Home लेखक और लेखअजीत सिंह 30 साल पुराना किस्सा : फैक्ट्री का फोरमैन

30 साल पुराना किस्सा : फैक्ट्री का फोरमैन

by Ajit Singh
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30 साल पुराना किस्सा है ।
दिल्ली पटना श्रमजीवी Express का ।
मैं बनारस से दिल्ली आ रहा था ।
मेरे सहयात्री एक सेठ जी थे , दिल्ली के ।
उनके साथ एक मैला कुचैला , श्रमजीवी किस्म का आदमी था ।
बात चली ।
मैंने पूछा , सेठ जी , इधर कैसे ? पूर्वांचल में ????
बोले इसे लेने आया था ?
इसको लेने क्यों आना पड़ा आपको ?????
सेठ जी फट पड़े ….. मोटी गाली दी …… बोले बिहारी है न , एक बार घर चला आया तो फिर वापस जाने का नाम नही लेता । 15 दिन से घर पड़ा था । अब इसे ले के जा रहा हूँ ……
कौन है ये ?
मेरी factory का foreman है ।
इतना महत्वपूर्ण है कि इसे लेने आपको दिल्ली से इसके गांव आना पड़ा ?????
सेठ जी बताने लगे की उनकी factory इसी के भरोसे चलती है । उस ज़माने में जब कि SAI में मेरा वेतन 4000 रु था तो उस Foreman की पगार 50,000 रु थी , perks अलग से ……
मेरे आश्चर्य की सीमा न रही ……
50,000 ????????
मने मुझसे 12 गुणा ज़्यादा ?????
अजी पूरी factory इसी के सिर पे चलती है ।
ये न रहे तो काम ठप्प ……
बाजार भर में इसका विकल्प नही …….
इसका विकल्प मुझे मिल जाये तो लाख रु दे दूँ …….
ये एकदम सत्य घटना है ।
इसके अलावा मैं ऐसे कई लोगों को जानता हूँ जो अपनी Skill और अपनी योग्यताओं और अपनी मेहनत , dedication अपनी ईमानदारी के कारण अपनी Private नौकरियों में भी एकदम मालिक बन के काम करते हैं ।
अपनी शर्तों पे काम करते हैं ।
वो जो अपने मालिक के लिये अपरिहार्य बन चुके हैं ।
मालिक किसी भी कीमत पे छोड़ने को तैयार नही ।
मेरी पिछली पोस्ट पे ( मनाली में भीड़ वाली ) एक मित्र ने comment किया है कि तुम क्या जानो छुट्टी की कीमत …..कभी नौकरी की होती तो जानते ……
मैंने जवाब दिया कि नौकरी आखिर करते ही क्यों हो , किसी की ?
अपना उद्यम करो , स्वरोज़गार करो …..
किसी दूसरे की गुलामी करते ही क्यों हो ?
और करो तो मालिक बन के करो न ……
ऐसे Employee क्यों बने हो कि मालिक /boss 3 दिन की छुट्टी तक न दे ….. 3 दिन absent हो जाएं तो नौकरी जाने का खतरा हो जाये ?????
अगर आपको अपने Boss से 3 दिन की छुट्टी मांगने के लिए दांत निपोरने पड़ते हैं , घिघियाना पड़ता है , मने तुम एकदम निकम्मे Employee हो जिसे मालिक बस ढो रहा है और मौका मिलते ही निकाल देगा ……तुम Employee नही गुलाम हो ……
अगर तुम अपनी Organisation के नवरत्न होते तो मालिक से छुट्टी नही मांगते बल्कि उसे Inform भर करते कि हफ्ते भर को जा रिया हूँ छुट्टी मनाने …..परिवार के साथ ……
और Boss दांत निपोर के कहता …… Sure Sir ….. pl Enjoy कीजिये ….. एकदम टेंशन फ्री हो के ….. काम की चिंता मत कीजिये …… मैं सम्हाल लूंगा ।
गाड़ी ले जाइये ….. Driver ले जाइये …… Tank full है ……
अगर कंपनी / संस्था में आपकी ऐसी स्थिति नही है मने आप कामचोर , निकम्मे , नकारा , नल्ले हैं ।
अव्वल तो किसी की नौकरी करो मत और करो तो ऐसी करो कि हर 3 महीने पे हफ्ते भर की छुट्टी ले सको , ताव से ।

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