Home विषयइतिहास भीष्म पितामह तो फिर भी धर्म अधर्म की

भीष्म पितामह तो फिर भी धर्म अधर्म की

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अब जब इतिहासकार , विचारक , कवि ,लेखक , आलोचक , चिंतक , अर्थशास्त्री , प्रशासनिक अफ़सर , पुलिस अफ़सर , सिपाही , दारोगा , वकील , जस्टिस और चीफ़ जस्टिस आदि-इत्यादि तक पार्टी तथा विचारधारा की पहचान से देखे और जाने , जाने लगे हैं तो किस की बात पर कैसा भरोसा करें यह समझ पाना कई बार मुश्किल ही नहीं , बहुत मुश्किल हो जाता है । अब रघुराम राजन अगर कह रहे हैं कि नोटबंदी और जी एस टी ने देश की आर्थिक विकास की गति पर ब्रेक लगा दिया है तो आंख मूंद कर उन की बात को मान लें कि उन्हें कांग्रेसी मान कर उन की बात को ख़ारिज कर आगे बढ़ जाएं , समझ में नहीं आता । अब मैं अर्थशास्त्री नहीं हूं न ही अर्थशास्त्र का क ख ग जानता हूं । इस लिए भी कि जब पढ़ता था तो सुनता था कि अर्थशास्त्र वह शास्त्र है , जो शास्त्रों का शास्त्र है । तो अर्थशास्त्र से बहुत डर भी लगता है । गो कि मेरी बड़ी बेटी अर्थशास्त्र की आचार्य है और गिरी विकास इन्स्टीट्यूट में काम भी कर चुकी है । तो भी नोटबंदी और जी एस टी से देश की आर्थिक गति पर क्या असर पड़ा यह साफ कह पाना मेरे लिए बहुत कठिन है । लेकिन यह तो बता ही सकता हूं कि नोटबंदी के फेर में ढेर सारे भ्रष्ट लोगों को बरबाद होते अपनी आंखों से देखा है । उन का लाखो , करोड़ो रुपए पानी होते देखा है । अभी भी देख रहा हूं । सोने और शेयर से भी मंहगे रियल स्टेट को जो काले धन का सरताज रहा था , कबाड़ होते देखा है । तो कैसे कह दूं कि नोटबंदी ग़लत थी । स्पष्ट मानता हूं कि नोटबंदी ने नंबर दो के कारोबार पर सीधी चोट मारी है । बहुत कड़ी चोट । इतनी कि लोग खुल कर सहला भी नहीं पा रहे ।
आप मत मानिए इस तथ्य को आप की अपनी कोई विवशता या प्रतिबद्धता होगी , मोतियाबिंद होगी , उसे आप जानिए । रही बात जी एस टी की तो इस में बरबाद बेईमान दुकानदार भी हमारे सामने हैं । काश कि जी एस टी पेट्रोल , डीजल पर भी लागू होती तो मुझे भी इस का सीधा लाभ मिलता। बाक़ी जो बात महत्वपूर्ण बात है इस आर्थिक व्यवस्था की वह यह कि मनमोहन सिंह की सरकार ने बताया था कि उन की सरकार सिर्फ़ अमीरों की सरकार है । नरेंद्र मोदी सरकार ने मनमोहन सरकार से दो क़दम आगे जा कर बताया है कि है तो यह सरकार भी अमीरों की ही लेकिन गरीबों की विरोधी भी है । गरीबों को सिर्फ़ भिखारी बन कर , आरक्षण की कृपा पर रहने का अधिकार है । सम्मान से रहने का अधिकार सिर्फ़ धनपशुओं को है , गरीबों को नहीं । या तो उज्ज्वला , मनरेगा , आरक्षण , अनाज आदि के लिए गरीबी रेखा के नीचे जी कर भिखारी बनना सीखिए या फिर चोरी-चमारी कर के सही धनपशु बनना सीखिए । बीच के लिए कोई जगह नहीं है इस देश में । है तो सिर्फ़ नरक जीने के , अनाप-शनाप टैक्स के बोझ में दब कर जीने के लिए ।
