Home विषयलेखक के विचार 27 मुसलमानों का विद्रोह | तत्वज्ञ देवस्य

27 मुसलमानों का विद्रोह | तत्वज्ञ देवस्य

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जय हिंद मित्रों,
कल बाज़ार में 27 जेहादियों की दुकानें छोड़
एक सनातनी की दुकान से,
लोहे की चेन और ताला चाभी लेने गया।
दुकानदार लगभग 19–20 वर्ष का नवयुवक था,
जेहादियों के बीच रहते हुए,उसने अपना धर्म नहीं त्यागा था,
माथे पर त्रिपुंड था उसके,गले में रुद्राक्ष,
कलाई में कलावा और कड़ा
मैंने उससे कहा,”राम राम भाई,अच्छी क्वालिटी की चेन और ताला दिखाना,27 मुसलमानों की दुकान छोड़, तुम्हारे पास आया हूं।”
वो मुस्कुराया और बोला,”भईया राम राम,
बजरंगबली के भक्त हैं,
सामान में शिकायत नहीं पाएंगे।”
उसने जो सामान की कीमत बताई,
मैंने उससे मोल भाव नहीं किया,
पर उसने पैसे वापस किए तो तय कीमत से
30 रुपए कम कर दिए।
मैंने कहा “भाई जितना बताया,उतना पैसा लो,
ये पैसा तुम वापस रख लो,सामान अच्छा होना चाहिए बस,इसलिए मैंने तुमसे मोल भाव नहीं किया।”
वो फिर मुस्कुराया और कहा,”भईया जब आप पूरे बाज़ार की 27 मुसलमानों की दुकान छोड़,मेरे पास आ सकते हैं,तो मैं इतना तो कर ही सकता हूं,ये 30 रुपए बढ़ा कर तो मैं बाकी लोग से फायदा कमा लूंगा,पर आपसे नहीं,आप अपने हैं,और गल्ले से जो पैसा निकल गया,वो निकल गया।”
मैंने कई बार पैसे वापस लेने को कहा,
पर उसने हाथ जोड़े और कहा,
“आप दोबारा आइएगा मेरे पास सामान लेने,
बस उसमें ही मेरा फायदा है,हमारी दुकानों पर कम ही आते हैं हिंदू,मुसलमान तो बिलकुल नहीं आते,वो मुसलमानों की दुकान से ही खरीदते हैं,और हिंदू सस्ते के चक्कर में,उनसे खरीददारी करते रहते हैं,हम लोगों तक कोई इक्का दुक्का ग्राहक पहुंचता है,क्वालिटी अच्छी चाहता है,पर पैसे पूरे नहीं देना चाहता,उसको वही पैसे देने होते हैं,जितना उससे मुस्लिम दुकानदार,बेकार क्वालिटी के तालों,या ब्रांड के कॉपी प्रोडक्ट के लिए सस्ते दामों पर बेचता है,कमा वो हमसे ज्यादा ही लेता है,पर हिंदुओं की सस्ता ही अच्छा है,डिस्काउंट है तो अच्छा है,वाली मानसिकता,हमारा भारी नुक्सान करवाती है,आपने जैसे ही कहा आप 27 मुस्लिमों की दुकान छोड़ मेरे पास आए,बस वही मेरे लिए मेरी आज की जीत है,आज का फायदा,आप जैसे और हिंदू हो जाएं तो हिंदुओं की स्थिति इस कारोबार में अच्छी हो जाए।”
मैंने उसके साथ एक सेल्फी ली,पर वो मैं उसकी सुरक्षा के चलते स्वयं तक ही सीमित रखूंगा,अपने जान पहचान के मित्रों को उसकी दुकान का रिफ्रेंस देता रहूंगा,ताकि उसके कस्टमर बढ़ें।
उसके दुकान में ऊपर हनुमान जी की ये छवि थी,
जिसे मैं साझा कर रहा हूं,और हनुमान जी से प्रार्थना करता हूं,ऐसे सनातनी व्यापारियों की उन्नति होती रहे,
मैं भी एक व्यापारी हूं,छोटा सा जिसने काफ़ी नुकसान झेला है इन दो तीन वर्षों में,इसलिए उनका दर्द भली भांति समझ सकता हूं।
आशा करता हूं,आप सब मित्रगण,भाई/बहन इस बात पर विचार करेंगे और अपने अपने शहरों में,गांवों में सनातनी व्यापारियों से ही सामान खरीदेंगे,अगर वो सनातनी व्यापारी उस रोज़गार में हैं,जिसमें जेहादियों ने मार्केट पर कब्ज़ा कर रखा है,तो सामान लेते वक्त उनको अवश्य बताइएगा कि आप उनसे ही सामान क्यों ले रहे हैं,असली सनातनी होंगे तो अवश्य समझेंगे,
फायदा इससे,आप दोनों का होगा,आपके सनातन समाज और आपके हिंदू इकोसिस्टम का होगा।
आप जब धर्म का साथ देते हैं,
तब भगवान आपके साथी और सारथी बनते हैं.!

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