Home नया किरेन रिजिजू से छिना कानून मंत्रालय, अर्जुन मेघवाल होंगे नए कानून मंत्री

किरेन रिजिजू से छिना कानून मंत्रालय, अर्जुन मेघवाल होंगे नए कानून मंत्री

by Praarabdh Desk
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प्रधानमंत्री मोदी की  कैबिनेट में बड़ा बदलाव हुआ है. किरेन रिजिजू को कानून मंत्री पद से हटा दिया गया है. उनकी जगह अर्जुन राम मेघवाल को कानून मंत्री बनाया गया है. किरेन रिजिजू बतौर केंद्रीय कानून मंत्री लगातार चर्चा में रहे और उन्होंने पिछले दिनों न्यायपालिका और सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे.

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंत्रिमंडल में बदलाव को मंजूरी दी है. अब किरेन रिजिजू को कानून मंत्रालय से बदलकर भू विज्ञान मंत्रालय दिया गया. वहीं, रिजिजू की जगह अर्जुन राम मेघवाल को उनके मौजूदा पोर्टफोलियो के अलावा कानून और न्याय मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में राज्य मंत्री के रूप में स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया है.

 

किरेन रिजिजू ने ट्वीट कर कहा, ”माननीय प्रधा नमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री के रूप में सेवा करना सौभाग्य रहा. मैं सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों, हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और सभी लॉ अधिकारियों को हमारे नागरिकों के लिए कानूनी सेवाएं प्रदान करने में भारी समर्थन के लिए धन्यवाद देता हूं. मैं पीएम मोदी के दृष्टिकोण को पूरा करने के लिए तत्पर हूं. एक बीजेपी कार्यकर्ता के रूप में मैंने जिस उत्साह और जोश के साथ काम किया था, वैसे ही भू विज्ञान मंत्रालय में जिम्मा संभालूंगा.

 

2021 में कानून मंत्री बने थे रिजिजू

रिजिजू अरुणाचल पश्चिम लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद हैं. किरन रिजिजू का जन्म 19 नवंबर, 1971 को अरुणाचल प्रदेश के वेस्ट कामेंग जिले में हुआ था. उनके पास दिल्ली यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री है. उन्होंने 2004 में पहली बार लोकसभा चुनाव (अरुणाचल पश्चिम निर्वाचन क्षेत्र) लड़ा और जीत हासिल की. लेकिन वह 2009 के लोकसभा चुनाव में हार गए. 2014 के चुनाव में रिजिजू ने फिर से जीत हासिल की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में गृह राज्य मंत्री बनाए गए.

कौन हैं अर्जुन राम मेघवाल? 

अर्जुन राम मेघवाल 2009 से बीकानेर से सांसद हैं. मेघवाल का जन्म बीकानेर के किस्मिदेसर गांव में हुआ. उन्होंने बीकानेर के डूंगर कॉलेज से बीए और एलएलबी की. इसके बाद उन्होंने इसी कॉलेज से मास्टर्स डिग्री (M.A) की. इसके बाद, फिलीपींस विश्वविद्यालय से एमबीए भी किया. वह राजस्थान कैडर के एक आईएएस अधिकारी रहे हैं और उन्हें राजस्थान में अनुसूचित जाति के चेहरे के रूप में देखा जाता है

मेघवाल 2009, 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में बीकानेर से बीजेपी के टिकट पर सांसद चुने गए. उन्हें 2013 में सर्वश्रेष्ठ सांसद के पुरस्कार से नवाजा गया था.अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान, वह लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी के मुख्य सचेतक थे. मई 2019 में, मेघवाल संसदीय मामलों और भारी उद्योग और सार्वजनिक उद्यम राज्य मंत्री बने थे. अब उन्हें कानून मंत्रालय का भी प्रभार दिया गया है.

अर्जुन मेघवाल को ही क्यों बनाया गया कानून मंत्री?

अर्जुन मेघवाल को कानून मंत्री बनाए जाने के पीछे कई सियासी वजह मानी जा रही हैं. मेघवाल राजस्थान से आते हैं और इस साल के अंत में राज्य में विधानसभा चुनाव है. वे एससी जाति से हैं.  राजस्थान में कुल जनसंख्या में एससी जातियों की 18-19 फीसदी हिस्सेदारी है. विधानसभा की 52 सीटों पर एससी जातियों का प्रभाव माना जाता है. इतना ही नहीं राजस्थान में एससी जाति में सबसे ज्यादा मेघवाल हैं. ऐसे में इसे अशोक गहलोत के ओबीसी वोटों की काट के लिए अहम रणनीतिक कदम माना जा रहा है. इतना ही नहीं लोकसभा चुनाव में कई सीटों पर एससी जातियां जीत हार तय करती हैं.

न्यायपालिका पर टिप्पणी को लेकर चर्चा में थे रिजिजू

किरेन रिजिजू पिछले कुछ वक्त से लगातार न्यायपालिका पर टिप्पणी को लेकर चर्चा में थे. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे. रिजिजू ने पिछले साल नंवबर में कहा था कि जजों की नियुक्ति का कॉलेजियम सिस्टम संविधान के लिए एलियन है. उन्होंने कहा था कि कॉलेजियम सिस्टम में कई खामियां हैं और लोग इसके खिलाफ आवाज उठा रहे हैं. बाद में उन्होंने कहा था कि रिटायर्ड जज और ऐक्टिविस्ट भारत विरोधी गिरोह का हिस्सा हैं.

 

पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने रिजिजू की टिप्पणियों पर नाराजगी भी जताई थी. बेंच ने कहा था कि शायद सरकार जजों की नियुक्ति को इसलिए मंजूरी नहीं दे रही क्योंकि एनजेएसी को मंजूरी नहीं दी गई. रिजिजू और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की टिप्पणियों के खिलाफ जनहित याचिका भी दाखिल की गई थी. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने दो दिन पहले ही इसे खारिज कर दिया था.

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