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होइहै वही जो राम रचि राखा

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आम जनता और लुटियन दिल्ली की खैराती मीडिया को चौंकाने वाले, लेकिन मेरे लिए दो अपवादों को छोड़कर
पूरी तरह प्रत्याशित निर्णयों वाले मंत्रिमंडल का शपथग्रहण दिव्य रहा, भव्य रहा. अपार जनसमूह की भावनाओं का ज्वार कड़ी चिलचिलाती धूप के हमले पर बहुत भारी पड़ा.
आज के शपथग्रहण समारोह में उपस्थित भीड़ की भावनाओं के नायक प्रभु श्रीराम ही थे. उल्लेख कर दूं कि मैं पार्टी विधायकों, पदाशिकारियों उनके साथ आए समर्थकों की भीड़ की बात नहीं कर रहा. मैं बात कर रहा हूं मंच से काफी दूर स्टेडियम की गैलरी में बैठे अपार जनसमुद्र की, उस जनसमुद्र में मैदान के किसी भी कोने से उठा जयश्रीराम का जयकारा बिजली की तरंगों की तरह दौड़ रहा था. यही वह अंडर करेंट था जो पूरे चुनाव की रग रग में 11000 वोल्ट करंट बनकर खामोशी से दौड़ रहा था, लेकिन शोर बिल्कुल नहीं कर रहा था. करंट कोई शोर करता भी नहीं है. आज वही अंडरकरेंट लखनऊ के अटलबिहारी इकाना स्टेडियम में उत्साह और उल्लास से झूम रहा था।
आज अटल बिहारी स्टेडियम इकाना स्टेडियम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनके मंत्रिमंडल के शपथग्रहण समारोह को देखकर साइकिल सवार विपक्ष और लुटियन दिल्ली की खैराती मीडिया के आँख कान खुल जाने चाहिए. राम नाम का जादू उसकी समझ में आ जाना चाहिए.
आज के मंत्रिमंडल में कुछ साहसिक और क्रांतिकारी बदलाव किए गए हैं। मेरे लिए यह बदलाव अपेक्षित थे। इस बदलाव में केवल दो अपवाद ऐसे हैं जिनकी गुत्थी फिलहाल मुझसे नहीं सुलझ रही। संभवतः कुछ दिनों बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। लेकिन आम जनता का इससे कोई लेनादेना नहीं। इस खेल का महत्व राजनीतिक उठापटक के समीकरणों के गणित में रुचि रखने वाले विश्लेषकों की बहसों तक ही सीमित है।
आज के मंत्रिमंडल में लीक से हटकर कुछ साहसिक प्रयोग किए गए है, मुझे उम्मीद है कि इनके परिणाम शुभ ही होंगे। विभागों के आबंटन के पश्चात ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। तब इसपर विस्तार से लिखूंगा। आज रात 10:30 बजे वरिष्ठ पत्रकार मित्र भाई मनीष ठाकुर के साथ उनके यूट्यूब चैनल पर भी चर्चा करूंगा। तब तक संभवतः विभागों के आबंटन की सूचना भी आ जाए।
मेरी प्रतिक्रिया फिलहाल इतनी ही है कि राम के आशीर्वाद से बनी रामभक्त सरकार में…
होइहै वही जो राम रचि राखा।

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