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ग्लोबल हैपिनेस इंडेक्स

Isht Deo Sakratyanan

by Isht Deo Sankrityaayan
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ग्लोबल हैपिनेस इंडेक्स
◆ उस्ताद-उस्ताद!
¶ बोल बे जमूरे!
◆ उस्ताद ये ग्लोबल हैपिनेस इंडेक्स क्या चीज होता है?
¶ जरूर कोई ऊँची चीज है, भौत उम्दा टाइप।
◆ हाँ, सों तो मुझे भी मालूम है कि है तो जे कोई उम्दा ई चीज। पर है क्या बला उस्ताद? ठीक-ठीक बताओ न!
¶ देख जमूरे.. ठीक-ठीक तो मुझे भी उत्ताई पता है जित्ता कि भारत के बड़े-बड़े पत्रकारों, लेखकों और फुद्धिजीवियों को। लेकिन इत्ता जरूर मालूम हो गया है कि ई कोई ऐसी चीज है जिस पर भौत ऊपर ना जाने का। जित्ता उप्पर उत्ता खतरा।
◆ वो कैसे उस्ताद?
¶ अब देख, श्रीलंका है.. ये तीन महीने पहले 130वें पायदान पर था और भारत 140वें पर। ये मैंने आज ही सुना और कल टीभी पर देख चुका हूँ।
◆ हाँ ssss उस्ताssss द! जे तो बात ठीक है…. लेकिन उस्ताद!,
¶ हाँ बक बे!
◆ अभी तो और भी कई देश हमसे भौत उप्पर हैं।
¶ अच्छा!!
◆ हाँ!
¶ वो कौन कौन से हैं?
◆ अब जैसे कि एक तो पाकिस्तान ही है, 67वें पर।
¶ अच्छा! और कौन है?
◆ और कौन है?
¶ और एक भूटान है, 95वें पर।
◆ अच्छाsssss! और कौन है?
¶ हाँ, हैं न, कई हैं।
◆ अच्छा ssss!!! तो बता जरा सबके नाम और रैंक।
¶ एक नेपाल था उस्ताद 100वें पर और एक बांग्लादेश था 125वें पर….
◆ रहन दे रहन दे जमूरे.. में समझ गया।
¶ क्या समझ गए उस्ताद, जरा हमें भी समझाओ।
◆ यही कि आगे से ग्लोबल हैपिनेस इंडेक्स से बच के रहना है। और सुन… वो जो आता है न तेरा… वो जो फुद्धिजीवी जमूरा…
¶ हाँ उस्ताद, बोलो…
◆ उससे तो हैपिनेस इंडेक्स और कोरोना से भी दस कदम दूर रहना।

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