Home लेखक और लेखअजीत सिंह हमारे इदर मनाली में…

हमारे इदर मनाली में…

by Ajit Singh
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हमारे इदर मनाली में हमारे Home Stay में एक Couple आया ।
दिल्ली से मनाली Car चला के आये ।
14 घंटे की drive थी।
कुल 7 दिन रुके ।
रोज़ाना सुबह 7 बजे ही निकल जाते दोनों ।
रात 11 बजे लौटते ।
मनाली में और मनाली के इर्द गिर्द कोई मंदिर , कोई Waterfall , कोई Spot नही छोड़ा उन्ने ।
रोज़ाना रात को मुझसे discuss करते , कल कहां कहां जाना है , क्या क्या देखना , घूमना , छूना है ।
Yes , I’ve been There
I’ve seen it
बाई गोट की कसम , उनकी भागदौड़ , उनका ये Action Packed Hectic Tourism देख के मुझे थकावट हो गयी ।
एक और Couple आया …..
वो 15 दिन रुके ।
ऊ दुन्नो दिनवा भर धूप में कुर्सी डाल के धूप सेकते ।
फिर महिला ने कहा कि हमारा गद्दा तो छत पे ही बिछवा दो।
उनके पतिदेव गांव में टहलते गये और दुइ लीटर गाय का शुद्ध दूध की बांध लगा आये ।
गाय का शुद्ध Organic दूध यहां सिर्फ 30 रु लीटर मिलता है ।
रोज़ाना सुबह जाते और दूध ले आते ।
दिन भर धूप सेकते ।
शाम को टहलने जाते तो उनकी पत्नी गांव की औरतों से दोस्ती गांठ के कुछ हरे पत्ते , कुछ देशी जंगली सब्जियां , लोगों के kitchen gardens से एकाक दो टमाटर , एकाक लौकी कद्दू , कोई गोभी जुगाड़ लातीं ।
महिला इतनी समझदार कि मुझे खाना परोसती तो आलू आलू हटा देतीं । चावल होते तो भी नही देतीं ।
उनको पता था कि मैं Diabetic हूँ ।
Mr Singh ….. Noooo …… No Rice for You ……
जाने लगे तो मैने तो पैर पकड़ लिये ।
अबे क्यों जा रिय्ये हो , दिल्ली के उंस नर्क में ।
अबे यहीं रह लो ।
बाई गोट , कोई किराया नहीं लूंगा …..
सबका अपना अपना Tourism होता है भाई …….

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