Home विषयभारत वीर बहादुर लड़की अपने अधिकार को जानती है नहीं डरती घूसखोर पुलिस से भी

बहादुर लड़की अपने अधिकार को जानती है नहीं डरती घूसखोर पुलिस से भी

Nitin Tripathi

by Nitin Tripathi
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लूलू माल में देकथलन स्टोर है. चेक आउट काउंटर पर लाइन लगी थी. माल में प्रायः स्टोर चेक आउट काउंटर लिमिटेड खोलते हैं ताकि वहाँ लंबी लाइन दिखाई दे और बाक़ी लोगों को लगे कि यहाँ से खूब सारे लोग सामान ख़रीदते हैं.

एक पुलिस वाले अंकिल सिंगल स्टार वाले फ़ुल वर्दी में आये और सीधे जाकर सामान काउंटर पर रख दिया. कैशियर ने बोला सर लाइन लगी है, प्लीज़ लाइन में आइये. पुलिस अंकिल ने बोला देखती नहीं हो बच्चे साथ हैं मुझे जल्दी है (अंकिल के मासूम से सोलह अठारह साल के बच्चे थे, शक्ल से ही भ्रष्टाचारी बाप की औलादें लग रहे थे). कैशियर ने बोला सर लाइन में जो लोग खड़े हैं उनके भी बच्चे हैं, एक्चुअली लाइन में तो कई बच्चे भी लगे हैं.

अब उनका ईगो हर्ट हो गया. धमकाने लगे. अपने मैनेजर को बुला. एक झटके में तुझे नौकरी से निकलवा दूँगा. कैशियर ने बोला मैनेजर का केबिन ग्राउंड फ़्लोर पर है. अब वह और चीखने लगे तू जानती नहीं है, मैं कौन हूँ टाइप. वह इन्हें रॉयली इगनौर कर बाक़ियों का सामान चेक आउट करती रही. फिर यह भागे भागे गये एक लड़के अटेंडेंट को बुला कर लाये धमकाते हुवे. कैशियर ने उसे भी मना कर दिया कि मेरे काउंटर पर चेक आउट करवाना है तो लाइन में लग कर आना पड़ेगा.
अब पुलिस अंकिल ने टिपिकल स्लट शेमिंग कार्ड खेल दिया. तेरी जैसी लड़कियों को अच्छे से जानता हूँ. घर वालों को बेवकूफ बना माल में गुल छर्रे उड़ाने आती हैं अपने बॉय फ़्रेंड के साथ रोज़ देखता हूँ. इक्का दुक्का अंकिल जी और सास बन बहु पर रौब झाड़ने की कल्पना करने वाली एक आंटी टाइप के लोग सहमत थे मन ही मन इस बात पर. पर मेजरिटी ऑफ़ द पब्लिक मन ही मन लड़की के साथ थी. लड़की ने पुलिस अंकिल का ईगो ऐसा पंक्चर किया कि पूछिये मत. बाद में लूलू माल ही बंद कराने की धमकी देते हुवे पैंर पटकते वो चले गये.
डेवलपमेंट के साथ सोसाइटी में सुधार आता है. दस साल पूर्व ऐसे लोग वाक़ई ज्यादा नहीं तो उस लड़की को नौकरी से तो निकलवा ही देते. पर अब सिस्टम हैं, प्रोसेस हैं, तो मैनेजर भी इन्हें सॉरी तो बोल देगा पर बस इतना ही. ये ज्यादा अंग्रेज़ी बोलेंगे तो इनका वीडियो वायरल हो जाएगा, इन्हीं की नौकरी जायेगी. दस साल पूर्व लड़की भी डरती नौकरी जाने से. आज की तारीख़ में उसे मालूम है ऐसी नौकरियाँ मारी मारी घूम रही हैं तो उसे किसी बात का भय नहीं कि नौकरी चली जायेगी, तो वह बिलकुल ईमानदारी से काम कर रही थी.
समय के साथ नई पीढ़ी पहले से बेहतर आ रही है

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