Home हमारे लेखकनितिन त्रिपाठी अमेरिकी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई

अमेरिकी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई

by Nitin Tripathi
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अमेरिका में यूनिवर्सिटी में पढ़ाई का एक बहुत बड़ा मिथ है कि अनर्गल बहुत महँगी है, स्टूडेंट्स के ऊपर पढ़ते पढ़ते ही इतना क़र्ज़ हो जाता है कि उसे चुकाते हुवे जीवन निकल जाता है. जो एक हद तक सच भी है. इस समय अमेरिका में कुल फ़ेडरल स्टूडेंट लोन लगभग 1.7 ट्रिलियन डालर के बराबर है. इसे इस संदर्भ में देखें कि भारत जैसे देश की सकल वार्षिक आय लगभग ढाई ट्रिलियन है. जितना भारत की gdp है उसके तीन चौथाई के बराबर अमेरिका सरकार का स्टूडेंट लोन है.
मैं इसे लोन नहीं मानवता के इतिहास का सबसे शानदार इन्वेस्टमेंट मानता हूँ. लोन का क्या, केवल एक कम्पनी गूगल जो अमेरिका की यूनिवर्सिटी में ही खोजी गई उसकी ही वैल्यू दो ट्रिलियन है. केवल गूगल मात्र से ही पूरे अमेरिका का स्टूडेंट लोन चुक जाए. ऐसी ढेरों कम्पनियाँ – माइक्रसॉफ़्ट से फ़ेस बुक तक सब अमेरिकन यूनिवर्सिटी में ही खोजी गईं, बनाई गईं. आधुनिक मानवता के इतिहास के लगभग सारे इन्वेन्शन अमेरिकन यूनिवर्सिटी में हुवे. अगर अमेरिकन यूनिवर्सिटी सिस्टम न होता तो शायद हम अभी सभ्यता में आधा शताब्दी पीछे होते.
वजह भी है छोटी छोटी यूनिवर्सिटी का बजट भारत के बड़े बड़े प्रदेशों के कुल शिक्षा बजट से ज़्यादा होता है. यूनिवर्सिटी का माहौल, शिक्षा और सुबिधाएँ ऐसी होती हैं जो अकल्पनीय हैं. इकीस वर्ष की आयु तक ही एक औसत अमेरिकन इनोवेशन की वह दुनिया देख चुका होता है जिसे शेष विश्व के बड़े बड़े वैज्ञानिक रिटायरमेंट तक देख नहीं पाते. तो ऐसे में सारा इनोवेशन प्रगति अमेरिका की वहाँ की यूनिवर्सिटी ड्रिवेन है.
निहसंदेह एक औसत स्टूडेंट लोन चुकता करने में पंद्रह साल लगाता है. पर सच यह भी है कि वह स्टूडेंट लोन सबसे आराम से चुकाता है ब्याज कम है. पहले घर, bmw ख़रीदता है स्टूडेंट लोन चुकता होता रहता है. पंद्रह साल बाद जितनी उसकी तनख़्वाह होती है वह एक साल में यह लोन चुकता कर दे. साथ ही यदि यह पढ़ाई न की होती तो जितना वह ज़िंदगी भर में कमाता, अब वह एक साल में कमाता है. कमाई ही नहीं, देश और मानवता का भला भी कर रहा है.
मैं अपने सभी मित्रों को यही सलाह देता हूँ, शेयर, क्रिप्टो, रियल एस्टेट कुछ नहीं हैं. सबसे ज़्यादा रिटर्न देने वाला इन्वेस्टमेंट शिक्षा ही है. लोन लेकर, बेंच कर, गिरवी रख कर कैसे भी उच्च शिक्षा प्राप्त करें. जो आपकी पहुँच है उससे एक लेवेल आगे तक पढ़ें. गाँव में पढ़ने की हैसियत है, शहर पहुँचें. शहर लायक़ हों दिल्ली अशोक में जाएँ. दिल्ली लायक़ हों, यूरोप जाएँ. यूरोप लायक़ हों अमेरिका जाएँ. शिक्षा एक लेवेल ऊपर तक ज़रूर लें, अपनी हैसियत से ज़्यादा.
शिक्षा समाप्त होने के दस वर्ष बाद जो आप धन्यवाद देंगे उसके लिए अभी से आभार

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