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वजू (कुल्ला) क्यो करते थे मलेछ हमारे ज्ञानलिंग पर

रंजना सिंह

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हमारे पार्थिव देह में अपने ज्ञानबोध चेतना को अविरलता देने वाली दाहिने अंग की सूर्य शक्ति कही जाने वाली पिंगला नाड़ी में गंगा रस प्रवाहित होती है जो दूषित हो तो माइग्रेन सरवाइकल जैसे रोग होते हैं।
बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है। चिंता तनाव आलस प्रमाद
जैसे अनेक मानस रोग ! दाहिने नाक का खुलना बन्द होना इसी पर निर्भर करता है। बाएं नाक की भी इसी प्रकार इड़ा नाड़ी , चन्द्रशक्ति में यमुना रस प्रवाहित है।
और बीच मे ज्ञान शक्ति लिए सुषम्ना नाड़ी जिसने सरस रस अर्थात सरस्वती नदी प्रवाहित है। जब दोनो नाड़ी शुद्ध संतुलित रहती है तब बीच की नाड़ी में गुप्त सरस्वती प्रकट हो नीचे मूलाधार में बैठी शक्ति को ऊपर मस्तिष्क में भेजती है। जहाँ शिव शव की भांति प्रतीक्षा कर रहे। और तब शिवशक्ति के इसी मिलन को परम सत्य की उपलब्धता कहते हैं। जिसके बाद कुछ पाना नही होता। हालांकि अभी भी सरस्वती नदी गुप्त हैं।जो शीघ्र प्रकट हो ऐसी अभिलाषा।
वैसे ही गंगा अभिषेक की जगह अब तक वजू कर यानी कुल्ला कर ज्ञानलिंग को दूषित किया गया। सोचिए हमसे अधिक मलेछो को हमारे तन्त्र विज्ञान का अर्थ पता था जिसे उन्होंने करप्ट किया।
यत पिंडे तत ब्रह्माण्डे –
जो भी कुछ मनुष्य के पिण्ड यानी शरीर में है, बिल्कुल वैसा ही सब कुछ इस ब्राह्मांड में है। संपूर्ण ब्रह्मांड में जो भी है वह द्रव्य एवं ऊर्जा (Matter and energy) का संगम है। वही हमारे शरीर में भी है।
हमारे शरीर मे भी सभी ज्योतिर्लिंग सभी शक्तिपीठ सहित पूरा भारत पूरी पृथ्वी पूरा ब्रह्माण्ड बसता है।
द्रष्टा या दृश्य सूक्ष्म या स्थूल दोनो में से एक भी करप्ट हुआ तो दोनो असन्तुलित होंगे। एक भी संतुलित हुआ दूसरा भी उसी प्रकार।
और इसीलिए जो कुछ जागृत पुरुष हैं वे इस स्थूल जगत को भी संतुलित करने में लगे हैं , इसीलिए हे सॉफ्ट सेक्युलर हिन्दू भाईयों आप भी अब जागो।
जैसे काम क्रोध-लोभ-मोह हैं ! वैसे ही बाहर ये जिहादी जीवाणु हैं । जिनके कारण शारिरिक मानसिक आत्मीक सामाजिक व्यवहारिक कष्ट हमे झेलने पड़ते हैं।
इसीलिए ये कहानी पूर्ण अध्यात्मिक है हमारा लक्ष्य परम आनन्द शिव की उपलब्धि है। जिसमे ये जिहादी जीवाणु बाधा बन हमे बार बार इसी संसार मे इसे कष्टमय बना हमारा खून चूस राज कर रहे हैं।
अब समझ आया मंदिर, संस्कृति आदि पर साम्प्रदायिक कह सवाल उठाने वाले सो कॉल्ड मॉडर्न लोगो ?
ये आपके विकास के लिए एनर्जी हीलिंग का खेल चल रहा है जिसकी धुरी वैदिक राजनीति है।

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