Home अमित सिंघल सनातन समाज केवल पूंजीवादी व्यवस्था में फल-फूल सकता है ।

सनातन समाज केवल पूंजीवादी व्यवस्था में फल-फूल सकता है ।

अमित सिंघल

by अमित सिंघल
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#TheKashmirFiles  को सुपर हिट का स्टेटस मिल चुका है। संभव है कि यह मूवी भारतीय सिने जगत के सभी रिकॉर्ड धवस्त कर दे।
सत्या फिल्म के निदेशक राम गोपाल वर्मा ने ट्वीट किया कि कश्मीर फाइल्स ने अपने दम पर या पैरो से निम्नलिखित मिथकों पर लात मार दी है। प्रथम, केवल बड़े सितारे ही लोगों को सिनेमाघरों में ला सकते हैं। द्वितीय, केवल मेगा बजट लोगों को सिनेमाघरों में ला सकता है। तृतीय, केवल कपिल शर्मा शो लोगों को सिनेमाघरों में ला सकता है। अंत में, केवल सुपरहिट गाने ही लोगों को थिएटर की ओर आकर्षित कर सकते हैं।
#TheKashmirFiles की सफलता एवं बिज़नेस को देखकर कई लोग कह रहे है कि लाभ की राशि कश्मीरी हिन्दुओ के कल्याण के लिए दान कर दी जाए। कुछ भाजपा समर्थक इस फिल्म को हरयाणा के एक पार्क में फ्री में दिखाना चाहते थे जिसका विरोध इस फिल्म के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने किया है। उन्होंने ट्वीट किया कि राजनीतिक नेताओं को रचनात्मक व्यवसाय और सच्चे राष्ट्रवाद का सम्मान करना चाहिए और समाज सेवा का अर्थ है कानूनी और शांतिपूर्ण तरीके से टिकट खरीदना। अगर किसी को फिल्म फ्री में दिखानी है तो वह स्वयं ऐसे लोगो के लिए अपने पैसे से सिनेमा हाल बुक कर देंगे।
यहीं पर सनातन समाज की दुर्बलता एवं संघर्ष का रहस्य छुपा है।
दाऊद गैंग की फिल्मो में सनातनी परंपरा का मजाक इसलिए उड़ाया जाता था क्योंकि ऐसी फिल्मो को व्यावसायिक सफलता मिलती थी। इन फिल्मो में सनातन समाज को चोर, कपटी, लालची, व्यसनी दिखाया जाता था क्योंकि हम लोग इन फिल्मो को करोड़ो का बिज़नेस करवा देते थे।
PK में आमिर खान अपने ब्रीफ़केस पर हिन्दू देवी-देवताओं की फोटो चिपका देता है और फिर एक सीन में ब्रीफ़केस भूमि पर रखकर दीवार पर मूतने लगता है। अगर गलती से हिन्दू समाज संकेत को ना समझ पाए तो अगली सीन के एक क्लोज अप में उसका मूत ब्रीफ़केस के बगल से, देवी-देवताओं की फोटो को लगभग छूता हुआ, बह रहा है।
यह मेरी मूर्खता थी कि मैंने इसकी अगली फिल्म दंगल हाल में देख ली। लेकिन पिछले पांच वर्षो से अब ऐसे लोगो की कोई फिल्म नहीं देखी, ना ही देखूंगा। इसी कारण से मैंने छपाक, थप्पड़ इत्यादि फिल्में भी नहीं देखी क्योंकि इनके कलाकारों ने देशतोड़क शक्तियों का समर्थन किया था।
कारण यह है कि दाऊद गैंग की फिल्मो की बॉक्स ऑफिस पर असफलता ही इन्हे बिज़नेस से बाहर कर देगी।
अब मैं मुख्य विषय पर आता हूँ।
कश्मीर फाइल्स की व्यावसायिक सफलता का स्वागत कीजिये। यह सफलता पूंजीवादी व्यवस्था के कारण मिली है; हमारे एवं आपके पैसे से। प्रोडक्ट अच्छा है; आम जनता का भावनात्मक जुड़ाव है; अतः लोग पैसा खर्च कर रहे है।
अगर समाजवाद होता तो यह फिल्म कभी बन ही नहीं पाती, सफलता तो दूर की बात है। समाजवादियों ने तो इस फिल्म को असफल बनाने का कोई प्रयास नहीं छोड़ा।
यह आवश्यक है कि सनातन मूल्यों पर, सनातन त्रासदी पर बनने वाली फिल्मो को पूंजीवादी व्यवस्था से बल मिले। क्योंकि कश्मीर फाइल्स की सफलता ना केवल विवेक अग्निहोत्री को, बल्कि ऐसे अन्य निर्माताओं को उन विषयो पर फिल्में बनाने के लिए प्रेरित करेगी जिन्हे अभी तक सामने नहीं लाया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी स्वयं इस ओर इशारा कर चुके है जब उन्होंने कहा कि विभाजन की असली त्रासदी को अभी भी सिनेमा स्क्रीन पर नहीं लाया गया है। इसी प्रकार डायरेक्ट एक्शन डे, मोपलाह इत्यादि के नरसंहार को भी सामने लाना चाहिए।
सनातन समाज केवल पूंजीवादी व्यवस्था में फल-फूल सकता है । अन्य व्यवस्थाओ को “हुकूमत” का सहारा चाहिए और लोकतंत्र में वह सहारा समाजवाद के नाम पर दिया जाता है।
अतः यह भी आवश्यक है कि कश्मीर फाइल्स को पैसा देकर देखे और दिखाए। साथ ही, विवेक अग्निहोत्री पर किसी भी प्रकार के परोपकार या दान का दबाव ना डाले।
क्या अग्निहोत्री कश्मीर फाइल्स को बनाने से भी बड़ा परोपकार कर सकते है?
#TheKashmirFiles से मिले लाभ से ही अग्निहोत्री अन्य ज्वलंत विषयो पर फिल्म बनाएंगे; वह भी और अधिक लाभ की आशा में।
हमारे लिए यही पर्याप्त होना चाहिए।

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