Home राजनीति अमेरिका में लगभग 4.6 ट्रिलियन डालर का निवेश दूसरे देशों ने किया

अमेरिका में लगभग 4.6 ट्रिलियन डालर का निवेश दूसरे देशों ने किया

by Umrao Vivek Samajik Yayavar
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2020 में अमेरिका में लगभग 4.6 ट्रिलियन डालर का निवेश दूसरे देशों ने किया। अमेरिका ने लगभग 6.2 ट्रिलियन डालर का निवेश दूसरे देशों में किया। जितना मिला, उससे बहुत अधिक दिया।
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2020 में चीन में लगभग 3.2 ट्रिलियन डालर का निवेश दूसरे देशों ने किया। चीन ने लगभग 2.5 ट्रिलियन डालर का निवेश दूसरे देशों में किया। जितना मिला, उससे कम दिया।
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2020 में ऑस्ट्रेलिया में लगभग 790 अरब डालर का निवेश दूसरे देशों ने किया। ऑस्ट्रेलिया ने लगभग 627 अरब डालर का निवेश दूसरे देशों में किया। जितना मिला, उससे कम दिया।
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2020 में रूस में लगभग 450 अरब डालर का निवेश दूसरे देशों ने किया। रूस ने लगभग 380 अरब डालर का निवेश दूसरे देशों में किया। जितना मिला, उससे कम दिया।
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2020 में भारत में लगभग 570 अरब डालर का निवेश दूसरे देशों ने किया (इसमें से लगभग 100 अरब डालर अमेरिका ने किया)। भारत ने लगभग 100 अरब डालर का निवेश दूसरे देशों में किया। जितना मिला, उससे बहुत कम दिया।
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2020 में जापान में लगभग 232 अरब डालर का निवेश दूसरे देशों ने किया। जापान ने लगभग 1.8 ट्रिलियन डालर का निवेश दूसरे देशों में किया। जापान व अमेरिका दुनिया के उन चंद अपवाद देशों में हैं जो जितना लेते हैं उससे अधिक वापस करते हैं। उसमें भी जापान की स्थिति अद्वितीय है, जितना लिया उसका लगभग 9 गुना अधिक दिया।
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अब कई बातें सामने आती हैं —
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चीन के जो भगत लोग यह बताते रहते हैं कि चीन बहुत महान देश है, अमेरिका की इकोनोमी ने चीन के सामने घुटने टेक रखे हैं। और भी पता नहीं क्या अंडबंड बोलते बताते रहते हैं। भारत में बहुत चिंतक लोगों ने ताली पीटी कि कोविड ने अमेरिका का सत्यानाश कर दिया है, अमेरिका की इकोनोमी का भठ्ठा बैठ गया है। अमेरिका बूढ़ा हो गया है, चुक गया है। और भी पता नहीं क्या-क्या।
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इन लोगों को अंडबंड बोलने बतियाने से पहले आथेंटिक स्रोतों से तथ्यों का कुछ अध्ययन भी कर लेना चाहिए। विश्लेषण करने की कुछ तो तमीज तहजीब होनी ही चाहिए या फिर पान की गुमटी पर पान की पिचकारी यहां-वहां थूकते हुए जो मन में आए उसपर कुछ भी तर्क भिड़ाकर कुछ भी बक देना ही विश्लेषण करना है।
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चीन में पूरी दुनिया से कुल जितना निवेश हुआ, उसका लगभग दुगुना निवेश अमेरिका ने अकेले पूरी दुनिया में किया। जितना अमेरिका में निवेश हुआ उसका लगभग डेढ़ गुना अमेरिका ने दुनिया को वापस किया, वह भी तब जब अमेरिका में कोविड के कारण हाहाकार मचा रहा। अमेरिका चाहता तो जितना दुनिया से पाया उससे कम दुनिया को वापस करता, जैसा कि चीन, रूस व दुनिया के अधिसंख्य देश करते हैं। कम से कम कोविड की विकट परिस्थितियों में तो ऐसा कर ही सकता था, लेकिन खुद परेशानियों से जूझने के बावजूद अमेरिका ने ऐसा नहीं किया।
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सबसे बड़ी बात अमेरिका दुनिया के उन चंद अपवाद देशों में से है, जो जितना निवेश उनके अपने यहां दूसरे देशों से होता है, उससे अधिक निवेश दुनिया के देशों में करते हैं। मतलब जितना दूसरों से लेते हैं, उससे अधिक दूसरों को देते हैं। इस तरह की इकोनोमी का मूल चरित्र साम्राज्यवादी होता ही नहीं है, संभव ही नहीं।
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फर्जी वापमंथी चीन के अंधभगत लोगों की वैचारिक-बकैती, तार्किक-लंपटई, व अज्ञानता अपनी जगह, लेकिन यह एक अकाट्य तथ्य है कि चीन को अमेरिका की आज की इकोनोमी की भी बराबरी करने में कई दशक लगेंगे, अमेरिका जैसा विकसित होने में शताब्दी भी कम पड़ेगी।
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(एक ट्रिलियन में 1000 अरब होते हैं। एक ट्रिलियन = एक हजार अरब)
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