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ओमिक्रान : हमारी जिम्मेदारी व जवाबदेही

by Umrao Vivek Samajik Yayavar
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जिन देशों में वैक्सीन लगाने के नाम पर धोखाधड़ी व फर्जीवाड़ा नहीं किया गया है तथा नहीं किया जा रहा है। उन देशों में जिन लोगों को वैक्सीन लग चुकी है, ऐसे लोगों को ओमिक्रान होने पर अस्पताल पहुंचने की संख्या लगभग नगण्य है। जबकि जिन लोगों को पहले कोविड हो चुका है लेकिन वैक्सीन नहीं लगवाई है, इन लोगों को ओमिक्रान होने पर अस्पताल पहुंचने की संख्या अधिक है। जिन लोगों को वैक्सीन लग चुकी है, उनको ओमिक्रान होने पर अस्पताल पहुंचने की संख्या नगण्य है।
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जिन देशों में वैक्सीन लगाने के नाम पर धोखाधड़ी व फर्जीवाड़ा किया गया है तथा किया जा रहा है। उन देशों में जिन लोगों को वैक्सीन लग चुकी है, ऐसे लोगों को ओमिक्रान होने पर अस्पताल पहुंचने की संख्या अधिक है।
वैक्सीन के नाम पर पानी लगाने, नमक पानी लगाने या ग्लूकोज लगाने से वैक्सीन की रैपर लगी शीशी में वैक्सीन नहीं हो जाती है। केवल आकड़ों में वैक्सीन लगने की संख्या बढ़ती है।
दुनिया में ऐसे भी देश हैं जहां की सरकारें, वैक्सीन लगाने वाली कंपनियां वैक्सीन लगाने के नाम पर जमकर धोखाधड़ी व फर्जीवाड़ा कर रही हैं। जितनी क्षमता तक नहीं है, उससे सैकड़ों गुना अधिक वैक्सीनें ठोंकी जा रही हैं।
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जिनको पहले कोविड हो चुका है, वे ओमिक्रान से सुरक्षित नहीं हैं, अस्पताल भी पहुंच रहे हैं। जिन लोगों को वैक्सीन लग चुकी है, उन लोगों को ओमिक्रान हो तो रहा है लेकिन अस्पताल पहुंचने की नौबत बहुत ही कम आती है।
जिन लोगों को वैक्सीन (असली वाली) लग चुकी है, उन लोगों को यदि ओमिक्रान होता है तो इनमें से बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिनको कोई लक्षण नहीं दिखाई पड़ते हैं, बिलकुल सामान्य जीवन रहता है। जब तक टेस्टिंग नहीं की जाए तब तक मालूम नहीं पड़ता है कि ओमिक्रान से संक्रमित हैं।
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**चलते-चलते**
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कोविड की वैक्सीनों को लेकर कभी भी यह दावा नहीं किया गया कि वैक्सीन लगवाने के बाद कोविड नहीं होगा। कोविड के लिए वैक्सीन महत्वपूर्ण सुरक्षा चक्र है, वैक्सीन लगवाने के बाद कोविड की मारक क्षमता बहुत घट जाती है।
ओमिक्रान ने हमें बता दिया है कि जो लोग यह हल्ला करते आए हैं कि जिनको कोविड हो चुका है उनके शरीर ने खुद को कोविड से लड़ने के लिए सक्षम कर लिया है, यह थियरी गलत है। ओमिक्रान से वे लोग ही अधिक असुरक्षित हैं जिनको कोविड हो चुका है और वैक्सीन नहीं लगी है। कुछ-कुछ दिन पहले हो चुके कोविड वालों को ओमिक्रान हो रहा है और अस्पताल पहुंच रहे हैं।
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ओमिक्रान तो हलका है लेकिन यदि हमने अपना दृष्टिकोण व जीवन-शैली नहीं बदला तो अभी और भी म्यूटेंट आएंगे जो बेहद खतरनाक होंगे। इसलिए हमारा प्रयास होना चाहिए कि हम नए म्यूटेंट बनने में अपना योगदान नहीं दें। कोविड ऐसा वायरस है जिसने अभी तक चलताऊ मान्यताओं की धज्जियां ही उड़ाई हैं। इसलिए हमें इस वायरस को लेकर संजीदा होना पड़ेगा वरना हम आने वाले वर्षों में एक से बढ़कर एक खतरनाक म्यूटेंट्स देखेंगे और अपने प्रियजनों की असामयिक मृत्यु देखने के लिए अभिशप्त होंगे।
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विवेक उमराव
“सामाजिक यायावर”
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