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मोदी सरकार के तीन वृहद लक्ष्य

Amit Singhal

by अमित सिंघल
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मोदी सरकार का प्रथम लक्ष्य है भ्रष्ट अभिजात वर्ग का रचनात्मक विनाश करना; जो वह कर रहे है। इस वर्ग के विनाश से ही अराजक तत्वों का विध्वंस हो जाएगा क्योकि यही सड़ा-गला अभिजात्य वर्ग इन तत्वों को पाल-पोस रहा है, बढ़ावा दे रहा है।
दूसरा लक्ष्य है भारत का त्वरित विकास करना जो हो रहा है।
तीसरा लक्ष्य है भारत का सांस्कृतिक पुनर्जागरण करना जिसके लिए चुनाव जीतना होगा। वह भी हो रहा है।
पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री मोदी ने इन वृहद लक्ष्यों के बारे में पुनः पुष्टि की।
प्रथम, प्रगति मैदान इंटीग्रेटेड ट्रांजिट कॉरिडोर के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री जी ने कहा कि हमारे देश में ऐसा कुछ भी काम करो तो न्यायलय का दरवाजा खटखटाने वाले लोगों की भी कमी नहीं है। हर चीज में टांग अड़ाने वाले होते ही हैं। अनेक मुसीबतें पैदा होती हैं देश को आगे ले जाने में। लेकिन ये नया भारत है। समस्याओं का समाधान भी करता है, नए संकल्प भी लेता है और उन संकल्पो को सिद्ध करने के लिए अहर्निष (दिन-रात बिना रुके, लगातार) प्रयास करता है।
एक तरह से प्रधानमंत्री मोदी ने उसी भ्रष्ट अभिजात वर्ग का उल्लेख किया जो जानबूझकर राष्ट्र की प्रगति में रोढ़े अटका रहा है; लेकिन यह भी कहा कि नया भारत है। समस्याओं का समाधान भी करता है; अर्थात, ऐसे तत्वों से निपटा जा रहा है।
द्वितीय, उन्होंने उल्लेख किया कि शहरी गरीबों से लेकर शहरी मिडिल क्लास तक, हर किसी के लिए बेहतर सुविधाएं देने पर आज तेज गति से काम हो रहा है। बीते 8 साल में 1 करोड़ 70 लाख से ज्यादा शहरी गरीबों को पक्के घर देना सुनिश्चित हुआ है। मध्यम वर्ग के लाखों परिवारों को भी उनके घर के लिए मदद दी गई है। शहरों में अगर आधुनिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर फोकस किया जा रहा है तो CNG आधारित मोबिलिटी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी उतना ही अधिक फोकस कर रहे हैं। साथ ही, कहा कि अगर मैं किसी को 100 रुपये देने की घोषणा करूं तो मेरे देश में हेडलाइन बन जाती है। लेकिन मैं अगर ऐसी व्यवस्था करूं जिसके कारण उसके दो सौ रुपये बचते हैं, वो खबर नहीं बनती है।
अंत में, पावागढ़ पहाड़ी पर श्री कालिका माता के पुनर्विकसित मंदिर के उद्घाटन के अवसर पर 18 जून को प्रधानमंत्री जी ने याद दिलाया कि 5 शताब्दी के बाद और आजादी के 75 साल बीतने के बाद तक कालिका माता के शिखर पर ध्वजा नहीं फहरी थी। आज मां काली के शिखर पर ध्वजा है। अयोध्या में भव्य राममंदिर आकार ले रहा है, काशी में विश्वनाथ धाम हो या फिर केदार बाबा का धाम हो, आज भारत के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गौरव पुनर्स्थापित हो रहे हैं। आज नया भारत अपनी आधुनिक आकांक्षाओं के साथ साथ अपनी प्राचीन धरोहरों को भी, प्राचीन पहचान को भी उसी उमंग और उत्साह के साथ जी रहा है, हर भारतीय उस पर गर्व कर रहा है। हमारा ये आध्यात्मिक स्थल, हमारी श्रद्धा के साथ साथ नई संभावनाओं के भी स्रोत बन रहे हैं। पावागढ़ में मां कालिका मंदिर का पुनर्निर्माण हमारी इसी गौरव यात्रा का एक हिस्सा है।
अतः हर मुद्दे पे ताल ठोकने की आवश्यकता नहीं है। ना ही इन लक्ष्यों से भटकना है।

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