Home राजनीति टुकड़े टुकड़े सोच की धार वही ढाल नई – पेरियार। प्रारब्ध

टुकड़े टुकड़े सोच की धार वही ढाल नई – पेरियार। प्रारब्ध

लेखक - आर ए एम देव

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टुकड़े टुकड़े सोच की धार वही, ढाल नई – पेरियार।
आजकल कई सोशल ग्रुप्स में कई सारे हरियल,पेरियार का झण्डा उठाए लिख रहे हैं। यही टाइप पहले डॉ आंबेडकर को अपने झंडे पर लगाए हुए थे। जय भीम जय मीम का नारा इसी सोच की उपज थी।
अब चूंकि जय भीम जय मीम के नारे से फायदा सिर्फ हैदराबादी रजाकार गिरोह को होता है, अन्य अलगाववादी हरियल अब पेरियार को उत्तर भारत में प्रचारित करने में लगे हैं। क्योंकि उत्तर भारत के हमारे दलित बन्धवों के लिए पेरियार एक नया विषय है तो काफी कुछ झूठ रेडीमेड परोसा जा सकता है।
हरियलों ने डॉ आंबेडकर का उपयोग कर देखा लेकिन डॉ आंबेडकर के हरियल गिरोह के दुष्टता को लेकर विचार स्पष्ट हैं, सार्वजनिक भी हैं । साथ साथ उनके उन दलित नेताओं से भी टकराव होने लगे जिनको हरियलों का मातहत होना मंजूर नहीं था। तीसरी बात, हरियलों का मूलत: दुष्ट वर्चस्ववादी स्वभाव कब तक कंट्रोल में रहता ? उनकी हवस और वहशीयत की शिकार भी हमारे दलित बंधु भगिनी ही होने लगे तो भेड़ियों की भेड़ की खयाल उतरने लगी थी।
इसलिए अब नए नायक की तलाश शुरू हुई और पेरियार पर पसंदगी उतारी गए है। वैसे इसका उपाय एक है, जहां भी हरियल पेरियार को ढाल बनाकर हिंदुओं को गालियां देता हुआ, फुट डालता हुआ मिले, और उसका उत्तर सभ्यता के दायरे में रहकर ही देना आवश्यक हो तो पसमन्दाओं के अशरफों की बराबरी पर प्रश्न करना शुरू करें।
पसमन्दाओं को कब सारे इदारों का मुखिया बनाओगे, यह मांग उठाओ,
कब पसमंदाओं देवबंद का मुख्य मौलाना बनाएंगे, क्या उनकी ज़िंदगी तबलीग करते चटाई पर सोने में ही गूजरनी है और कंदलवी ऐशों आराम में ?
और भी ईदारे हैं, जहां से बाहरी लुटेरों की जहनी गुलामी को उखाड़ना होगा।

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