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मिस मार्ग्रेट के साथ स्वामी विवेकानंद

मधुलिका शची

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मिस मार्ग्रेट के साथ स्वामी विवेकानंद उनके घर गए । मिस मार्ग्रेट ने कहा ; आप बैठिए, मैं आपके लिए नाश्ता लेकर आ रही हूँ, स्वामी जी तो कई दिन से भोजन नहीं किये थे इसलिए उन्होंने लज़्ज़ा त्यागकर कहा : भगिनी .. मुझे बहुत जोर से भूंख लगी है ..?

मिस मार्ग्रेट मुस्कुराकर बोली : चिंता मत करें नाश्ता इतना होगा कि आपका पेट भर जाएगा ।

स्वामी जी की मिस मार्ग्रेट के रूप में स्वयं नारायण सहायता कर रहे थे। एकदिन हुआ क्या कि स्वामी जी ने एक पर्ची पर कुछ लिखा और मिस मार्ग्रेट से बोले कि इस नाम का व्यक्ति जो प्रोफेसर है और आपका मित्र है मुझसे मिलने आ रहा है ।

मिस मार्ग्रेट चौंक गई क्योंकि उन्होंने कोई भी चर्चा इस विषय में स्वामी जी से नहीं की थी। जब प्रोफेसर आये तो मिस मार्ग्रेट ने उन्हें वहां भेज दिया जहां स्वामी जी बैठे थे।
स्वामी जी ने प्रोफेसर साहब के सवाल पूछने से पहले ही उन्हें एक पर्ची थमा दी जिसमें वो सारे प्रश्न लिखे थे जिन प्रश्नों को प्रोफेसर साहब स्वामी जी से पूछने आये थे।
प्रोफेसर चौंक गए और उन्होंने स्वामी जी को दिव्य पुरूष मान लिया पर जैसे ही उन्होंने स्वामी जी को दिव्य पुरुष कहा :स्वामी जी को अपनी गलती का अहसास हो गया कि वो कौन सी गलती कर गए।
बात न जाने कैसे फैल गयी और कई लोग उनसे मिलने के लिए भीड़ लगाने लगे। बडी मुश्किल से उन्होंने प्रोफेसर से कहलवा कर लोगों को बताया कि ऐसा कुछ नहीं है।
उसके बाद से स्वामी जी ने कान पकड़ लिया ऐसा कुछ भी करने से फिर उसके बाद उन्होंने अपने ओजस्वी भाषणों से , अपनी बुद्धिमत्ता की शक्ति से पूरी दुनिया के लिए बने मंच पर भारत का लोहा मनवा दिया।
चमत्कार दिखाने की सजा उन्हें मिली थी रात को जब वो पैदल ही लौट रहे थे तभी कुछ ईसाई बच्चों ने पहले उनका मजाक उड़ाया फिर उनपर हमला कर दिया कि दिखाओ अपना चमत्कार। कुछ लेखकों का कहना है कि स्वामी जी ने उन लड़कों को अपने चातुर्य से कंट्रोल कर लिया पर कुछ लोगों का कहना है कि उन्हें उन लड़कों ने पीट दिया था औऱ वो कुछ नहीं कर पाए।
मिस मार्ग्रेट के घर पहुंचते ही उन्होंने कहा कि मुझे आज मेरे अपराध का दंड मिल गया। अच्छा हुआ , अब मैं मुक्त और निर्दोष हो गया ।
स्वामी जी ने फिर जो भी अर्जित किया वह सिर्फ और सिर्फ अपनी ओजस्वी वाणी से , उन्होंने इष्ट की शक्ति का भी कहीं प्रदर्शन नहीं किया। यही कारण है सारी बाधाओं को पार कर गए ।
शक्ति का दिखावा भोग भोगने का विधान रच ही देती है।

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