Home अमित सिंघल मोदी एवं ममता-केजरी के मध्य अंतर

मोदी एवं ममता-केजरी के मध्य अंतर

by अमित सिंघल
375 views
राजनैतिक और आर्थिक जटिलताओं को समझने के लिए counterfactual (काउंटरफैक्चुअल) या प्रतितथ्यात्मक – यानि कि अगर “यह” निर्णय ना लिया गया होता, तो इस समय क्या स्थिति होती – बनाने का प्रयोग किया जाता है।
कारण यह है कि किसी स्थिति से निपटने के निर्णय के प्रभाव से आने वाला संकट या तो समाप्त हो सकता है, या फिर यथास्थिति बनी रह सकती है, या फिर नया संकट खड़ा हो सकता है।
अतः counterfactual के द्वारा विश्लेषण किया जाता है; समझने का प्रयास किया जाता है कि स्थिति में सुधार हुआ है या नहीं।
उदाहरण के लिए, कोरोना से निपटने के लिए अगर लॉकडाउन ना लगाया होता, तो क्या होता?
अगर अमेरिका इराक से सद्दाम को नहीं हटाता, तो क्या होता?
अगर सर्जिकल स्ट्राइक ना की गयी होती, तो क्या होता?
अगर टैक्स दर को कम कर देते या पेट्रोल-डीजल के दामों को कम कर दिया जाता, तो क्या होता?
अगर आत्मनिर्भर भारत पर जोर ना दिया जाता तो क्या होता?
अगर डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा ना दिया जाता, तो क्या होता?
कई बार counterfactual के विश्लेषण को प्रूव करना दुरूह होता है और यह एक कागजी प्रक्रिया बनकर रह जाती है।
लेकिन कुछ दुर्लभ घटनाओ के कारण कभी-कभी counterfactual के द्वारा निर्णय के औचित्य को समझा जा सकता है।
श्री लंका का भीषण आर्थिक संकट एक ऐसी ही दुर्लभ घटना है।
श्री लंका की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से पर्यटन पर आधारित है। कुछ एक्स्ट्रा आय चाय की पत्ती एवं रबर के एक्सपोर्ट से हो जाती है।
लेकिन श्री लंका में अप्रैल 2019 के आतंकी हमले – जिसमे 250 से अधिक व्यक्तियों की मृत्यु हो गयी थी – ने इस देश में पर्यटन को एकाएक गिरा दिया जिससे उस देश को मिलने वाली विदेशी मुद्रा में भारी कमी आ गयी।
फिर गोटाबाया राजपक्सा नवंबर 2019 में राष्ट्रपति चुने जाने के बाद एकाएक VAT (भारत के GST जैसा) को आधा कर दिया एवं अन्य अप्रत्यक्ष करो को समाप्त कर दिया। परिणामस्वरूप श्री लंका सरकार का टैक्स रेवेनुए वर्ष 2020 में आधा रह गया।
दूसरी तरफ, श्री लंका विदेशी मुद्रा में उधार लेकर “विकास” कर रहा था; वर्ष 2019 में कुल उधारी 52 बिलियन डॉलर की थी जबकि विदेशी मुद्रा भंडार केवल 8 बिलियन था, जो इस समय लगभग नगण्य हो गया है। साथ ही, इस उधारी का भुगतान भी करना पड़ेगा। नहीं करेंगे, तो चीन की तरह अन्य राष्ट्र एवं विदेशी बैंक श्री लंका की संपत्ति – जैसे कि बंदरगाह, हवाई जहाज़, शिप, विदेश में सरकारी संपत्ति, इत्यादि – को जब्त कर सकते है।
भारतीय वामपंथियों के बहकावे में आकर – ठीक पढ़ा, भारतीय वामपंथियों के बहकावे में आकर, श्री लंका ने रसायनिक खाद पर प्रतिबंध लगा दिया जिससे वहां की कृषि उपज 40 प्रतिशत तक गिर गयी।
वर्ष 2020 में कोरोना की मार पड़ी एवं पर्यटन शून्य हो गया।
