Home राजनीति इसे कहते हैं, असली मास्टर स्ट्रोक द्रोपदी मुर्मू

इसे कहते हैं, असली मास्टर स्ट्रोक द्रोपदी मुर्मू

देवेन्द्र सिकरवार

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लोगों ने एक तीर से दो शिकार की बात सुनी होगी; बंदे ने एक तीर से छ: शिकार कर लिये-
1) बीजू जनता दल के सारे वोट लेकर अपने प्रत्याशी की विजय सुनिश्चित कर ली, जो सबसे पहला लक्ष्य था।
2)भाजपा प्रत्याशी के विरुद्ध बोलने को कुछ मैटर ही नहीं छोड़ा। अब न तो प्रत्याशी को कुछ बोल सकते और न भाजपा को दलित-आदिवासी विरोधी।
3)भारत को पहला संथाल राष्ट्रप्रमुख मिलेगा जो पूरे भारत के दलितों व वनपुत्रों के लिए भाजपा जैसे राष्ट्रवादी दल की ओर से एक संदेश है।
4)इस जटिल व भ्रष्ट युग में राष्ट्रपति प्रधानमंत्री का विश्वस्त होना चाहिए वरना कई सारे कॉन्फ्लिक्ट पैदा होते हैं और द्रौपदी मुर्मू, महामहिम श्री कोविद जी की तरह नरेन्द्र मोदी जी की तरह विश्वस्त रही हैं।
5)उड़ीसा व झारखंड में धर्मांतरण अभियान चला रही ईसाई मिशनरियों के विरुद्ध कार्य कर रहे हिंदू मिशनरी युवकों को उदाहरण के रूप में एक सशक्त अस्त्र उपलब्ध कराया है।
6)उड़ीसा से ही शंकराचार्य पीठ के स्वनामधन्य निश्चलानंद व उनकी जन्मनाजातिगतश्रेष्ठतावाद की अवधारणा के समर्थक जातिवादी कुंठितों पर एक झन्नाटेदार मौन प्रहार किया है कि शास्त्रों की मनमानी व्याख्या कर जन्मनाजातिवादी श्रेष्ठता प्रतिपादित करने वालों के दिन अब लद गये।
व्यक्तिगत रूप से तो मुझे ज्यादा इंटरेस्ट नहीं था क्योंकि मुझे भरोसा था कि मोदीजी किसी उचित व्यक्तित्व को ही चुनेंगे, लेकिन भावी संथाल राष्ट्रप्रमुख की कल्पना मात्र से जिनके तनबदन में आग लग रही है, उनकी सुलगन, उनकी कुढ़न, गंधाती टिप्पणियों को देख-देख कर मुझे जैसा ‘कुटिल आनंद’ प्राप्त हो रहा है, वह वर्णनातीत है।
साथ ही आशंका है कि पूर्व राष्ट्रपति की तरह यह गिरोह हमारी भावी राष्ट्रप्रमुख को मंदिर में प्रवेश आदि को लेकर कुछ ऐसा न कर दे जो हिंदुत्व को बदनामी दे।
बहरहाल, स्वामी विवेकानंद ने संथालों के मध्य जिस अभियान को प्रारंभ किया था, आज उसने अपने लक्ष्य के एक शिखर को प्राप्त किया है।

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