Home विषयअपराधKiller Criminal and Suspect गुरमीत और हनी की क्या है कहानी

गुरमीत और हनी की क्या है कहानी

किलर अध्याय 6.1

by Praarabdh Desk
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गुरमीत राम रहीम सिंह

गुरमीत राम रहीम सिंह हरियाणा के सिरसा में स्थित संस्था डेरा सच्चा सौदा का प्रमुख था डेरा सच्चा सौदा की स्थापना 1948 में शाह मस्ताना जी द्वारा की गई थी। गुरमीत इस संस्था के तीसरा प्रमुख था। इसके कार्यकाल में डेरा का प्रचार प्रसार हुआ और इसके अनुयायियों की संख्या में कई गुना वृद्धि हुई। गुरमीत राम रहीम सिंह के नेतृत्व में गलत और लोगो को भ्रमित करने वाले डेरा सच्चा सौदा में कई कार्य किये गए

गुरमीत राम रहीम सिंह अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं। इसका जन्म 15 अगस्त, 1967 को राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के गुरुसर मोदिया में जट सिख परिवार में हुआ था। गुरमीत राम रहीम की माता का नाम नसीब कौर इंसान है। इसको महज सात साल की उम्र में ही 31 मार्च, 1974 को तत्कालीन डेरा प्रमुख शाह सतनाम सिंह ने नाम दिया था।

23 सितंबर, 1990 को शाह सतनाम सिंह ने देशभर से अनुयायियों का सत्संग बुलाया और गुरमीत राम रहीम सिंह को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। डेरा प्रमुख की दो बेटियां और एक बेटा है। बड़ी बेटी चरणप्रीत और छोटी का नाम अमरप्रीत है। उन्होंने इन दो बेटियों के अलावा एक बेटी हनीप्रीत को गोद लिया हुआ है। इसकी बड़ी बेटी चरणप्रीत कौर के हसबैंड का नाम डॉक्टर शान-ए-मीत इंसान जबकि छोटी बेटी अमरप्रीत के पति का नाम रूह-ए-मीत इंसान है।

गुरमीत राम रहीम के बेटे जसमीत की शादी बठिंडा के पूर्व एमएलए हरमिंदर सिंह जस्सी की बेटी हुस्नमीत इंसान से हो रखी है। डेरा सच्चा सौदा का साम्राज्य विदेशों तक फैल हुआ है। अमेरिका, कनाडा और इंग्लैंड से लेकर ऑस्ट्रेलिया और यूएई तक उनके आश्रम व अनुयायी हैं। डेरे का दावा है कि दुनियाभर में उनके करीब पांच करोड़ अनुयायी हैं, जिनमें से 25 लाख अनुयायी अकेले हरियाणा में ही मौजूद हैं।

1948 में स्थापित डेरे में पहले बाबा शाह मस्ताना जी थे। दूसरे गद्दीनशीं बाबा शाह सतनाम सिंह थे। वर्तमान  गुरमीत राम रहीम तीसरा गद्दीनशीं हैं। अब डेरे की अरबों रुपये की सम्पत्ति पूरे भारत में है। आश्रम में एक समय में 1 लाख अनुयायियों के सभा स्थल की क्षमता है। आश्रम में एमएसजी दवाइयां व अन्य उत्पादों की फैक्ट्रियां भी हैं। जब बाबा सिरसा में होते हैं तो सुबह-शाम आश्रम में मजलिस को सम्बोधित करता है। अन्यथा हर महीने के अंतिम रविवार को बड़ा सत्संग होता है।

  राम रहीम की हनीप्रीत उर्फ़ प्रियंका

मूल रूप से हरियाणा के फतेहाबाद जिले की रहने वाली प्रियंका तनेजा 1996 में पहली बार डेरे के कॉलेज में 11वीं क्लास में पढ़ने के लिए आई थी. पहले डीएवी स्कूल फतेहाबाद से उसने दसवीं की परीक्षा पास की थी. डीएवी स्कूल में प्रियंका की तत्कालीन क्लास टीचर सुनीता मदान के मुताबिक वो पढ़ने में तेज नहीं थी. . मगर उसे नाचने, गाने और अभिनय का बहुत शौक था. जब वह डेरे में आई तो उसी साल राम रहीम लड़कियों को आर्शीवाद देने के बहाने उनके स्कूल में आया. तभी उसकी नजर प्रियंका तनेजा पर पड़ी.

