Home चलचित्र पद्मावती Vs सम्राट प्रथ्वीराज चौहान

पद्मावती Vs सम्राट प्रथ्वीराज चौहान

by Nitin Tripathi
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जब पद्मावत फिल्म आ रही थी, मैं इसके बहुत विरोध मे था। वजह यह थी कि लग रहा था संजय लीला भंसाली इस कहानी के साथ न्याय न कर पाएंगे। डर लग रहा था कि रणवीर सिंह और दीपिका का फिल्म मे रोमांस न दिखा दिया जाए। लग रहा था कि दीपिका जैसी वोक पद्मावती का चरित्र कैसे निभाएगी। लग रहा था कि सुपर स्टार रणवीर खिलजी विलेन का रोल कैसे निभाएंगे।
फिल्म आई, अनमने मन से देखी। वाओ क्या फिल्म थी। क्या ग्रांड सेट थे, भारत के राजा महराजा का क्या वैभव दिखाया। दीपिका महारानी के रूप मे क्या खिली। और रणवीर सिंह तो जैसे खिलजी के चरित्र मे घुस गया था। उसने पूरी ताकत डाल दी कि फिल्म देख लोग उससे घृणा करें। रानी पद्मावती जब जौहर के लिए जाती हैं तो वह सीन याद कर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
अभी फिल्म आई पृथ्वीराज। इस फिल्म से बड़ी उम्मीदें थीं। देश का माहौल हिन्दू वादी है। डायरेक्टर चंद्र प्रकाश द्विवेदी का सीरीयल चाणक्य बचपन मे देखते थे, क्या जबरदस्त सीरीयल था। फिल्म मे हीरो अक्षय कुमार हैं, जो राइट विंगर माने जाते हैं। production यश राज का था जो भव्य फिल्में बनाने के लिए मशहूर हैं। पूरी उम्मीद थी कि ग्रांड मूवी होगी।
क्या घटिया फिल्म बनाई। अपनी याद मे इससे घटिया फिल्म शायद ही देखी हो। हर फिल्म मे कुछ तो ठीक होता है, इसमे कुछ नहीं है। सबसे पहले तो इस फिल्म को बनाने मे लग रहा है कि प्रडूसर के पास पैसे ही नहीं थे। भारतीय महाराज की पीरियड फिल्म और कोई भव्यता नहीं। यहाँ तक कि पृथ्वी राज सम्राट को एक सिंहासन तक न दिया गया। महाराज एक तख्त पर और सारे दरबारी जमीन पर हंसी मजाक करते रहते थे। हीरोइन से तो जैसे दुश्मनी थी। संयोगिता के चरित्र को टीवी सीरीयल मे इससे अच्छे कपड़े पहनाए जाते हैं। फिल्म के अन्य चरित्र तो लग रहा है अपने घर से या फिर चोर बाजार से सौ रुपया किराये वाली ड्रेस पहन कर आए थे।
डायरेक्टर ने कोई मेहनत नहीं की। फिल्म मे कोई डिटेलिंग नहीं थी। पृथ्वी राज का चरित्र ऐसे उभारा है जैसे वह और उनके सेनानी बस सदैव लड़ने झगड़ने को तैयार रहते हों। संजय दत्त समेत सारे दरबारी कमेडियन और परमानेंट अनर्गल खून के प्यासे दिखे। चंद्र बरदाई के रोल मे सोनू सूद सदैव मातम मे रहे। डिटेलिंग की इतनी कमी दिखी कि पृथ्वी राज रासो की सबसे पोपुलर पंक्ति “चार बांस चौबीस गज अंगुल अष्ट प्रधान, ता ऊपर सुल्तान है चूको मत चौहान” इस पंक्ति तक का प्रयोग फिल्म मे ऐन मौके पर न हुआ। बस चूको मत चौहान वाक्य प्रयोग कर घटिया सा गाना गा दिया। फिल्म इतनी वाहियात थी कि जब मुहम्मद गौरी को मारा जाता है हाल मे एक ताली तक न बजी, दर्शक चट चुके थे। सबसे घटिया यह कि संयोगिता का करेक्टर वोक फेमिनिस्ट बना दिया। डायरेक्टर को पता ही नहीं कि हिन्दू संस्कृति मे तेज महिलायें कैसी होती हैं।
मैं राजा होता तो डायलाग लिखने वाले को सौ कोड़े मारने की सजा देता। ऐसे वाहियात डायलाग जो हाउस्फुल जैसी फिल्म मे भी चीप लगें। इतना भयंकर उर्दू का प्रयोग कि इसके मुकाबले मुगले आजम में ज्यादा अच्छी हिन्दी का उपयोग किया गया है।
अक्षय कुमार को जेल मे डाल देना चाहिए ऐसी घटिया ऐक्टिंग करने के लिए। ऐसा लग रहा था जैसे वह बदला ले रहा हो। अंत तक आते आते यहाँ तक कि डायलाग डिलीवरी भी महाराज स्टाइल से हट कर अक्षय की नेचुरल पंजाबी स्टाइल डायलाग डिलीवरी थी, वह भी चीप वाले डायलाग जैसे ए सुल्तान के टट्टुवों जाके सुल्तान को कह दो। दिख रहा था अंत तक आते आते सबको अंदाजा लग गया था कि वह सदी की सबसे घटिया फिल्म बना रहे हैं।
और सबसे घटिया सीन जो फिल्माया गया वह था संयोगिता का जौहर। कोई ईमोशन ही न आए। सफेद कपड़े पहना कर बेमन से जौहर के लिए जाते हुवे। फिर याद आया कि एक गाना अभी बचा रखा हुआ है, तो थोड़ा डांस कर लिया जाए। नाच गाना कर लिया गया फिर जौहर। इस सीन को तो फिल्म अकैडमी मे दिखाना चाहिए कि कोई ऐसा सेन्सिटिव इशू भी इतने घटिया तरीके से फिल्म सकता है।
मैंने सोंच रखा था कि लिखूँगा नहीं इस फिल्म के बारे में। पर इस फिल्म मे अग्नि रस है। इसको देख कर तन बदन मे आग लग गई। सोशल मीडिया मे लिख कर शायद कुछ अग्नि ठंडी हो।
चंद्र प्रकाश द्विवेदी को दूरदर्शन के लिए सीरीअल बनाने वापस लौट जाना चाहिए। अक्षय को हाउस्फुल जैसी स्टूपिड मूवी ही करनी चाहिए, वह इसी लायक है। यश राज को शाहरुख खान काजोल को लेकर नब्बे के दसक वाली nri रोमांस फिल्मों तक ही सीमित रहना चाहिए।
यह सब पढ़ने के बाद भी आप यदि फिल्म देखने जा रहे हों तो अपना नाम बता दीजिएगा मैं 26 जनवरी को बहादुर बच्चों को हाथी पर बिठा कर जो पुरुष्कार मिलता है उसके लिए आपका नाम रिकमेंड करूंगा।

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