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जेफ बेजोस के अमेज़न की कहानी

by राजीव मिश्रा
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अभी अभी फ़ेसबुक पर एक वीडियो दिखाई दिया जेफ बेजोस के बारे में. कि किस तरह उसका अमेज़न एक छोटे से स्टार्ट अप से शुरू होकर आज दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी बन गया और किस तरह वह दुनिया का सबसे अमीर आदमी (अभी दूसरा सबसे अमीर) बन गया.
उस वीडियो में जहाँ एक तरफ तारीफ थी कि उसका नेट वर्थ 193 बिलियन डॉलर कितने देशों की जीडीपी से अधिक है और कि वह प्रतिदिन कितने मिलियन कमाता है. वहीं उसकी आलोचना भी थी कि उसने छोटे बिजनेस का नुकसान किया और अपने वर्कर्स का ख्याल नहीं रखता, और गरीबों के लिए कुछ नहीं करता.
फिर वीडियो खत्म होता है इस बात से कि बेजोस ने कहा है कि वह अपनी संपत्ति को मानवता की सेवा में लगाना चाहता है और उसने अभी एक बिलियन डॉलर चैरिटी में दिया.
अब जॉफ बेजोस को #BasicEconomics की दृष्टि से देखिए और उसकी बात को #विषैलावामपंथ की भाषा में ट्रांसलेट कीजिये.
क्या जॉफ बेजोस ने आजतक मानवता का भला नहीं किया? उसने जो किया वह मानवता के लिए उपयोगी रहा होगा तभी तो मानवता ने उसको बदले में 193 बिलियन डॉलर दिए.
तो अब वह मानवता की भलाई चैरिटी से कैसे करेगा? और क्यों करेगा? क्योंकि नहीं करेगा तो दुनिया में कुछ लोग ऐसे हैं जो उससे जबरन चैरिटी करवाएँगे. उसकी नेगेटिव पब्लिसिटी करेंगे, उसको कहीं लेबर लॉ, कहीं एनवायरनमेंट तो कहीं टैक्स के नाम पर कोर्ट में घसीटेंगे और उसके इन्वेस्टर्स को यह संदेश देंगे कि उसका बिजनेस खतरे में है, उपभोक्ता को यह बताएँगे कि अमेज़न एक हृदयहीन, एक दुष्ट कंपनी है जो गरीबों का शोषण करती है. भीड़ जुटा कर अमेज़न के वेयरहाउस का घेराव और तोड़फोड़ करेंगे और उसकी सप्लाई को बाधित करेंगे.
अब ऐसा है कि बिजनेसमैन लफड़ा नहीं माँगता. तो वह इन सभी हुड़दंगियों को खिला पिला कर चुप रखता है, और इसे चैरिटी कहते हैं. साथ ही उसे भाई के आदमियों को अपने यहाँ नौकरी भी देनी है. तो वह अपने HR डिपार्टमेंट में एक डाइवर्सिटी को-ऑर्डिनेटर, एक इक्वलिटी मॉनिटर रखता है जो कम्पनी में LGBTQ के लिए प्रचार करते हैं, जेंडर फ्लुइडिटी पर सेमिनार करते हैं और आफिस में सतरंगी पर्दे लगवाते हैं.
फिर जॉफ बेजोस को बिल गेट्स की तरह ऑफिस में इन सतरंगी पर्दों की ताकत का एहसास हो जाएगा. और वह समझने लगेगा कि आपका पार्सल आपके घर पर सही समय से पहुँचाने से उसे सिर्फ डॉलर मिलेंगे. पर अगर वह अपने ऑफिस में सतरंगी पर्दे लगवायेगा और अपने वेयरहाउस को सतरंगी रंग से रंगवा देगा तो उसे डॉलर से बड़ी चीज मिलेगी…पॉवर में हिस्सा मिलेगा.
आपने पिछले दिनों बिल गेट्स को इमरान खान के साथ देखा. आपने गेट्स की बेटी की एक जमाती से शादी की खबर सुनी, आपने गेट्स को कोरोना में चीनी कंपनियों से हिलते मिलते देखा… यह क्या है? यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आपके शहर का कोई बड़ा व्यवसायी कोई राजनीतिक पार्टी जॉइन कर लेता है. वर्षों तक वह सिर्फ पार्टी को चंदा देता था, पर अब वह खुद पार्टी जॉइन कर लेता है. तो ऐसा है कि जॉफ बेजोस अभी तक वामपन्थियों को चंदा देता है, जबकि बिल गेट्स ने पार्टी ही जॉइन कर ली है. बिल गेट्स आज दुनिया का सबसे धनी व्यक्ति नहीं रहा, क्योंकि उसने अपनी संपत्ति को एक नए फील्ड में इन्वेस्ट किया है – पॉवर में. और पॉवर की करेंसी डॉलर की करेंसी से बड़ी है, उसे डॉलर्स में नहीं मापा जा सकता.

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