बाक़ी रघुराम राजन जैसे अर्थशास्त्री या रोमिला थापर , इरफ़ान हबीब जैसे इतिहासकार सिर्फ़ जनता को भ्रमित करने वाले राजनीतिक पुतले हैं । यह भी जान लेने में हर्ज नहीं है । यह सभी बेईमान झूठे और मक्कार लोग हैं । आज की तारीख़ में ज़्यादातर विशेषज्ञ झूठे , मक्कार और कमीने लोग ही हैं । डिक्टेशन पर काम करने वाले , एजेंडा पर चलने वाले लोग हैं । एक समय था कि मैं ही यह कहते नहीं अघाता था कि देश का सौभाग्य देखिए कि एक ईमानदार वैज्ञानिक डाक्टर ए पी जी अब्दुल कलाम हमारे देश का राष्ट्रपति है और एक ईमानदार अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह देश का प्रधान मंत्री। राष्ट्रपति कलाम ने तो देश का सिर कभी नीचा नहीं होने दिया , फख्र से विदा हुए अपने पद से भी और दुनिया से भी । लेकिन एक ईमानदार अर्थशास्त्री और प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने देश का सिर बार-बार नीचा किया । जैसी विकराल और अराजक मंहगाई मनमोहन सिंह ने परोसी देश को एक अर्थशास्त्री होने के बावजूद वह तो अजब थी । काजू के दाम दाल बिकने लगी , काजू सोने के दाम और आटा के दाम भूसा , आटा दाल के दाम । त्राहिमाम कर के रह गया पूरा देश पर मनमोहन सिंह के चेहरे पर शिकन नहीं आई कभी । उन के कृषि मंत्री शरद पावर तो ऐलान ही करते रहते थे कि अब दूध के दाम बढ़ने वाले हैं , अब चीनी के दाम बढ़ने वाले हैं , अब प्याज के , अब टमाटर के । आदि-आदि । भ्रष्टाचार के भी जो कीर्तिमान मनमोहन सिंह ने बनाए वह भी न भूतो , न भविष्यति ।
कांशीराम एक समय कहा करते थे कि भाजपा कांग्रेस की बी टीम है । तब के दिनों मैं उन से सहमत नहीं था । पर नरेंद्र मोदी सरकार की आर्थिक नीतियां कांग्रेस से किसी भी तरह अलग नहीं हैं , इतर नहीं हैं तो मुझे भी अब यह मान लेने दीजिए कि भाजपा , कांग्रेस की बी टीम है । मनमोहन सिंह सरकार के नक्शेकदम पर चलते हुए मंहगाई मोदी सरकार की भी यार है , भ्रष्टाचार भाजपा सरकार की भी हमसाया है । नोटबंदी , जी एस टी के गिमिक अपनी जगह हैं , जनता से सरकारों की दुश्मनी अपनी जगह है । आप रोते रहिए , भ्रष्टाचार , मंहगाई , बेरोजगारी , कश्मीर , पाकिस्तान । शहीदों को सैल्यूट मारते रहिए और रोते रहिए । सरकार इन की हो या उन की , सैनिक शहीद होते रहेंगे , मजा अंबानी , अडानी आदि ही मारेंगे ।
अब ऐसा भी नहीं है कि भाजपा ने आर्थिक नीतियों में कांग्रेस को फालो किया है तो कांग्रेस ख़ामोश है । कभी रही होगी भाजपा कांग्रेस की बी टीम पर अब कांग्रेस , भाजपा की बी टीम हो चुकी है । यकीन न हो तो कांग्रेस का ग्राम पंचायतों को गौ शाला को अनुदान देने वाला मध्य प्रदेश का ताज़ा मेनीफेस्टो बांच लीजिए । पारसी राहुल गांधी का ब्राह्मण बनना और यज्ञोपवीत पहन कर , मंदिरों की परिक्रमा देख लीजिए । इस लिए भी कि राजनीतिक दल कोई भी हो येन केन प्रकारेण सत्ता चाहिए , पूंजीपति को पैसा । सत्ता के लिए अपना पिछवाड़ा भी आप को परोस देंगे । फिर जनता इन के लिए कोल्हू का वह मीठा गन्ना है जिसे चुनाव के कोल्हू में पेर कर इन्हें सत्ता और पैसे का रस चाहिए , बस । मंदिर-मस्जिद कर के मिले , चाहे बोफोर्स , टू जी , कोयला , राफेल आदि कर के मिले । तेरी आंख फोड़ कर मिले चाहे उस की आंख फोड़ कर , जैसे भी हो बस सत्ता मिलनी चाहिए । नोटबंदी और जी एस टी के झुनझुने से मिले या गाय का मांस खा कर या गौ शाला को अनुदान दे कर । कौन भला और क्या कुछ अपनी जेब से देना है किसी को । अपनी जेब से देना होता तो दर्द समझ में आता । फ़िलहाल तो उन्हें आप ही की जेब से आप को देना है । सो रोज बीस ठो ताजमहल लीजिए। घर बैठे लीजिए ।

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