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कम्युनिस्ट तानाशाह निकोलाइ चाउसेस्क्यू

by अमित सिंघल
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कम्युनिस्ट तानाशाह निकोलाइ चाउसेस्क्यू सन 1965 से यूरोप में के देश में रोमानिया में शासन किया। 1989 में पोलैंड, पूर्वी जर्मनी (उस समय यह एक अलग देश था), हंगरी, बुल्गारिया, चेकोस्लोवाकिया में क्रांति का दौर था और कम्युनिस्टो को जनता जूते मार कर सत्ता से बेदखल कर रही थी। इस क्रांति से बचने के लिए, चाउसेस्क्यू ने 21 दिसम्बर 1989 में अपनी सत्ता के समर्थन में राजधानी बुकारेस्ट में अपने महल के सामने एक रैली का आयोजन किया।
रैली में लोग चाउसेस्क्यू के समर्थन में जोर-शोर से नारे लगा रहे थे। चाउसेस्क्यू अपने महल की बालकनी में खड़ा भाषण दे रहा था था, साथ में उसकी पत्नी एलेना चाउसेस्क्यू, कम्युनिस्ट पार्टी के पदाधिकारी और बॉडीगार्ड खड़े थे। आठ मिनट तक उसने रोमानिया की कम्युनिस्ट व्यवस्था का गुणगान गाया। लोगो की तालियों से चाउसेस्क्यू बहुत प्रसन्न लग रहा था। और तभी कुछ गड़बड़ हो गया।
अगर आप you tube में “Ceausescu ‘s last speech” (मैंने अंग्रेजी में इसलिए लिखा है कि आप यू ट्यूब पे यह क्लिप देख सके) देखे तो पाएंगे कि चाउसेस्क्यू एक अन्य लंबा, बोरिंग वाक्य शुरू कर रहा था। कह रहा था कि वह ऑर्गनाइज़र को इस महान रैली के लिए धन्यवाद देना चाहता है…,
और चाउसेस्क्यू का मुँह खुला का खुला रह गया, उसके मुंह से आवाज नहीं निकल रही थी। एक सेकंड में उसका संसार उजड़ गया, जब रैली में उपस्थित एक व्यक्ति ने उसे हूट कर दिया। तब एक अन्य व्यक्ति ने, फिर दुसरे ने, और फिर कुछ सेकंड में महान जनसमूह ने सीटी बजाना, गालिया देना और रोमानिया के पक्ष में नारे लगाने शुरू कर दिए।
टेलीविज़न कैमरा को आसमान की तरफ उठा दिया गया जिससे लोग लाइव टेलीकास्ट ना देख सके। लेकिन साउंड की रिकॉर्डिंग हो रही थी। पूरा रोमानिया सुन रहा था कि चाउसेस्क्यू हेलो, हेलो बोलकर नाटक कर रहा था जैसे कि माइक्रोफोन ख़राब हो गया हो।
लेकिन उसकी पत्नी एलेना ने भीड़ को हड़काना शुरू कर दिया: चुप हो जाओ, शांत हो जाओ…! चाउसेस्क्यू पत्नी की और मुड़ा और लाइव टीवी पे डांटा: तुम चुप रहो..! चाउसेस्क्यू बोल रहा था: कामरेड! कामरेड! आप शांत हो जाइए।
लेकिन चाउसेस्क्यू जानता था कि उसका खेल ख़त्म हो गया था। कुछ ही दिन बाद चाउसेस्क्यू और एलेना को सेना ने गोली मार दी।
भारत के भी चाउसेस्क्यूओ – राहुल जैसे अभिजात्य वर्ग – को पता है कि उनकी दुनिया उजड़ गयी है; उनका बुरा समय (unfortunately) शुरू हो गया है। लेकिन उनकी “पत्नी” – कभी जयराम, कभी पित्रोदा, कभी अय्यर या फिर खेड़ा – नहीं समझ पा रहे है और “unfortunately” को डिफेंड करना शुरू कर देते है। राहुल ज्यादा “हूटिंग” होने पे अपनी “पत्नी” – जैसे कि अय्यर या पित्रोदा – को चुप करा के कुछ समय के लिए भगा देते है।

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