Home हमारे लेखकरिवेश प्रताप सिंह आपने अक्सर सुना होगा कि फलाने फिसल के गिरे और उनके कूल्हे की हड्डी चटक गयी.

आपने अक्सर सुना होगा कि फलाने फिसल के गिरे और उनके कूल्हे की हड्डी चटक गयी.

रिवेश प्रताप सिंह

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आपने अक्सर सुना होगा कि फलाने फिसल के गिरे और उनके कूल्हे की हड्डी चटक गयी… कूल्हे का टूटना एक बेहद ख़तरनाक घटना होती है। ज्यादातर होता यूं है कि ऐसी दुर्घटना के बाद एक सप्ताह के भीतर ही फोटो, फूल और अगरबत्ती जलने लग जाती है मतलब ‘ॐ शान्ति’ हो जाना आम है।
दरअसल ऐसी दुर्घटनाओं के बाद किसी की धड़कन बची रहे.. वो किसी भी कूल्हा टूटने वाले व्यक्ति के लिए सौभाग्य की बात है..और रही बात उसके उठने, चलने और दौड़ने की तो ऐसे लोग… साक्षात.. यमराज के आशीर्वाद से ही अभिसिंचित होंगे.. लेकिन इस पर तुर्रा यह कि इस दुर्घटना के बाद कोई साइकिल पर चढ़कर थर्राटे काट ले!! यह सोचना पाप है..पाप का बाप है।
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अब पेश है ऐसी दुर्घटनाओं के बीच का एक महत्वपूर्ण तथ्य-
दुर्भाग्य यह कि ऐसी घटनाओं के बीच एक कार्य-कारण सम्बन्ध भी स्थापित हो जाता है। जिसमें कुछ सम्बन्धों की शिनाख्त भी हो जाती है! जैसे गृहणियों द्वारा गीला पोछा लगाना, रास्ते में ऐसी रुकावट जिससे बुजुर्ग के पैर कहीं अटक जाये.. बाथरूम की फिसलन.. सीढ़ी का उतार- चढ़ाव आदि।
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मित्रों! आपको जानकर आश्चर्य होगा कि फिसल कर गिरने और कूल्हा टूटने के विषय में हम-सब तथा हमारे मेडिकल साइंस की समझ में एक नाइत्तेफाकी है… हमारा मेडिकल साइंस यह कहता है कि जब आप बुजुर्ग और कमजोर हो जाते हैं तो आपके कूल्हे की कमजोर हड्डी कभी भी चटक कर टूट सकती है और आप न चाहते हुए भी जमीन पर गिर जाते हैं और आपके मरीज तथा उसके परिजनों को यह लगता है कि उसका कूल्हा..आपके फिसलने की वजह से चटका।
दरअसल टूटकर गिरना तथा गिरकर टूटने की अवधि बेहद क्षणिक होता है इसलिए इसका दुष्प्रभाव भी होता है
मित्रों! दस मार्च कयामत का दिन है.. हड्डी चटक कर कूल्हे का टूटना… उनका बेतहाशा गिरना, बिल्कुल तय है.. और उसका कार्य कारण संबंध का होना भी बिल्कुल तय है.
आप तैयार रहिये! क्योंकि कोई मानने को तैयार न होगा कि उनके कूल्हे की हड्डी कमजोर थी. सब के सब फिसलन और गीले पोंछे की बात करेंगे।

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