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ब्रज इतिहास भाग -6

Mann Ji

by Mann Jee
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गोकुल युद्ध के बाद अब्दाली ने जहाँ खान और नजीब को आगरा उर्फ़ अकबराबाद भेजा ताकि आगरा को भी मथुरा और वृन्दावन की तर्ज पर लूटा जा सके . २१ मार्च १७५७ को जहाँ खान आगरा जा पंहुचा और अब्दाली महावन में रुका रहा . आगरा में मथुरा वृन्दावन की खबरे पहुंच चुकी थी और आगरा के अग्रिम नागरिको ने जहाँ खान से पांच लाख रुपये फिरौती के एवज में खून खराबा न करने का वादा लिया . लेकिन जहाँ खान ने आगरा किले पर धावा बोला, शहर में भी लूट मार मचाई। बंगाल के जगत सेठ के गुमाश्ते समलदास से एक लाख रुपये भी उघा लिए।

२३ मार्च को जहाँ खान को अब्दाली का अर्जेंट मैसेज आया और वापस लौटने को कहा। महावन में हैजा फ़ैल चूका था – स्वाभाविक भी था। यमुना जी का जल सात दिनों तक लाल और फिर पीला हुआ था – उसी जल से अब्दाली के सिपाही अपनी प्यास बुझा रहे थे। इसी जल में हज़ारो शव भी बहाये गए थे। डेढ़ सौ अफगानी बर्बर सिपाही प्रति दिन के औसत से काल के गाल में समां रहे थे। जिन अफ़्ग़ानियो ने पांच पांच रुपये प्रति काफिर मुंड के हिसाब से सनातनियो के सर काटे थे – वो सिपाही सौ रुपये की इमली से बनी दवाई खरीदने के लिए विवश थे। अब्दाली की फ़ौज में मौत का नज़ारा इतना भित्सव था कि घोड़े के मांस की कमी पड़ने लगी थी। सिपाहियो ने बवाल काट दिया वापस लौटने के लिए। अब तक सूर्य देव के तापमान ने भी प्रकोप मचा दिया था। कुल मिला कर अब्दाली के पास ना पानी था , ना खाने की रसद और बीमार मरते सिपाही।

२६ मार्च को अब्दाली ने मुग़ल बादशाह आलमगीर द्वितीय को पैगाम भेजा – हम दिल्ली वापस आ रहे और आकर मुहम्मद शाह रंगीला की बेटी हज़रत महल से निकाह करेंगे। मल्लिका उज़ जमनी और साहिबा बेगम ने बादशाह से रो रो गुहार लगाई – हज़रत महल को ज़हर दे दो लेकिन इस कोढ़ी अब्दाली के हवाले ना करो। लेकिन ऐसा ना हुआ और जिन मुगलो ने भारत के कोने कोने से स्त्रीया अपहृत की थी – उनकी खुद की बेटी उनकी आँखों के सामने एक बुड्ढा कोढ़ी लुटेरा ले गया।

कहानी बहुत शेष है लेकिन ब्रज के सन्दर्भ में ये थी एक अनसुनी सी कहानी।

उम्मीद है – इस सीरीज से ब्रज वासियो और बाकी सनातनियो को कुछ नया ज्ञात हुआ होगा।

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