अब स्थिति यह हो गयी है कि श्री लंका में ऑपरेशन के लिए दवा नहीं है। यहाँ तक कि सर दर्द की मामूली सी दवा भी बाजार में नहीं है। परीक्षा के लिए पेपर नहीं है। बिजली उत्पादन के लिए ईंधन नहीं है। खाने के लिए अन्न नहीं है। विदेश यात्रा एवं आयात के लिए विदेशी मुद्रा नहीं है।
अब भारत के सन्दर्भ में counterfactual या प्रतितथ्यात्मक बनाने का प्रयास करते है।
दो सर्जिकल स्ट्राइक – जो सरकार ने बताया है (कुछ अन्य सरकार ने नहीं बताया) – के कारण कश्मीर घाटी के बाहर विदेशी आतंकवाद समाप्त हो गया है। इस सर्जिकल स्ट्राइक की केजरीवाल जैसो ने मजाक उड़ाया था, प्रूफ माँगा था।
अब आप counterfactual बनाइए कि सर्जिकल स्ट्राइक ना की गयी होती तो क्या होता?
मोदी सरकार ने नोटबंदी, GST एवं पेट्रोल-डीजल के द्वारा ना केवल करदाताओं की संख्या में भारी वृद्धि की है, बल्कि अपने सरकारी रेवेनुए में भी भारी वृद्धि की है।
अब आप counterfactual बनाइए कि अगर टैक्स दर कम कर देते तो कोरोना साल में क्या होता?
मेक इन इंडिया के द्वारा आज भारत में किसी भी वस्तु की कमी नहीं है। हमारा विदेशी मुद्रा भंडार भारत के विदेशी लोन से कहीं अधिक है। गडकरी जी भारत के उद्यमियों के पैसे से राजमार्ग बना रहे है। उद्यमियों द्वारा किये गए निवेश को टोल टैक्स से चुकाया जा रहा है।
अब आप counterfactual बनाइए कि भारत को वर्ष 1991 में सोना क्यों गिरवी रखना पड़ा था? आखिरकार रक्षा, आंतरिक सुरक्षा, राजमार्ग, रेल, हवाई यात्रा, टेलीकॉम, दवा उद्योग में निवेश के लिए पैसा कहाँ से आ रहा है?
नोटबंदी, आधार, डिजिटल भुगतान, रूपए-भीम प्लेटफार्म, दिवालिया कानून (जिसके तहत बैंक किसी भी लोन न चुकता करने वाली कंपनी से त्वरित मार्ग से पैसा वसूल सकते है) का क्या प्रभाव पड़ा?
मोदी सरकार ने वित्तीय विवेक और अनुशासन पे जोर दिया, ना कि केजरीवाल स्टाइल में पैसे लुटाए। अरुण जेटली संसद में आकड़ो के साथ बता चुके है कि कैसे सोनिया सरकार द्वारा आमदनी से बहुत अधिक खर्च करने के कारण उधार के पैसे से प्रशासन चलाया गया और कैसे मोदी सरकार ने उस खर्च को राजस्व या आय बढ़ाकर और लोन कम करके काबू में करने का प्रयास किया।
अब आप counterfactual बनाइए कि दो वर्ष 2014-15 का सूखा, दो वर्ष से भीषण कोरोना महामारी और लॉकडाउन, रूस-यूक्रेन युद्ध, वामपंथियों एवं देशतोड़क शक्तियों द्वारा भारत में दंगा एवं अराजकता फ़ैलाने के प्रयास के बावजूद भी भारत को सोना क्यों नहीं गिरवी रखना पड़ा?
विकसित राष्ट्रों के द्वारा रूस पर प्रतिबन्ध के बावजूद भारत कैसे उस देश से व्यापार कर रहा है? उस व्यापार का भुगतान कैसे हो रहा है?
भारत कैसे अपने सभी सभ्य पड़ोसी देशो को खाद्यान्न एवं दवा उपलब्ध करवा रहा है?
भारत में कैसे खाद्य पदार्थ, दवा, विदेशी मुद्रा इत्यादि की प्रचुर उपलब्धता है?
counterfactual (काउंटरफैक्चुअल) या प्रतितथ्यात्मक विश्लेषण आवश्यक है।
तभी मोदी एवं ममता-केजरी के मध्य अंतर समझ में आएगा।

Related Articles

Leave a Comment