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रामम्, राघवम्, रणधीरम्, राजसम्

by Swami Vyalok
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और..जब डॉल्बी डिजिटल में वह गुरु-गंभीर आवाज़ गूंजती है- रामम्, राघवम्, रणधीरम्, राजसम्….तो लगता हैै कि सिनेमा का व्याकरण सचमुच बदल रहा है। या फिर, दक्षिण भारतीय फिल्मों में यह लगातार चल ही रहा हो, हम बंबइया गटर देखने के इतने आदी हो चुके हैं कि यह हमें दिखता नहीं था।
बहरहाल, मुख्यधारा की एक फिल्म में राम की स्तुति संस्कृत में पूरे अल्ट्रा-मॉडर्न संगीत के साथ सुनना सुखद है। बाकी बातें छोड़ दें, लेकिन अब आपका धर्म फैशन में हैं, It is in vogue, it is the in thing…Bro!
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…मेरे दादा पुजारी थे। गांव के मठ के। वैष्णव। भगवद्भीरु, सज्जनता के चरम और राम की भक्ति में लीन। नाम था रामभद्र पाठक, दूसरे बाबा का रामचंद्र। पहला परिचय तो राम से वहीं हुआ। फिर, पिता के सुपरिन्टेंडेंट क्वार्टर में जब रहने आते थे, तो गोद में लेकर ‘श्रीरामचंद्र कृपालु भजमन, हरण भव भय दारुणम्….’ सुनाते थे। राम को वहीं से जानना शुरू किया। एकश्लोकी रामायण ‘आदौराम तपोवनादि गमनम्….’ से लेकर ‘वर्णानामर्थसंघाना रसानां छंदसामपि….’तक उनकी गोद में सीखा।
उनके कंधों पर बैठकर ही वे सारे श्लोक सीखे, जो अब तक याद हैं। जिनकी वजह से लोग मुझे जानकार समझने की गलतफहमी पाल लेते हैं। अच्छे लोगों की तरह वह भी अधिक दिन मेरे साथ नहीं रहे, मैं सात-आठ साल का था, तो वो वैकुंठवासी हो गए।
उसके बाद राम से परिचय कराया- पिता की लाइब्रेरी ने। फिर, पिता के पीछे खड़ा रहता था, जब वह अपने छात्रों को पढ़ाते थे। भक्तिकाल के दौरान राम की जब वह व्याख्या करते थे, तो राम को असल में समझा।
हालांकि, राम से असल परिचय JNU के कम्युनिस्टों ने कराया। जब उन्होंने मेरे तिलक का उपहास किया, क्लास में सिंगल आउट कर मेरी आस्था का मज़ाक उड़ाया, संघी गुंडा कह कर उपहास किया, तो राम से सही मायनों में जुड़ाव हुआ।
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आज का दिन है। अयोध्या में भव्य राम-मंदिर बनने वाला है। हरेक जगह दीवार से सटनेवाला हिंदू अब प्रतिकार कर रहा है। कर्णाटक ही शायद राह दिखाए। हालांकि, यह मैं कई साल पहले कह चुका हूं कि हिंदुत्व की नयी जमीन तो दक्षिण ही देगा, उत्तर तो विनष्ट हो चुका है। कर्णाटक ने पहले हिजाब और फिर हलाल पर जो प्रतिक्रिया दी है, उसी से मोमिनों को यह हास्यास्पद अपील करनी पड़ी है कि रमजान में हिंदू भी मस्जिदों में आर्थिक गतिविधि करते हैं और उन्हें कोई तंग न करे। यह इतनी हास्यास्पद फेक-न्यूज है, इतना घटिया विक्टिम-कार्ड है कि इस पर कुछ बोलने की जरूरत ही नहीं।
बहुत बातें हैं कहने को। होतीं रहेंगी। अस्तु, भारतीय (हिंदू) नववर्ष की आप सभी को बधाई। आज से चैत्र नवरात्रि का व्रत शुरू हो गया है। प्रतिदिन का रामचरितमानस पाठ भी चालू आहे…..
एक बार फिर से आप सभी को बधाई…..

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