भारत के स्पार्टन

देवेन्द्र सिकरवार

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जब भी उनके यहाँ कोई बच्चा जन्म लेता था, बुजुर्ग उसका निरीक्षण करने पहुँच जाते थे।
अगर उसका रंग गोरा न हो,
अगर वह शरीर से दुर्बल हो,
अगर वह बीमारी से ग्रसित हो,
तो……
तो उसे मारकर फैंक दिया जाता था।
नहीं, मैं किसी हॉलीवुड मूवी की बात नहीं कर रहा और न ही उन स्पार्टन्स की जो प्राचीन विश्व के सर्वश्रेष्ठ योद्धा माने जाते थे।
मैं बात कर रहा हूँ प्राचीन भारत की उस हिंदू जाति के लोगों की जो स्पार्टन्स की ही भांति ‘यूजेनिक्स’ के कठोर नियमों का पालन करते थे जिसका फल था–
-क्षीर गौर वर्ण
-नीले या स्वर्णिम नेत्र,
-दीर्घ कठोर शरीर।
उनकी प्राण बसते थे केवल दो चीजों में–
‘आजादी और अश्व’
विश्वविजेता सिकंदर का सामना जब यमराज को भी चुनौती देने वाली इस जाति से हुआ तो वह पराजय के भय से कांप उठा था।

हजारों यूनानी यमगृह भेज दिये गए और अगर पोरस ने हाथियों से उनका ‘रथ व्यूह’ तोड़कर सिकंदर की सहायता न की होती तो सिकंदर का दाह संस्कार उसी दिन हो गया होता।

शोक!
आज भी उनके वंशज दुःख और क्रोध के साथ पोरस के इस विश्वासघात को महसूस करते हैं।
पहचान सकें तो पहचानिये भारत के इन अमर सपूतों को जिन्होंने विश्वविजेता सिकंदर का मुँह मोड़ दिया।
—–
‘अनंसंग हीरो’: #इंदु_से_सिंधु_तक में दिये गये विस्तृत विवरण के आधार पर।

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