KGF Chapter 2 Story & Review

by ओम लवानिया
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KGF Chapter 2 Story & Review

 

सीबीआई ऑफिसर राघवन हैरान रह जाते है। जब उन्हें मालूम चलता है, गरुडा की मौत के बाद कोलार गोल्ड फील्ड को बाहर से आया व्यक्ति कंट्रोल कर रहा है और केजीएफ़ को अपने अनुरूप बना रहा है।
भारतीय सिनेमा की केजीएफ़ यानी बॉलीवुड से कालजयी कंटेंट से सोना निकाला जाता रहा है। डी कंपनी का होल्ड था। इसने किसी को घुसने न दिया।
लेकिन हॉलीवुड के मार्वल कंटेंट ने भारतीय ट्रेड के हिसाब से रणनीति बनाना शुरू किया और सफलता हासिल की। इधर, दक्षिण भारत की नई जरनरेशन ने पुनः कोशिश करने की ठानी और एसएस राजमौली ने बाहुबली से मुम्बई की ओर रुख किया। लोकप्रियता और सफलता दौड़ी चली आई। इस फ़िल्म के साथ दक्षिण भारतीय कंटेंट और मुम्बई के बीच रास्ता बन गया। भारतीय सिने ट्रेड को हॉलीवुड क्यों कब्जाए, इसी रणनीति के तहत दक्षिण रीजन के कंटेंट आने शुरू हुए। बाहुबली के बाद केजीएफ़ चैप्टर 1 आया और छा गया। उसके बाद साहो, पुष्पा, ट्रिपल आर और अब केजीएफ़ चैप्टर 2 से पैन इंडिया बॉक्स ऑफिस उर्फ़ केजीएफ़ को हथिया लिया है।
बाहर से आने वाले अल-डोराडो ‘हॉलीवुड’ कंटेंट को प्लेटफार्म तो अवश्य है। लेकिन कमान नहीं है, महज बिज़नेस ऑफर है। भारतीय सिनेमा के केंद्र बिंदु केजीएफ़ पर हक सिर्फ़ भारतीय का है और रहेगा। इसे कोई बाहरी ले जाए, अब ऐसा न होगा। दक्षिण भारत रीजन ने अपने कंटेंट का दायरा बढ़ा दिया है। डी कंपनी को बड़ी माँ ‘शिवगामी देवी’ उठाकर फेंक चुकी है। अब इनके अनुसार केजीएफ़ न चलेगी। कंटेंट नेपोटिज़्म के परिवेश में आएंगे अवश्य, परन्तु मेरिट के जरिये निकलेगें।
बाप का, दादा का, माँ का, भाई का, बहन का, मामा का, चाचा का, किसी के नाम से कुछ न हासिल होगा। कंटेंट परफॉर्मेंस देगा तभी केजीएफ़ से सोना निकलेगा, वरना गड्ढे में गिरते जाएंगे और कालजयी स्टेटस लेते निकलेगें।

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