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मोदी सरकार के समय में क्या स्विस बैंको में भारतीयों का काला धन जमा है?

अमित सिंघल

by अमित सिंघल
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कुछ समय पहले एक रिपोर्ट आयी थी कि वर्ष 2021 में स्विस बैंको में 3.83 बिलियन स्विस फ्रां या लगभग 31000 करोड़ रुपये जमा था। समाचार यह भी बतलाता है कि यह धन वर्ष 2020 में केवल 2.56 बिलियन स्विस फ्रां या 20,800 करोड़ रुपये था।

स्वाभाविक है कि शोर मचेगा कि मोदी सरकार के समय में स्विस बैंको में काला धन बढ़ गया। लेकिन समाचार यह नहीं बताएगा कि वर्ष 2006 में लगभग 5 बिलियन स्विस फ्रां या आज के समय का 40500 करोड़ रूपये जमा था।

समाचार यह भी बतलाता है कि मोदी सरकार ने स्विट्ज़रलैंड के साथ एक समझौता साइन किया है जिसके अनुसार वर्ष 2018 से स्विस बैंको में भारतीय खाताधारकों के धन की सूचना भारत के साथ शेयर करी जायेगी

रूचि की बात यह है कि भारत की ओर से इस समझौते को केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के अध्यक्ष ने साइन किया था। अर्थात, स्विट्ज़रलैंड एवं भारतीय खाताधारकों को पता है कि इस सूचना का प्रयोग भारत कर एवं पेनाल्टी के लिए प्रयोग करेगा। समझौते में लिखा भी है कि इस सूचना का प्रयोग tax matters के लिए किया जाएगा।

स्विस बैंको में भारतीय खाताधारकों के व्यक्तिगत अकाउंट में वर्ष 2021 में केवल 602 मिलियन स्विस फ्रां या 4900 करोड़ रुपये था; जबकि वर्ष 2006 में 15500 करोड़ रुपये जमा थे।

इसके विपरीत, स्विस बैंक में भारतीय वित्तीय संस्थानों का धन (बांड्स, सिक्योरिटीज एवं अन्य वित्तीय घटक – अर्थात कैश में नहीं ) का डिपाजिट बढ़ा है, जो वर्ष 2021 में 16250 करोड़ रुपये (2 बिलियन स्विस फ्रां) था। वर्ष 2006 में यह डिपाजिट केवल 1081 करोड़ रुपए (133 मिलियन स्विस फ्रां) था।

स्विस बैंक में भारतीय वित्तीय संस्थानों का धन का डिपाजिट बढ़ा है, जबकि व्यक्तिगत अकाउंट में जमा राशि में कमी आयी है।

यहाँ ध्यान देने की बात यह है कि भारत के वित्तीय संस्थान कई विकसित देशो के बैंको में कुछ धन विदेशी मुद्रा में रखते है जिससे अगर एक मुद्रा में भारी गिरावट आ जाए तो किसी अन्य मुद्रा में जमा धन सुरक्षित रहे। कुल जमा राशि केवल 31000 करोड़ रुपये या तीन बिलियन डॉलर है जो कुल विदेशी मुद्रा (600 बिलियन डॉलर) का 0.6 प्रतिशत है।

व्यक्तिगत अकाउंट में जमा राशि में कमी इंगित करती है कि स्विस बैंको में भारतीयों का व्यक्तिगत डिपाजिट कम हुआ है।

स्विस आंकड़ों में उस धन की डिटेल अलग से नहीं है जो एनआरआई या अन्य भारतीयों ने स्विस बैंकों में जमा किया हुआ है। उदाहरण के लिए, स्विट्ज़रलैंड में भारत के तीन दूतावास (एक ज्युरिक में; दो जेनेवा में) है; अंतर्राष्ट्रीय संगठनों एवं स्विस कंपनियों में हज़ारो भारतीय वीज़ा पर काम कर रहे है। उनका धन भी स्विस बैंको में जमा है और खाते की जानकारी में उनकी नागरिकता भारतीय लिखी हुई है।

क्या इस डिपाजिट को आप काला धन बोलेंगे? क्या आप चाहेंगे कि आपके इस “काले धन” की जानकारी भारत के टैक्स अधिकारियों को प्रति वर्ष क़ानूनी रूप से मिल जाए? क्या मोदी सरकार के समय में क्या काला धन बैंको में, चाहे वे विदेश में ही क्यों ना हो, जमा करना संभव है?

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