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रूस के पूर्व प्रधानमंत्री मिखाइल कस्यानोव …

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रूस के पूर्व प्रधानमंत्री मिखाइल कस्यानोव जो रूस के प्रधानमंत्री तब थे जब पुतिन पहली बार रूस के राष्ट्रपति बने थे। जब पुतिन रूस के प्रधानमंत्री थे तब मिखाइल कस्यानोव उनके वरिष्ठ उप-प्रधानमंत्री थे। पुतिन के प्रधानमंत्री रहते हुए मिखाइल कस्यानोव रूस के वित्त मंत्री भी रह चुके हैं। जाहिर है कि मिखाइल कस्यानोव पुतिन के नजदीकी सहयोगियों में से रहे हैं।
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मिखाइल कस्यानोव के अनुसार पुतिन अब वह पुतिन नहीं रहे हैं, पूरी तरह से बदल गए हैं। पूरे रूस में लोगों के सामने झूठा प्रोपागंडा फैला रखा है। पुतिन यूक्रेन पर हमला करने के समय सोचते थे कि रूस कुछ दिनों में यूक्रेन पर कब्जा कर लेगा, लेकिन दो महीने से अधिक हो चुके हैं, रूस को जीत नहीं मिली है। यूक्रेन में अभी तक आम लोगों का जन-संहार करने के अलावा कुछ भी ऐसा नहीं हो पाया है जिसे पुतिन यूक्रेन पर जीत के रूप में प्रस्तुत कर सकें।
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आर्थिक प्रतिबंधों के चलते रूस की आर्थिक स्थिति लगातार बहुत खराब होती जा रही है। रूस ने जो लोन ले रखे हैं, उनकी ईएमआई वापस करने की अंतिम तिथि नजदीक आती जा रही थी, प्रतिबंधों के कारण, पुतिन नहीं चाहते थे कि पेमेंट यूरो में करना पड़े, पुतिन चाहते थे कि पेमेंट रूबल में हो। इसलिए दबाव डालने के लिए पुतिन ने कई पैतरें आजमाए, गैस सप्लाई बंद करना या गैस का पेमेंट रूबल में मांगना इत्यादि-इत्यादि कई पैतरें आजमाए।
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लेकिन पुतिन के कोई पैतरे काम नहीं आए और पुतिन को पेमेंट यूरो में ही करना पड़ा।
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मिखाइल कस्यानोव का कहना है कि पुतिन यूक्रेन में जो कर रहे हैं, वह सरासर गलत है, किसी भी तरह से जस्टिफाई नहीं किया जा सकता है।
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रूस की मीडिया आजकल परमाणु युद्ध की बात चीखते चिल्लाते कर रही है, जैसे तीसरी दुनिया के कई देशों की कठपुतली मीडिया विभिन्न मुद्दों पर प्रोपागंडा करते हुए चीखती चिल्लाती रहती है। रूस की मीडिया ऐसे बता रही है मानो रूस दुनिया की इकलौती परमाणु शक्ति है और दुनिया थर-थर कापेंगी।
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मेरा तो कहना है कि इन टुच्चों व लंपटों को कोई तो समझाओ कि परमाणु युद्ध शुरू होने के एक दो दिनों के अंदर ही क्या रूस क्या अमेरिका क्या योरप क्या भारत क्या चीन। सबकी ऐसी तैसी हो जानी है।
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बिना परमाणु हथियारों के युद्ध में तो रूस को यूक्रेन को हरा पाना ही नहीं है, रूस से सटे हुए एकाध इलाके भले ही कुछ समय के लिए कब्जा लें, जिस तरह से दुनिया भर से यूक्रेन को सहयोग मिल रहा है, यूक्रेन आज नहीं कल वे इलाके भी छुड़वा ही लेगा।
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पुतिन की जो जिद थी कि यूक्रेन नाटो व यूरोपियन यूनियन का सदस्य नहीं बने। तो जिस तरह से नाटो व यूरोपियन यूनियन यूक्रेन के साथ खड़े हैं। केवल सीधे युद्ध को छोड़कर बाकी तो पूरा सहयोग यूक्रेन को मिल ही रहा है। यूक्रेन तो एक तरह से नाटो व यूरोपियन यूनियन का सदस्य तो हो ही चुका है।
