Home लेखक और लेखअजीत सिंह लेह लद्दाख की यात्रा इतनी दुरूह क्यों .. | प्रारब्ध

लेह लद्दाख की यात्रा इतनी दुरूह क्यों .. | प्रारब्ध

Written By : Ajit Singh

by Ajit Singh
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मेरी एक पोस्ट पे एक मित्र ने पूछा है कि लेह लद्दाख की यात्रा इतनी दुरूह क्यों है ?
उस रुट की सड़कों पे इतनी बर्फ होती है क्या ?
पिछले कुछ सालों में एक Tourist Spot के रूप में लेह लद्दाख का आकर्षण बहुत बढ़ा है और लेह अचानक बहुत से Tourists की wish list में आ गया है ।
हर कोई लेह तो जाना चाहता है पर लेह लद्दाख के बारे में जानकारी का सर्वथा आभाव है ।
सच ये है कि जब से मोदी सरकार आई है , गडकरी जी ने पूरे लेह लद्दाख रीजन की सड़कें मक्खन मलाई कर दी हैं ।
एक वो भी जमाना था कि मनाली से लेह पहुंचने में दो दिन लग जाते थे , पर आजकल तो ये सिर्फ 12 घंटे की बेहद आरामदेह smooth Ride भर रह गयी है ।
5 साल पहले इस रूट पे 50 से ज़्यादा खतरनाक Water Crossings हुआ करती थीं ……बस यूं समझ लें कि उफनते बर्फीले पानी की नदी सड़क पे बह रही और उसमें से आपको अपनी Bike या Car निकालनी है ।
पर भला हो गडकरी जी और मोदी की रक्षा नीति का कि इन्ने वो सारी Water Crossings मात्र 6 महीने में खत्म कर उनके ऊपर पुल पुलिया ब्रिज बना डाले ।
Riders का तो सारा Adventure ही मार दिया ।
आज मनाली लेह road एकदम चिकनी , खूब चौड़ी 2 lane सड़क है । ऊपर से रही सही कसर रोहतांग दर्रे के नीचे बनी अटल tunnel ने पूरी कर दी । इससे मनाली से लेह की दूरी अब लगभग 50 km और 4 घंटे कम हो गयी है ।
अब आपके मन मे सवाल आएगा कि इतनी चिकनी सड़क है तो फिर ये लेह trip का इतना हव्वा क्यों खड़ा किया जाता है ।
इस trip में मुख्य मुद्दा सड़क नही बल्कि इस रूट की Altitude है । इस रूट पे 5 बेहद ऊंचे Passes बोले तो दर्रे हैं ……मने ऊंचे पहाड़ जिन्हें लांघ के आपको निकलना होता है ।
Rohtang La 13000
Baralacha La 16500
Nakkee La 15,500
Lachung La 16,600
Tanglang La 17480
मुख्य समस्या इन्हीं passes को पार करने में है ।
दिल्ली से आया Tourist मात्र एक रात मनाली में रुक के आगे निकल लेता है । वो इन बेहद ऊंचे Altitude पे सांस लेने के लिये acclamatize नही होता ।
यूँ भी ये पूरा रास्ता ही 10 – 11,000 फ़ीट से ज़्यादा ही है ।
ऐसे में नया नौसिखुआ Tourist Oxygen की कमी का शिकार , सिर दर्द , चक्कर , उल्टियाँ करता बेहाल …… और ऐसे में Peak Tourist season के जाम में अगर ऐसे किसी Pass पे दो चार घंटे फंस जाये तो स्थिति जानलेवा हो जाती है ।
जिस दिन केदारनाथ त्रासदी हुई , मेरी पत्नी इसी रुट पे लेह जा रही थी । अचानक मौसम खराब हुआ , बर्फबारी होने लगी और एक ट्रक बीच सड़क फंस गया बर्फ में …… अब भैया जो लगा जाम …… धर्मपत्नी Solo ट्रैवलर …. 17000 फ़ीट पे अटक गईं ……. अब इनके दीदे बाहर ……
उस दिन तो बच्चों की नई mummy आने वाला काम हो जाता …… फौजियों ने oxygen दे के जान बचाई ।
नई Mummy आते आते रह गयी …….
इसमे मुख्य समस्या ये है कि यात्री Tourist समय की कमी के मारे , Acclamatization नही करते ।
जब मैं अपनी बाइक से स्पिति लेह गया था तो पूरे 5 दिन में काज़ा पहुंचा और 7 दिन में लेह …….पूरी तरह Acclamatize हो के ……
टूरिस्ट एक दिन में पहुंच जाना चाहता है ।
मनाली से लेह की दूरी Via Atal Tunnel 430 km है ।
पहाड़ी रास्ता , वो भी 18,000 फ़ीट ऊंचाई पे ।
प्लेन में ये दूरी 1500 km के बराबर मान लो ।
इस बीहड़ रास्ते मे सबसे बड़ी समस्या ये कि अगर आपकी Bike में कोई ब्रेक डाउन हो जाये तो कोई Help नही मिलती ।
सबसे नजदीकी मैकेनिक 300km दूर होगा ।
पूरे रास्ते मे सिर्फ एक Petrol pump है Tandi में ।
अगला Pump 375 km दूर है ।
मौसम का कोई भरोसा नही । कब बिगड़ जाए ।
आप कहीं फंस जायें तो इतनी ऊंचाई पे रात बिताना High Altitude Sickness AMS को न्योता देना है ।
Spiti Valley में सड़कें बेहतर हुई हैं पर Kaza ग्राम्फू के बीच अभी भी 80km सड़क आज भी Off Road है और इस रूट पे आज भी 50 से ज़्यादा Water Crossings हैं ।
इस रूट पे अच्छे अच्छे Riders हिल जाते हैं ।
ये 80 km तो 800km के बराबर लगता है ।
इसी रुट पे चंद्रताल lake है । Hikkim कौमिक Langza जैसे गांव हैं जो 14000 – 15000 फ़ीट पे हैं ।
बिना Acclamatization यहां रुकना जानलेवा हो सकता है ।
इसी तरह लेह से आगे Khardung La pass है जो 17,582 फ़ीट ऊंचा है ।
इन इलाकों पे घूमने के लिये सबसे जरूरी है 7 दिन का Acclamatization ।
99% टूरिस्ट के पास इतना समय नही होता ।
उसे तो 6 दिन में पूरा टूर निपटाना होता है ।
इसीलिए एक आम tourist के लिये लेह लद्दाख बड़ा विकट दुरूह दुर्गम क्षेत्र बन जाता है ।
लेह लद्दाख घूमना / Enjoy करना है तो कम से कम 15 दिन का समय ले के जाओ ।
6 दिन वाला टूर तो सजा बन जाता है ।

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