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रूस ने यूक्रेन पर कब्जा करने के लिए भयंकर व एक तरफा हमला किया

by Umrao Vivek Samajik Yayavar
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जबसे रूस ने यूक्रेन पर कब्जा करने के लिए भयंकर व एकतरफा हमला किया है कि एक-एक शहर को नेस्तनाबूत करने का काम कर रहा है। इस तरह का युद्ध आधुनिक युग में नहीं किया गया है। यह ऐसा युद्ध है जिसमें एक बहुत ही अधिक ताकतवर देश जबरदस्ती एक छोटे से देश (बड़े डायनासोर के सामने एक छोटा सा चूहा) पर बिना किसी कारण हमला करके नष्ट कर रहा है। यूक्रेन तो रूस के साथ युद्ध कर ही नहीं रहा है, यूक्रेन तो केवल खुद को बचाने का प्रयास कर रहा है। यह एकतरफा युद्ध है।
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बहुत लोग यह कुतर्क देते हैं कि यूक्रेन नाटो में शामिल होना चाह रहा था, यूक्रेन रूस के सीमा साझा करता है, रूस क्यों चाहेगा कि उसका कोई पड़ोसी नाटो में शामिल हो, इसलिए ऐसा करना रूस अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी समझता है। जो स्वयंभू बकैत-विद्वान यह कहते हैं कि चूंकि यूक्रेन रूस का पड़ोसी है, इसलिए यदि वह नाटो में शामिल होगा तो रूस उस पर हमला करेगा ही। तो इन बकैत-विश्लेषकों के लिए जानकारी देता हूं, कि —
इस्टोनिया, लातविया, लिथुआनिया, नार्वे, पोलैंड ये पांच देश रूस के साथ सीमाएं साझा करते हैं और नाटो के पूर्णकालिक सदस्य हैं। इन पांच में से नार्वे को छोड़ बाकी चार देशों ने 1999 या उसके कई सालों बाद नाटो ज्वाइन किया। पुतिन ने किसी पर हमला नहीं किया, जबकि इनमें से कई देशों ने तो तब नाटो ज्वाइन किया जब पुतिन रूस के राष्ट्रपति रहे।
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रूस ने रूस के अंदर मीडिया पूरी तरह से प्रतिबंधित कर रखा है, वेब-मीडिया, ब्लाग्स इत्यादि सभी को प्रतिबंधित किया जा रहा है जो भी यूक्रेन में होने वाली घटनाओं की हकीकत रूस के अंदर उपलब्ध कराता दीख जाता है। रूसी मीडिया द्वारा पूरी तरह से झूठी व फरेबी खबरें दी जा रही हैं। रूसी मीडिया रूस के लोगों को बता रहा है कि रूसी सेना यूक्रेन के नागरिकों को नहीं मार रही है, नागरिक इलाकों में हमला नहीं कर रही है। यहां तक कि रूसी मीडिया रूस के अंदर होने वाले युद्ध के खिलाफ हजारों लोगों द्वारा शहरों-शहरों में किए जा रहे प्रदर्शनों व प्रदर्शन करने वाले लोगों को जेल में ठूंसे जाने, यातना देने इत्यादि की भी चर्चा नहीं कर रहा है।
उल्टा रूस का मीडिया बता रहा है कि यूक्रेन की सेना यूक्रेन के नागरिकों को मार रही है तो रूसी सेना यूक्रेन के नागरिकों की रक्षा कर रही है।
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चलते-चलते ::
पुतिन चूंकि अपनी जिंदगी अय्याशी करते हुए, अनितंत्रित सत्ता व अत्यधिक अमीरी भोगते हुए जी चुके हैं, अब भी जी रहे हैं। इसलिए उसको कोई फर्क नहीं पड़ता है कि उसके कारण दुनिया नष्ट होती है या नहीं। उसके अहंकार की तुष्टि होनी चाहिए।
पुतिन दो दशक से भी अधिक समय से USSR गणराज्य-संघ के देशों को रूस के अधीन/नियंत्रण में लेने की योजना पर काम करते आए हैं। इसके लिए रूस के अंदर पुराने व्यापारियों के वर्ग को खतम करके, अपना पालतू वर्ग बनाया, नए लोगों को रूस के सबसे अमीर व्यापारियों की स्थिति तक पहुंचाया, ऐसे लोग जो पुतिन के स्वामिभक्त हों। इन लोगों का एक घेरा बनाया और रूस को आर्थिक रूप से इन लोगों के हाथों गिरवी रख दिया।
संसद हो या कुछ और सबकुछ पूरी तरह से अपने हाथ की कठपुलती बना रखा है, इसके लिए चुनाव मैनीपुलेट किए जाते आए हैं। जो आवाक उठाता है, वह गायब करा दिया जाता है, या वर्षों तक यातनाएं झेलता है। यह सब वर्षों से हो रहा है।
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जिनके पास थोड़ी सी भी अकल है, वे तानाशाही का अंदाजा केवल इस बात से लगा सकते हैं कि रूस में दो बार चुनाव ही नहीं होगें और पुतिन ही राष्ट्रपति बने रहेंगे, यह भी पारित करा लिया गया। मतलब यह कि 6 वर्ष के एक कार्यकाल के हिसाब से यह पारित होते समय का कार्यकाल खतम होने के बाद 12 वर्षों तक और पुतिन राष्ट्रपति बने रहेंगे, बिना किसी चुनाव के।
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मैं बार-बार कहता आया हूं कि यूक्रेन पर पुतिन का हमला होना ही था, यूक्रेन नाटो की ओर बढ़ता या न बढ़ता, नाटो तो दुनिया को व रूस के लोगों के सामने बहाने के रूप में धोखे के रूप में प्रस्तुत करना है। यूक्रेन पर हमला करना पुतिन के जीवन के सबसे महत्वपूर्ण एजेंडों में से है। जब तक इस बात को नहीं समझा जाएगा तब तक पुतिन के यूक्रेन पर एकतरफा युद्ध का ककहरा भी नहीं समझा जा सकता है।
पुतिन तो यूक्रेन को देश ही नहीं मानता है। पुतिन को लगता है कि जो भी देश USSR गणरज्या संघ में थे, उन सबको रूस की अधीनता स्वीकार करनी ही चाहिए, यदि नहीं करते हैं तो उनको नष्ट कर दिया जाना चाहिए, क्योंकि उनके अस्तित्व का कोई मायने नहीं है।
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हर एक वह व्यक्ति जो रूस द्वारा यूक्रेन पर हमले को सही ठहराता है या साथ खड़ा है या यूक्रेन की गलती मानता है या यूक्रेन को रूस के सामने घुटने टेकने की सलाह देता है। बिना किसी अपवाद ये सभी मेरी नजर में अति-घिनौनी श्रेणी के सैडिस्ट हैं।
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विवेक उमराव

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