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पुतिन सोच रहे थे एक दो दिन में यूक्रेन के भूसा भर देंगे

by Umrao Vivek Samajik Yayavar
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पुतिन सोच रहे थे एक दो दिन में यूक्रेन के भूसा भर देंगे
पहले पुतिन साहब सोच रहे थे कि एक दो दिन में यूक्रेन के भूसा भर देंगे। यूक्रेन के लोग पुतिन की सेना का घनघोर स्वागत करेंगे और कहेंगे कि हमारा ईश्वर आ गया, हमारा तारणहार आ गया। चूंकि पुतिन अपने बनाए गए खोल के अनुसार ही सोचते विचारते हैं। जैसी पुतिन जैसों व तथाकथित साम्यवादी राजनैतिक सत्ताओं की सामान्य आदत होती है कि ये एक फर्जी राक्षस गढ़ते हैं और इतना अधिक प्रोपागंडा करते हैं कि वह सच मान लिया जाए। जो इनके प्रोपागंडा पर सवाल उठाए उसे राक्षस से प्रभावित करार दे दिया जाता है।
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पुतिन इसी रणनीति के तहत यूक्रेन में नाजी लोग हैं, इत्यादि-इत्यादि फर्जीवाड़ा गढ़ते रहे। पुतिन भगत लोग इस जैसे फर्जी प्रोपागंडाओं को पक्का करने में जोर लगाते रहे। जबकि यदि गंभीरता से मूल्यांकन किया जाए तो पुतिन व पुतिन के समर्थक खुद अपने आपमे खालिस नाजीवादी हैं। खैर ई सब बात पर फिर कभी।
तो पुतिन साहब ने सोचा कि यूक्रेन के लोग लाल-कालीन स्वागत करेंगे। इसलिए बिना गंभीर तैयारी के ताकत के अहंकार में यूक्रेन को डराने के लिए एक लाख से अधिक की सेना झोंक दी। ताकत का अहंकार इतना अधिक कि कल्पना भी नहीं किए कि यूक्रेन में रूस की सेना का विरोध भी हो सकता है। घोर सामंती मानसिकता का प्रतीक हैं पुतिन साहब।
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मालूम पड़ा कि यूक्रेन को दो दिन क्या दो हफ्तों में भी नहीं झुका सके। उल्टे दुनिया भर के देशों व आम लोगों का सहयोग पहुंचना शुरू हो गया यूक्रेन। दुनिया के अनेक देशों से लोग यूक्रेन से कोई रिश्ता न होने के बावजूद बिना किसी वेतन के जान हथेली पर रखकर लोग यूक्रेन पहुंच कर यूक्रेन के आम लोगों के साथ मिलकर युद्ध लड़ना शुरू कर दिए। वहीं पुतिन के भगत लोग फेसबुक इत्यादि पर पोस्ट व कमेंट से आगे न बढ़ पाए, पुतिन ने सीरिया के लोगों को पैसे देकर बुलाने का भी प्रयास किया जो सफल नहीं हुआ।
हजारों रूसी सैनिकों की मौतें हो गईं, रूसी सेना के कई जनरल मार दिए गए। फ्लैग-शिप जहाजों को डुबा दिया गया। रुस के हजारों टैंको तोपों को नष्ट कर दिया गया। जिस रूस की सेना को दुनिया की सबसे बेहतरीन सेनाओं में से माना जाता था, वह मिथक चूर-चूर हो गया।
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ज्यों-ज्यों यूक्रेन को सैन्य मदद यूक्रेन पहुंचने लगी, यूक्रेन के आम लोगों का हौसला और बढ़ता गया। रूस की सेना द्वारा कब्जाए गए शहरों को यूक्रेन के लोग वापस लेने लगे। कई सप्ताह तक यूक्रेन की राजधानी तक बढ़ने का भरपूर प्रयास किया रूसी सेना ने। अनेकों मिसाइलें दागीं, लाखों निर्दोष आम लोगों का जन-संहार किया, हजारों छोटे बच्चों की हत्याएं की (यह सब पुतिन भगत लोगों की नजरों में बिलकुल जायज है, भगतई हो तो पुतिन भगतों जैसी, दिन तो रात, रात को दिन, आम को इमली कहने जैसी खालिस अंध-भगतई)।
