Home लेखक और लेखपुष्कर अवस्थी मोदी जी अब सामान्य हिन्दू ना हो कर जय भीम हो गए हैं

मोदी जी अब सामान्य हिन्दू ना हो कर जय भीम हो गए हैं

pushkerawasthi

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कल पहले ट्विटर पर और फिर फेसबुक पर एक से बड़े सनातनियों को तेलांगना में, मोदी जी द्वारा नीला वस्त्र स्वीकार कर भगवा वस्त्र अस्वीकार करने पर, विधवा विलाप और अजातशत्रु बनते हुए देखा है। मैने भी वह देखा था लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं दी क्योंकि मुझे इस बात का विश्वास था की विरोधी जो तबला, हरमोनियम बजा रहे है और उसकी ताल पर सनातनी, उमराव जान बने महफिल सजाए हुए है, वह पूर्ण सत्य नही हो सकता है।
अब मैं @EkVishwa के ट्वीट थ्रेड को, उसी स्वरूप में, डाल रहा हूं ताकि जिसे अपने अपने अर्थसत्य से मुक्ति पाने की उत्कंठा हो, वह अपना मार्ग स्वयं चुन ले।
“देखिये जब आपके पास विरोध के लिए कोई ठोस वजह नहीं होती… तब ही ऐसी बातें उठाई जाती हैं.
पहले यह कांग्रेस वाले करते थे… मोदी का कोट, मोदी का चश्मा, मोदी की माँ, मोदी की बीवी, मोदी के दोस्त आदि आदि…… लेकिन अब यह काम कट्टर type के लोगों को ठेके पर दे दिया गया है।
आज एक ख़बर चल रही है…. ख़बर चलाने वाली हैं महोदया रितु राठौर जी…. अरे वही जो राजस्थान के चुनाव के समय मंदिरो के टूटने पर आधी अधूरी बात बताया करती थी… वही तो रामगंज के दंगों की आधी अधूरी अफवाह फैला कर narrative बनाती थी.
ख़बर जो नहीं थी, लेकिन बनाई गयी –
तेलंगाना में एक ‘सरकारी’ कार्यक्रम था… उसमे मोदी जी को एक बंदा भगवा वस्त्र दे रहा था.. उन्होने लेने से मना कर दिया…. भगवा का अपमान कर दिया…. फिर थोड़ी देर में एक और इंसान से नीले रंग का वस्त्र धारण कर लिया…. मतलब मोदी जी अब हिन्दू ना हो कर जय भीम हो गए हैं.
इस ख़बर पर गजब चूड़िया टूटी…..हाय मोदी तुम बदल गए…. हाय तुमने तो भगवा छोड़ दिया….आरएसएस ने भी यही कहा था कुछ दिन पहले…..मोदी ने पाला बदल दिया.
सत्य क्या है???
ऊपर लिखे हुए में एक शब्द देखिये… सरकारी. जब समारोह सरकारी था तो उसमे पार्टी का वस्त्र लेने की कोई जरूरत नहीं थी… जो भगवा कपड़ा था उसमे पार्टी का नाम, झंडा आदि लगा हुआ था…इसलिए नहीं लिया.
अब आइये जय भीम पर… जो कपड़ा दिया गया था, वो तेलंगाना सरकार की तरफ से दिया गया था…. और वही नीला नहीं था..
बल्कि उसमे लाल रंग भी था…. यह वस्त्र मोदी जी को पहले भी दिया जा चुका है… रंग नहीं दिख रहे… वो आपको बता रही है की मोदी जय भीम हो गए हैं.
बाकि रितु राठौड़ और उनके जैसे कथित कट्टर छापो से यही कहना है…. तुम डाल डाल हम पात पात… दिखाओ दम, हम भी बैठे हैं.”
यहां, अर्थसत्य को सत्य ही मान लेने और उसे पूर्ण सत्य के रूप में प्रसारित करने का अपराध करने वालों की सनातन के प्रति प्रतिबद्धता अवश्य अडिग है किंतु अपने स्वयं के अहम की संतुष्टि में, वे अंजाने में सनातनियों में ही अविश्वास का बीज रोपित करने का भी अपराध कर जाते है। मुझे इसकी अवश्य पीड़ा है की इस भीड़ मे मेरे कुछ अपने अनुज भी है। मुझे इन अनुजो को यही संदेश देना है की जहां मुझे, विचारधारा के प्रति उनके समर्पण और शुचिता पर कोई संदेह नहीं है वहीं उनके बौद्धिक अहंकार में कुंठित ही बने रहने की प्रतिबद्धता पर भी कोई संदेह नहीं है।

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