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कांग्रेस का अंत और उसका कोहराम

Dayanand Panday

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अगर कांग्रेस इसी तरह का विरोध का कोहराम मचाती रही , चीन और कोरोना पर काइयांपन कूतती रही , अपनी पोल-पट्टी खुलवाती रही तो यक़ीन मानिए 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस दहाई की संख्या भी छू ले तो बहुत है। बहुत संभव है , इस समय कांग्रेस के कंधे से कंधा मिला कर चलने वाले , कांग्रेस के लिए आऊटसोर्सिंग करने वाले वामपंथियों की दुर्दशा को प्राप्त कर जाए कांग्रेस। जैसे संसदीय राजनीति से वामपंथी निरंतर विदा होते गए हैं , अब सिर्फ़ अवशेष की तरह उपस्थित हैं।
वामपंथी जैसे वीरगति को प्राप्त हुए , कांग्रेस भी इसी तरह वीरगति पाने को निरंतर अग्रसर है। जो थेथरई , गलदोदई इन दिनों कांग्रेस कर रही है , वामपंथी , अरसे से यही करते रहे हैं। दुर्गति इतनी हो गई कि वामपंथियों के पास अब कांग्रेस की आऊटसोर्सिंग करने के सिवाय कोई काम ही शेष नहीं रह गया है। चुनाव लड़ना भी वामपंथियों के लिए अब सपना हो चला है। अपने दम पर चुनाव लड़ने लायक नहीं रह गए हैं।
समझौते में कोई पार्टी , किसी राज्य में कोई एक सीट भी देने को तैयार नहीं रहती। कांग्रेस भी नहीं। ले दे कर सारी जागीर केरल में सिमट कर रह गई है , वामपंथियों की।खैर , सवाल यह भी दिलचस्प है कि संसदीय राजनीति से बाहर हो कर भी वामपंथियों के पास कम से कम कांग्रेस की आऊटसोर्सिंग करने का काम तो है। पर जब कांग्रेस भी वामपंथियों की तरह सिमट कर रह जाएगी , तो दोनों क्या करेंगे। क्यों कि कांग्रेस के पापों पर मोदी सरकार खुले तौर पर भले कोई क़ानूनी कार्रवाई नहीं कर रही है , विक्टिम कार्ड नहीं खेलने दे रही कांग्रेस को।
पर जनता तो कार्रवाई करती है चुपचाप , लेकिन चुनाव में। क्यों कि यह पब्लिक है , सब जानती है। कांग्रेस और कम्युनिस्ट इस बात को अभी समझ नहीं पा रहे। जब तक समझ आएगा , बहुत देर हो चुकी होगी। कांग्रेस चुनाव में कपूर की तरह उड़ चुकी होगी। मन करे तो मेरी यह बात लिख कर कहीं रख लीजिए ताकि सनद रहे और वक्त, ज़रूरत काम आए।

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