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स्थितियां यहां तक आ गईं हैं कि दुनिया के देश यूक्रेन में अपने दूतावासों को फिर से खोलने लगे हैं।
रूसी सेना की फजीहत होती देख, पुतिन साहब ने कई सौ सैन्य प्रशासन अधिकारियों को बर्खास्त किया, जेल भेजा, मृत्युदंड दिया। पुतिन साहब को भलीभांति मालूम हो चुका है कि स्थिति इतनी फजीहत वाली है कि युद्ध लंबा नहीं खींचा जा सकता है। लंबा खींचने पर रूसी सेना की स्पष्ट हार सामने आ जाएगी। वैसे भी आज नहीं तो कल रूसी लोगों के सामने जो झूठों के पहाड़ खड़े कर प्रोपागंडा पुतिन साहब ने गढ़े हैं, उनकी भी पोल आज नहीं तो कल खुलनी ही है। इसलिए युद्ध को या तो विश्वयुद्ध या परमाणु युद्ध की ओर ले जाया जाए या कोई नया नैरेटिव गढ़ा जाए ताकि पुतिन यह प्रोपागंडा रूसी लोगों के सामने कर सकें कि जो काम करना चाहते थे वह काम पूरा हुआ।
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रही बात विश्वयुद्ध या परमाणु युद्ध की तो दो महीनों से अधिक समय हो चुका है, नाटो व अमेरिका ने रूस को ऐसा कोई मौका ही नहीं दिया है कि पुतिन को बहाना मिल सके। जबकि पुतिन की गीदड़ भभकी पर ध्यान नहीं देते हुए यूक्रेन को बिना युद्ध में सीधी भागीदारी किए हुए लगातार बढ़ते हुए क्रम में सहयोग जारी है। पुतिन की नाक में नकेल कस दिया है, रूस के बाहर पुतिन व पुतिन भगतों के फर्जी प्रोपागंडे व नैरेटिव काम नहीं आ रहे हैं।
यूक्रेन में युद्ध पुतिन साहब जीत नहीं पा रहे हैं, उल्टे रूस की सेना को बहुत नुकसान हो रहा है। प्लान “अ” फेल होने पर पुतिन साहब प्लान “ब” की ओर बढ़ते हैं। यूक्रेन के उन इलाकों को घेरने की ओर बढ़ रहे हैं जहां पिछले दस सालों से पुतिन यूक्रेन के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियां चलवा रहे थे।
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इन इलाकों को घेरकर अपने ही पाले गए लोगों की हत्याएं करके, इन इलाकों पर कब्जा दिखाकर पुतिन रूस के आम लोगों को यह नैरेटिव बनाएंगे कि यूक्रेन में जहां-जहां गड़बड़ थी वहां-वहां मिसाइलें दागीं बम गिराए नष्ट कर दिया और यूक्रेन के एक इलाके को जिसको यूक्रेन ने जबरिया कब्जा रखा था उसको मुक्त करा लिया है। बताएंगे कि मिलिट्री आपरेशन सफल रहा।
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पुतिन साहब यह सब करना चाहते हैं 9 मई के पहले, क्योंकि 9 मई रूस के सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक है।
अब पेंच यह है कि मान लीजिए पुतिन का प्लान “ब” 9 मई तक सफल नहीं हो पाता है। तब पुतिन क्या करेंगे, क्योंकि ऐसा होने पर पुतिन के अहंकार को भयंकर आघात मिलेगा, रूस के अंदर उनके ईश्वरत्व पर सवाल खड़ा होगा, गढ़े गए नैरेटिव्स की ऐसी-तैसी होनी शुरू हो जाएगी।
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बिना नैरेटिव गढ़े हुए, बिना खुद को विजयी दिखाए हुए, पुतिन जैसा मानसिक बीमार व अहंकारी आदमी युद्ध रोकेगा तो रोकेगा कैसे। यदि प्लान “ब” सफल हो गया तो ठीक, लेकिन यदि सफल नहीं हुआ तो पुतिन जैसा बर्बर हिंसक जन-हत्यारा आदमी खिसिया कर किस हद तक नीचे उतरेगा, यह अगले कुछ हफ्तों में ही पता चल पाएगा।

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