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राणा संग्राम सिंग काट डाले गये

देवेन्द्र सिकरवार

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इतिहास को इस विकृत मनोभावों के साथ अपनी मानसिक घृणा के रूप में पेश करने वालों के विरोध ने ही फेसबुक पर मेरे विरोधियों को जन्म दिया।
फेसबुक पर निजी कारण से किसी से मेरी शत्रुता नहीं रही है लेकिन जन्मनाजातिगतश्रेष्ठता के प्रति मेरे घोषित विरोध के कारण मेरे कई शत्रु बने जिनमें ब्राह्मण भी थे और राजपूत भी लेकिन सर्वेश तिवारी श्रीमुख जी ने उनका सेनापतित्व संभाला।
मेरा दोष इतना था कि इतिहास की एक पोस्ट जिसमें इन्होंने एक राणा को चरित्रहीन व अपने शरणार्थी की पत्नी का बलात्कारी बताया जिसका मैंने यह कहते हुए विरोध किया कि राजपूत शासकों में दसियों ऐब हो सकते हैं लेकिन कायरता और शरणागत से विश्वासघात नहीं और फिर भी अगर दावा है कि ऐसा ही हुआ था तो उस स्रोत का उल्लेख कीजिये।
इनका दंभपूर्वक उत्तर था,”सर्वेश का लिखा ही अपने आप में प्रमाण है।”
मैंने फिर भी उक्त पोस्ट के विरोध में प्रमाण प्रस्तुत किये जिसे उन्होंने डिलीट कर दिया और फिर इसे दुश्मनी के तौर पर याद रखा।
व्यक्तिगत रूप से मुझे टारगेट करते हुए “तीन तिलंगे” जैसी घटिया पोस्ट लिखी।
इसके बाद भी कई बार मुझे पूर्वांचल के लड़कों द्वारा ‘देख लेने’ की धमकी इस अंदाज में दी मानो वहाँ के राजा हों और बाकी फॉलोअर इनके दास।
बहरहाल मैंने कुछ नहीं कहा लेकिन तीन जगह पर मेरा धैर्य जवाब दे गया।
–मर्यादापुरुषोत्तम के लिए अपनी जरूरत से ज्यादा शाब्दिक बाजीगरी दिखाते हुए उनसे पुत्र ‘मूत्र’ होता है, जैसा अशोभनीय व अश्लीयल वक्तव्य देता दिखाया।
–एक विरोधी लेखक शैलेन्द्र से विवाद होने पर उसके नवजात दुधमुंहे शिशु की …( लिख भी नहीं सकता)…. की कामना।
मैं स्वयं शैलेन्द्र को उसकी ट्रोलिंग के लिए ब्लॉक कर चुका था लेकिन उसके सहित फेसबुक का एक आदमी कहीं भी किसी भी विरोधी के लिए इस तरह की कुत्सित कामना का शब्द नहीं दिखा सकता। यही नहीं मेरी पुस्तक के समय #योगी_आदित्यनाथ जी द्वारा स्वयं पढ़कर आशीर्वाद दी गई मेरी पुस्तक ‘अनंसंग हीरोज: #इंदु_से_सिंधु_तक के विरुद्ध ईर्ष्या से प्रेरित होकर नितांत झूठा दुष्प्रचार कर मेरी स्वर्गीया माँ और वृद्ध पिता को अश्लील गालियां दिलवाईं और इसके लिए इस आदमी ने बाकायदा व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर दो महीने तक अश्लील अभियान चलाया।
–जन्मनाजातिगतश्रेष्ठता के औचित्य में ठाकुरों के अहं को तनिक सहलाते हुये, इस व्यक्ति के मन में किस तरह का जातीय जहर भरा है वह नीचे स्क्रीन शॉट्स में देख सकते हैं जिसमें इन्होंने जहर उगला और उन ‘हिंदुआ सूरज’ को देशद्रोही कहा जिसे संघ प्रातःस्मरणीय मानता है। यही नहीं इन्होंने बाकायदा उनके नाम को विकृत किया और उनके लिये ‘राणा सांगा काट डाले गये’ जैसे घृणा प्रदर्शित करते शब्दों का प्रयोग किया।
मैं इतने दुष्प्रचार के बावजूद शांत रहा हूँ जिसे यह मेरी कमजोरी कहकर प्रचारित कर रहे हैं।
जबकि मेरा मानना है कि कृष्ण का कर्मसिद्धान्त अटल है।
इसीलिये मैं अभी भी नहीं लिखता लेकिन मित्रगणों का कहना है कि मैं अपना पक्ष स्पष्ट न करके गलत कर रहा हूँ।
अतः इस विषय पर यह मेरी पहली और आखिरी पोस्ट है।
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प्रातः स्मरणीय राणा सांगा को देशद्रोही और बर्बर विदेशी इब्राहीम लोदी को देशभक्त बताती उनकी पोस्ट के ss नीचे हैं।

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