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केजरीवाल की राजनीति आवश्यकता से जुड़ी हुई है

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केजरीवाल की राजनीति आवश्यकता से जुड़ी हुई है उन्हें रोक पाना बहुत मुश्किल है ।

 

दिल्ली में बहुत से ऐसे लोग हैं जो केजरीवाल को कोसते हैं लेकिन वोट केजरीवाल को ही देते हैं, आप दिल्ली की जनता को किस मुँह से दोषी कहेंगे क्योंकि वही जनता सातों सीट bjp को देती है तो वही जनता केजरीवाल को बम्पर बहुमत से जिताती है
Bjp वाले फ्री फ्री कहकर यह नहीं सोचते कि आखिर bjp ने भी तो फ्री देने का वायदा किया था फिर दिल्ली की जनता bjp को क्यों नहीं चुनी….?
केजरीवाल के लोग धरातल पर लोगों से जुड़ने का कार्य कर रहें हैं यही कारण है कि केजरीवाल जहां सरकार बना रहा वहाँ क्लीन स्वीप कर रहा..!
पंजाब में हुए क्लीन स्वीप को भले ही भाजपाई इसे खालिस्तानी मदद कहकर प्रचारित कर रहें हैं पर देश का आम जनमानस इसपर ध्यान न देकर यह सोच रहा है कि आखिर केजरीवाल में ऐसा क्या है जो वो क्लीन स्वीप कर रहा है ..!!!
मोदी के नाम पर बहुत से मुख्यमंत्रियों , विधायकों , सांसदों ने बैठकर मलाई खाई है यकीनन मोदी के सन्यास के बाद bjp कितने समय तक टिक पाएगी यह तो भविष्य के गर्त में छिपा है पर सच्चाई यह है कि मोदी जैसा जादुई नेता अभी भी bjp के पास नहीं है जो इतना वाकपटु हो..!
केजरीवाल अखिलेश को सिर्फ अगले 2029 तक का वक़्त देंगे यदिअखिलेश कुछ नहीं कर पाए तो केजरीवाल की एंट्री उत्तर प्रदेश चुनाव में हो जाएगी और सारे जातिगत समीकरण दो तीन चुनाव के बाद ध्वस्त हो जाएंगे……
यह मैं चुनाव के बाद कुछ लोगों की मानसिकता के बाद कह रही हूँ, उत्तर प्रदेश बदलाव बहुत तेजी से करता है यदि विकल्प दिखा तो….!!!!!
आम आदमी पार्टी के लिए चुनौती bjp या कांग्रेस नहीं है बल्कि समाजवादी पार्टी है जो जातिगत समीकरणों का धन्ना सेठ है जैसे ही सपा सफा हुई आम आदमी पार्टी तेजी से ग्रोथ करेगी…..
कांग्रेस और bjp आम आदमी पार्टी के लिए खाद का काम करती हैं जहां यही दोनों हैं वहाँ आम आदमी पार्टी तेजी से उठेगी..!
एक शॉकिंग भविष्यवाणी;
जैसे अधिकतर लोगों के दादा पापा काँग्रेस समर्थक हुआ करते थे और आज आप bjp समर्थक हो , वैसे ही आपके अगली पीढ़ी के बच्चे आम आदमी पार्टी के प्रचंड समर्थक होंगे….
नोट : कारणों पर मंथन करिये पोस्ट को झूठलाने का कोई फायदा नहीं..!
क्योंकि ध्यान रखिये जिस तरह से इंदिरा के द्वारा किया गया पाकिस्तान विभाजन को भुला दिया गया बल्कि इंदिरा को उसका क्रेडिट देने से इनकार कर दिया गया उसी तरह से राममंदिर, 370 को भी भुला दिया जाएगा,
यह नेचुरल है यही हमेशा होता आया है जिस घटना को वर्तमान में ज्यादा भाव मिलता है भविष्य के तराजू में वह आरोप प्रत्यारोप में बदल जाती है।
केजरीवाल ने नव वामपंथ + नव राष्ट्रवाद + नव सेक्युलरिज्म की ऐसी खिचड़ी बनाई है जिसे देखकर अभी अधिकतर जनता मुँह भले ही बना रही है पर शीघ्र ही उस पंक्ति में बैठी मिलेगी……

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