कुछ समय बाद ही राम रहीम ने प्रियंका तनेजा को अपने वश में कर लिया. और फिर उसका नया नाम करण किया गया. अब प्रियंकाराम रहीम की हनीप्रीत बन चुकी थी. धीरे-धीरे हनीप्रीत और राम रहीम की नजदीकियां बढ़ने लगी. ऐसे में बाबा के राज भी हनीप्रीत के सामने आने लगे. हनीप्रीत अब गुरमीत की सबसे करीबी बन गई थी. गुरमीत उस पर इतना मेहरबान था कि उसे कभी डेरे से बाहर नहीं जाने दिया. उसकी पढ़ाई लिखाई सब डेरे में ही करवाई गई. वहीं पर उसके नाम पर कई बड़े कारोबार शुरू किए गए

डेरे से जुड़ा था हनीप्रीत का परिवार

दरअसल, प्रियंका तनेजा का पूरा परिवार पिछले कई सालों से डेरे का अनुयायी है. आज भी डेरे में कई बड़े प्रोजेक्ट हनीप्रीत के नाम से चल रहे हैं. यही नहीं उसके भाई साहिल तनेजा को भी गुरमीत का आर्शीवाद मिला. वह डेरे में बड़े स्तर पर कारोबार करता है. हनीप्रीत के पिता रामानंद तनेजा पहले पुरानी दिल्ली के सामने एमआरएफ टायर्स का शोरूम चलाते थे. जिसका नाम सच टायर्स था. लेकिन बाद में उन्होंने डेरे में ही एक बड़ा सीड प्लांट डाल लिया. हनीप्रीत की एक छोटी बहन है नीशु तनेजा, जिसकी शादी गुड़गांव में हुई है. बताय़ा जाता है कि उसकी शादी में भी बाबा का खास योगदान था.

पिता को मिली अहम जिम्मेदारी

इसी तरह से हनीप्रीत के चाचा अभी भी सिरसा के परशुराम चौक पर एमआरएफ टायर का शोरूम चलाते हैं. उसके मामा और कई रिश्तेदार सिरसा के मुख्य मार्गों पर टायरों का कारोबार करते हैं. हनीप्रीत के नाम पर डेरे के अंदर एक बुटीक भी है. अब उसके पिता रामानंद तनेजा डेरा की पर्चेजिंग कमेटी के हेड हैं. बाजार का सारा लेन-देन उनके जिम्मे था

केवल नाम की शादी

प्रियंका तनेजा उर्फ हनीप्रीत और विश्वास गुप्ता की शादी 14 फरवरी, 1999 को डेरा प्रमुख राम रहीम ने ही कराई थी. हालांकि दोनों की शादी ज्यादा दिन नहीं चल सकी. कुछ समय बाद हनीप्रीत ने राम रहीम से शिकायत की कि उसके ससुराल वाले उसे दहेज के लिए परेशान कर रहे हैं. बताया जाता है कि राम रहीम ने हनीप्रीत की शादी तो गुप्ता से कराई थी, लेकिन उसे कभी भी हनीप्रीत के साथ संबंध बनाने नहीं दिया गया.

2009 में राम रहीम ने गोद लिया

इसके बाद राम रहीम ने साल 2009 में उसे गोद ले लिया. राम रहीम की खुद की दो बेटियां और एक बेटा है. उनके नाम अमनप्रीत,चमनप्रीत और जसमीत इंसा हैं. इसके बाद साल 2011 में विश्वास गुप्ता ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में मुकदमा दायर कर राम रहीम के कब्जे से उसकी पत्नी यानी हनीप्रीत को मुक्त कराने की मांग की थी. गुप्‍ता ने राम रहीम पर हनीप्रीत के साथ अवैध संबंध होने का भी आरोप लगाया

साया बनकर बाबा के साथ रहती थी हनीप्रीत

हनीप्रीत उन चंद डेरा समर्थकों में से एक है जिसकी गिनती राम रहीम के करीबियों में होती है. वह डेरा के कई महत्‍वपूर्ण फैसले लेने के साथ ही राम रहीम की फिल्‍मों को भी डायरेक्‍ट कर चुकी है. उसने ‘MSG: द वॉरियर लॉयन हार्ट’ का भी निर्देशन किया है. राम रहीम को दोषी ठहराए जाने के दौरान वह कोर्ट रूम से लेकर जेल भेजे जाने तक साये की तरह राम रहीम के साथ नजर आई थी.

 

“यह सभी अपराध वास्तव में घटित हो चुके है और इनका विवरण विकिपीडिया और अन्य श्रोतो से लिया गया है इन अपराध को करने वाले अपराधियों को सजा दी जा चुकी है और कुछ मामलो में अभी फैसला आना बाकी है और मामला न्यायालय में है आप सब से निवेदन है की इनकी कहानियो को पढ़ कर इनकी प्रेरणा न ले”

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