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मेरी तो समझ नहीं आता है कि इतना नरसंहार, नीचता, बर्बरता, क्रूरता, धूर्तता, झूठ, फरेब इत्यादि करके पुतिन को आखिर हासिल क्या हुआ है। अब तो पुतिन अपने अहंकार की लड़ाई लड़ रहा है।
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मैंने युद्ध की शुरुआत में ही कहा था कि पुतिन की हालत ऐसी होनी है कि न उगल पाएंगे न निगल पाएंगे। शेर की सवारी करने जैसा है, चढ़ तो गए हैं, उतरेंगे कैसे।
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फेसबुक में लोग मजाक उड़ा रहे थे कि अमेरिका ने चढ़ाकर सीढ़ी खींच ली। और भी पता नहीं क्या-क्या। बहुत लोग बता रहे थे कि यूक्रेन पर रूस कुछ दिनों में ही कब्जा कर लेगा। जेलेंस्की को गरियाते थे।
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जब मैं कहता था कि इंतजार कीजिए। नाटो व यूरोपियन यूनियन ने यूक्रेन को धोखा नहीं दिया है। अमेरिका व योरप दुनिया को परमाणु युद्ध से बचाना चाहते हैं, इसलिए अपनी ओर से रूस को बहाना नहीं देना चाहते हैं। मैं कहता था कि एक बार यूक्रेन में सहयोग पहुंचना शुरू होने दीजिए, फिर देखिएगा।
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समय के साथ पुतिन की खीझ बढ़ती चली गई, यूक्रेन के आम लोगों की हत्याएं शुरू कर दी गईं, एक से बढ़कर एक झूठे प्रोपागंडा रचे जाने शुरू किए गए जिससे रूस की नीचता को यूक्रेन के कांड बताए जाएं।
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मैंने कहा था कि यूक्रेन का आम आदमी साहस के साथ लड़ रहा है। दुनिया के अनेक देशों के आम लोग यूक्रेन के आम लोगों के साथ खड़े होंगे। खड़े हुए। और तो और जिस रूस को बड़े से बड़े हैकर्स ग्रुप छूने से डरते थे। हैकर्स ने रूस की बैँड बजा रखी है, जबकि ये लोग वालंटियर्स हैं, ऐसा करने के लिए इनको कोई फंड नहीं दे रहा है। इन लोगों का कहना है कि रूस जो कर रहा है वह गलत है, रूस ऐसा करना बंद कर दे, हम लोग भी बंद कर देंगे।
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दुनिया के केवल वही लोग पुतिन के साथ हैं, जिनकी मानसिकता ही हत्यारी है या जिनको साम्यवाद की समझ नहीं है और इन लोगों के लिए साम्यवाद का मतलब चीन व रूस की सत्ताएं हैं या जिन लोगों को अंतर्राष्ट्रीय मामलों की समझ नहीं हैं (भले ही खुद को स्वयंभू बड़का विद्वान व विशेषज्ञ मानते हों) या रूस के अंदर रहते हैं इसलिए पुतिन की मीडिया के प्रोपागंडा का शिकार होकर या कार्यवाही होने के डर के कारण या पुतिन को मक्खन लगाने के कारण।
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पुतिन के कारण रूस की स्थिति ऐसी हो गई है कि परमाणु युद्ध होता है तो दुनिया ही नष्ट होनी है, खुद रूस भी। नहीं होता है तब भी रूस की ऐसी तैसी होनी है, पुतिन के कारण रूस की साख इतनी गिर चुकी है कि रूस की स्थिति 1900 के लगभग के समय की हो जानी है। इधर हो या उधर रूस की छीछालेदर तो होना तय ही है।
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यूक्रेन को तो दुनिया मिलजुलकर कुछ वर्षों में सजा-सवांर लेगी। रूस का क्या होगा। लेकिन युद्ध को जस्टिफाई करते रहने के लिए रूस के अंदर स्थितियों को जबरिया गिरने से बचाए रखा जाने का ढोंग किया जा रहा है, युद्ध खतम होने के बाद जब स्थितयां धड़ाम से गिरेंगी, तब आम लोगों की स्थिति बहुत बुरी होनी है। बहुत दुखद व भयावह है।
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विवेक उमराव

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