Home विषयअपराध अटूट निद्रा ने लाखों हिंदुओं को कश्मीर से निर्वासित होने के लिए विवश किया

अटूट निद्रा ने लाखों हिंदुओं को कश्मीर से निर्वासित होने के लिए विवश किया

by Isht Deo Sankrityaayan
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दोनों में क्या फ़र्क़ है और दोनों में व्यवस्था की ओर से क्या कार्रवाई हुई? व्यवस्था की इस अटूट निद्रा ने लाखों हिंदुओं को कश्मीर से निर्वासित होने के लिए विवश किया।

आपको क्या लगता है? चुप रहकर आप छूट जाएंगे? अगर ऐसा कोई भ्रम आपने पाल रखा है तो कृपया उससे बाहर निकल आएँ। पहले भी यही हुआ था। कहने के लिए केवल पंडितों को लक्ष्य किया गया और फिर निपटा सभी दिए गए। दुनिया अभी भी इस भ्रम में है कि कश्मीर से केवल पंडितों को भगाया गया। दुनिया छोड़िए, भारत में ही कितने लोग जानते हैं कि कश्मीर में ‘पंडित’ शब्द वास्तव में ‘हिंदू’ का पर्याय है!

अब जो ये फतवा आया है, ये केवल जेएनयू के लिए नहीं है। जेएनयू तो एक बहाना है, अगर चुप रहे तो ये फतवा एक दिन पूरे भारत पर छाना है।
दुनिया और उसकी दारी के मामले में आप कुंभकर्ण के अवतार हैं लेकिन वे हमेशा जागते रहते हैं; आपकी तरह बेखबर नहीं, बाख़बर रहते हैं। वे जानते हैं कि अभी हाल में इस्लामिक आतंकवाद के मुद्दे पर आपके साथ केवल फ्रांस खड़ा हुआ। बाकी पूरा सेमेटिक वर्ल्ड सारे मतभेद भूल कर एक हो गया। यहाँ तक कि वह इस्राइल भी जो 32 दाँतों के बीच एक जीभ की तरह फँसा हुआ है और इस्लामी आतंकवाद का सबसे त्रासद शिकार है, इस्लामी आतंकवाद के अस्तित्व से साफ मुकर गया। आपके साथ केवल फ्रांस खड़ा हुआ। संयुक्त राष्ट्र महासभा के इस निकृष्टतम फैसले के हिसाब से सोच लीजिए कि आपके साथ क्या होने जा रहा है। दुनिया की कोई सरकार आपके साथ क्या करेगी, अगर आपने नहीं बोला तो!
जिन मौगों का अभी हम आप मज़ाक उड़ा रहे हैं, वही उनके हथियार हैं। केवल वेशभूषा नहीं, हो सकता है कि उनमें कुछ हिंदू परिवारों में पैदा भी हुए हों। यह भी हो सकता है कि उनमें ब्राह्मण – बनिए भी हों और उन्होंने ही लिखा हो। लेकिन याद रखिए, घर का भेदी लंका ढाए। और यह तो दौर ही जयचंदों और मीर जाफरों का है।
सवाल यह है कि अभी तक हुआ क्या?
अगर नहीं हुआ, तो वह सरकारी तंत्र जिसे आपने बड़ी उम्मीद से बनाया था, कर क्या रहा है?
क्या आपको लगता है कि आप चुप रहेंगे और वह कर देगा?
कृपया भूल जाएं। ऐसे किसी कल्पनालोक तुरंत बाहर निकल आइए।
सरकार तो डीएनए तलाशेगी। उसको वही सूट करता है।
इसलिए आप चुप मत बैठिए।
आप तो बोलिए।
यह फिक्र छोड़कर किसकी सरकार है और किसे आपने वोट दिया, बोलिए और बोलिए।

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