Home अमित सिंघल औरंगजेब ने भिखारियों के पैसे लूट लिए थे।

औरंगजेब ने भिखारियों के पैसे लूट लिए थे।

लेखक - अमित सिंघल

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औरंगजेब ने भिखारियों के पैसे लूट लिए थे।
सोचा ओवैसी और ओवैसी समर्थको को याद दिला दूँ। अतः रिपोस्ट।
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निकोलो मनुच्ची (Niccolao Manucci) ने अपनी पुस्तक Storia do Mogor में वामपंथियों द्वारा मुग़ल काल की बनाई गयी इमेज को तोड़ दिया है।
मनुच्ची पुस्तक में कई जगह “मैं”, “मैंने देखा”, “मुझे बताया गया” इत्यादि का प्रयोग करते है।
क्योकि उन्होंने शाहजहां एवं औरंगज़ेब की रंगरेलियां प्रत्यक्ष, अपनी आँखों से देखा था।
औरंगज़ेब की सादगी और दयालु स्वाभाव की सेक्युलर बात की जाए।
मनुच्ची अपनी पुस्तक Storia do Mogor में लिखते (पेज 229-230) है कि औरंगज़ेब ने बुरहानपुर में भिखारियों को दावत पे बुलाया जहाँ उसने उन लोगो को भिक्षा देने का भी वादा किया।
बड़ी संख्या में भिखारी गण भोज के लिए आये क्योकि कोई भी दावत और भिक्षा को छोड़ना नहीं चाहता था।
दावत के बाद औरंगज़ेब ने भिखारियों को नए कपड़े दिए। लेकिन फिर उसने आदेश दिया कि सभी भिखारी गण अपने पुराने कपड़े वही छोड़ दे और नए कपड़े पहन कर महल से बाहर जाए।
एकाएक भिखारियों को औरंगज़ेब की चाल समझ में आ गयी।
भिखारियों नेे एक स्वर से विरोध किया और कहा कि उनके कपड़े धार्मिकता से जुड़े है तथा वे उन्ही कपड़ो में दफनाए जाना चाहते है जिसे उन लोगो ने जीवन भर पहना है। लेकिन उनकी आपत्ति को अस्वीकार कर दिया गया और भिखारी गण नए कपड़े पहनकर महल से बाहर चले गए।
भिखारियों के जाने के बाद औरंगज़ेब ने उन कपड़ो को उधड़वा कर उनमे छुपाई गयी स्वर्ण मुद्राएं निकलवा लिया।
मनुच्ची लिखते है कि औरंगज़ेब को पता लग गया था कि भिखारी गण पैबंद लगे कपड़ो में बड़ी मात्रा में भीख में मिला धन रखते है। यही कारण था कि उसने उन भिखारियों को भोज पे बुला कर नए कपड़े दिए। उसने त्याग का लाबाद ओढ़कर कई लोगो को धोखा दिया था।
पुस्तक में इस घटना के वर्णन के बाद औरंगज़ेब के शराब पीने, रंगरेलियां और “धार्मिक सहिष्णुता” के उदहारण दिए गए है।

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