Home विषयसामाजिक भारत में बजट का लगभग 20% शिक्षा पर खर्च हो – 2

भारत में बजट का लगभग 20% शिक्षा पर खर्च हो – 2

Vivek Umrao

by Umrao Vivek Samajik Yayavar
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जब बजट के लगभग एक चौथाई (25%) का हिसाब-किताब नहीं मिला, तो बहुत लोगों ने फेसबुक व व्हाट्सअप पर यह बताया कि बजट का एक चौथाई भारत सरकार द्वारा लिए गए विदेशी लोन का ब्याज इत्यादि भरने में जाता है। कुछ लोगों ने तो यह भी दावा ठोंक दिया कि ऐसा उनको आर्थिक मामलों के ज्ञानी लोगों ने बताया है। वैसे भी अपने देश में बहुत लोगों की आदत होती है कि उनको कुछ पता वता भले ही न हो, लेकिन अपनी बात पर वजन रखने के लिए कुछ भी झूठ ठूंस देते हैं।

 

बताया गया कि भारत पर लगभग 48.58 लाख करोड़ का विदेशी लोन है, इसी का ब्याज इत्यादि चुकाने में बजट का एक चौथाई (मतलब लगभग 10 लाख करोड़ रुपए) प्रयोग होता है।
होता यह है कि अधिकतर लोग जो अखबार में छपा, जो बयान आया उसी को तथ्य मानकर उसी आधार पर तर्क बनाते हुए अपनी मान्यता को पक्का कर लेते हैं। इसलिए एक छोटा सा सवाल भी नहीं खड़ा हो पाता है कि महज 48.58 लाख करोड़ के लोन के लिए लगभग 10 लाख करोड़ रुपए का ब्याज कौन सी गणित से दिया जाता है। खैर इसको यही छोड़ते हैं, और एक बड़े ट्विस्ट पर आते हैं। जब मैंने रिजर्व बैंक इंडिया व भारत सरकार के आर्थिक मामलों वाले विभाग के कुछ दस्तावेजों को खंगाला तो एक अलग जानकारी समाने आती है।
भारत पर 48.58 लाख करोड़ रुपए का विदेशी लोन है। लेकिन इसमें भारत की केंद्र सरकार व राज्य सरकारों द्वारा लिया गया लोन सिर्फ 10.38 लाख करोड़ रुपए ही है।
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ध्यान दिया जाए कि भारत सरकार व राज्य सरकारों द्वारा लिया गया विदेशी लोन कुल लगभग 10.38 लाख करोड़ रुपए है (वर्तमान मुद्रा एक्सचेंज दर पर)। जाहिर है कि केवल भारत सरकार का लोन इससे भी कम होगा, लगभग 5 लाख करोड़ हो सकता है या इससे भी कम हो सकता है या 5 लाख करोड़ से कुछ अधिक हो सकता है। फिर भी मान लेते हैं कि पूरा का पूरा लगभग 10 लाख करोड़ रुपए भारत सरकार द्वारा ही लिया गया लोन है।
मेरा सवाल यह है कि जब सरकार पर कुल विदेशी लोन ही लगभग 10 लाख करोड़ है, तो भारत सरकार अपने बजट का लगभग 25% (लगभग 10 लाख करोड़ रुपए) कौन से ब्याज इत्यादि को चुकाने के लिए रखती है। भारत के एक बहुत प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अंग्रेजी अखबार में बजट पर एक लेख में बताया गया कि भारत सरकार ने कहा है कि बजट का लगभग 15% विदेशी लोन के ब्याज इत्यादि के भुगतान में जा रहा है। खैर अभी इस पर नहीं जाएंगे कि इस 15% को निकाल दें तब भी तो बजट के 10% का हिसाब नहीं मिल रहा है। अभी तो इस पर बात की जाए कि क्या सच में ही सरकारी द्वारा लिए गए विदेशी लोन पर बजट का 15% के बराबर ब्याज पड़ता है।
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जब भारत की केंद्र व राज्य सरकारों पर कुल विदेशी लोन ही लगभग 10 लाख करोड़ रुपए है, तो देश के बजट से लगभग 7−8 लाख करोड़ रुपए कौन से ब्याज इत्यादि के लिए दिए जाते हैं। बजट में जितनी रकम को विदेशी लोन पर ब्याज देने वाले मद में बताया जा रहा है, उतने में तो पूरा विदेशी लोन (सरकार द्वारा लिया गया) एक झटके में चुक जाएगा।
जब मैं विदेशी लोन के संदर्भ में दस्तावेज खंगाल रहा था, तब मैंने उन बैंकों व संस्थानों की ब्याज दरों के बारे में भी जानकारी प्राप्त की, जिनसे भारत सरकार ने लोन ले रखा है। मालूम पड़ कि डेढ़ प्रतिशत से लेकर लगभग 6 प्रतिशत तक की ब्याज दर है। चलिए मान लेते हैं कि भारत से जानबूझकर अधिक ब्याज दर ली जाती है, और यह 10% तक भी है, यह भी मान लेते हैं कि राज्य सरकारों द्वारा लिए गए लोनों पर भी भारत सरकार ही ब्याज भरती है, तब भी तो कुल विदेशी ब्याज लगभग एक लाख करोड़ रुपए ही तो पहुंच पाता है। यह तो कुल बजट का लगभग 2.5 % (ढाई प्रतिशत) ही हुआ।
तो सवाल अब भी वही रहता है कि भारत सरकार के बजट का लगभग 22.5% कौन से मद में जाता है। क्यों न इसको शिक्षा व स्वास्थ्य पर खर्च किया जाए। क्यों न देश के आम लोगों को बेहतर शिक्षा व स्वास्थ्य दिया जाए ताकि GDP भी कई गुना बढ़ जाए।

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