, काम करते हैं मीडिया के अंतर्राष्ट्रीय मामलों व युद्ध विशेषज्ञ विभागों में, फेसबुक पर स्वयंभू अंतर्राष्ट्रीय मामलों के तथाकथित विशेषज्ञ। विचारशीलता, संवेदनशीलता, गंभीरता, परिपक्वता किस चिड़िया का नाम है, यह तक नहीं पता।
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चलते-चलते ::
शांतिवार्ता के लिए रूस व यूक्रेन में बातचीत लगभग पांच घंटे चली, सहमति नही

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