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दलितों_की_शिकायतें

देवेन्द्र सिकरवार

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हिन्दुत्ववादी दलित चिंतक अक्सर एक बात की शिकायत करते पाये जाते हैं कि ब्राह्मण मनमानी धार्मिक व्याख्या कर उन्हें हिन्दुत्व से दूर कर रहे हैं।
माफ कीजिये, यहाँ मैं आपका साथ नहीं दूंगा क्योंकि हीनताबोध, श्रेष्ठताबोध का ही दूसरा पहलू है।
मैं कहता हूँ आपको उनकी व्याख्या, मान्यता चाहिए ही क्यों?
वे आपको नीचा मानते हैं, आप उन्हें अपने से नीचा घोषित कर दें, किसने रोका है?
वे आपको यज्ञ-उपवीत का अधिकारी नहीं मानते, तो आप स्वयं पहनना शुरू कर दें, कौन रोकेगा? हाँ, उसकी मर्यादा का पालन करना होगा।
वे वेदपाठ न करें, आप स्वयं संस्कृत सीखकर वेदपाठ करें, देखें कौन सीसा डालने आता है?


वे आपको यज्ञ हवन न कराएं, आप ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का महामंत्र बोलकर स्वयं आहुति दीजिये, समस्त देवता तृप्त हो जाएंगे।
वे आपको मंदिर आने पर प्रतिबंध लगाते हैं, आप एक कुटीर में महादेव की पिंडी या राम सीता या राधा-कृष्ण, भगवान बुद्ध, रैदास, अम्बेडकर की मूर्ति पधरा दें और बाहर मोटे-मोटे अक्षरों में लिख दें-“सवर्णों का प्रवेश निषेध।”

वे आपको शंकराचार्य पद के योग्य नहीं मानते, आप अपनी अलग पीठ घोषित कर दें, कौन रोक सकता है जबकि पचास से ज्यादा शंकराचार्य और हजारों मठाधीश पहले से ही घूम रहे हैं।
आप पूरे हिंदुओं को झकझोर दीजिये क्योंकि चाहे राजनैतिक हों या सामाजिक-धार्मिक, अधिकार छीनने से मिलते हैं न कि हिंदुत्व में अपने ही हिस्से को छोड़कर भागने से।
अगर वेदों की ऋचाओं को ब्राह्मण वसिष्ठ और क्षत्रिय विश्वामित्र ने रचा है तो शूद्र महिदास ऐतरेय ने भी रचा है।
आपकी सामाजिक स्थिति के लिए ब्राह्मण नहीं, आप स्वयं जिम्मेदार हो जो उनसे अपेक्षा करते हो और उनसे अधिकार मांगते हो।

गिड़गिडाइये मत बल्कि हिंदुत्व पर अपना दावा ठोकिये, हिंदुत्व के स्टेक होल्डर बनिये।
झकझोर डालिये हिंदुत्व को और उसकी रक्षा भी कीजिये।
‘भीम-मीम’ समीकरण से सिर्फ चंद्रशेखर रावण जैसा गुंडत्व मिलेगा जबकि हिंदुत्व के स्टेक होल्डर बनने से ‘पूर्ण सत्ता’।
हिंदुत्व पर अपने अधिकार का दावा ठोकिये।
हिंदुत्व के स्टेक होल्डर बनिये, स्वाभिमान व सत्ता का रास्ता यहीं से निकलेगा।

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