Home विषयअपराधKiller Criminal and Suspect जब एसिड अटैक से प्रीती राठी ने दुनिया छोड़ी पर उम्मीद नहीं – देश का अधूरा इन्साफ

जब एसिड अटैक से प्रीती राठी ने दुनिया छोड़ी पर उम्मीद नहीं – देश का अधूरा इन्साफ

किलर अध्याय 4

by Praarabdh Desk
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यह मामला है दिल्ली की प्रीती राठी सन २०१३ का जिसका चुनाव नेवी हॉस्पिटल में एक नर्स के पद पर हुआ था और वो अपनी जॉब की पहली पोस्टिंग लेने के लिए ट्रेन से मुंबई जा रही थी उसके साथ उसके पिता भी थे उसी ट्रेन में एक और युवक भी था जिसने अपने चहरे को गमछे से ढक रखा था और सर पर टोपी लगाए हुए था वो ट्रेन में प्रीती को लगातार देखे जा रहा था

प्रीती अगली सुबह मुंबई के बांद्रा रेलवे स्टेशन पर उतरती है साथ में एक ट्रॉली बैग और पिताजी बगल में होते है प्रीती के उतरते ही वो लड़का भी उसी स्टेशन पर उतरता है जो दिल्ली से मुंबई रेलवे स्टेशन प्रीती का पीछा करते हुए आया था उस लड़के के हाथ में एक च्यवनप्राश का डिब्बा होता है इससे पहले प्रीती कुछ समझ पाती वो लड़का प्रीती के कंधो पर पीछे से हाथ रखता है तो प्रीती पलट के देखती है जैसे ही वो पलटती है वो लड़का एसिड से भरा हुआ च्यवनप्राश का डिब्बा प्रीती के ऊपर डाल देता है प्रीती बुरी तरह से झुलस जाती है प्रीती के पास ही एक और वह का लड़का समीर शेख भी होता है जब वो ये देखता है तो गमछा पहने उस लड़के को पकड़ने की कोशिश करता है अपने आपको छुड़ाने के चक्कर में उस एसिड की कुछ बूंदे समीर शेख के ऊपर गिर जाती है और लड़का जिसने प्रीती के ऊपर एसिड डाला था वहाँ से भाग जाता है

प्रीती बुरी तरह से एसिड से झुलस जाती है उसे तुरंत ही भाभा हॉस्पिटल मुंबई में एडमिट करवाया जाता है पर प्रीती काफी झुलस चुकी थी इतना की उसके गले की आवाज़ तक चली जाती है जिससे पुलिस को प्रीती अपना बयान लिखित में देती है यह मामला इतना भयंकर होता है की हर तरफ प्रीती को लेकर बात होने लगती है मुंबई पुलिस भी काफी कोशिश करती है मुजरिम को पकड़ने की लेकिन वो नाकामयाब रहती है इस घटना के कुछ दिन बाद प्रीती के घर पर पवन नाम के एक युवक का फोन आता है वो प्रीती का हाल चाल लेता है यह बात प्रीती की बहन अपने पिता को बताती है अब पुलिस का शक पंकज पर जाता है और पुलिस पवन को गिरफ्तार कर लेती है पवन के पकडे जाने के बाद
एक बार फिर सभी तरफ उसको सजा देनी के बात जोर पकड़ने लगती है पवन कुमार बी टेक का स्टूडेंट था और प्रीती से उसकी पुरानी जान पहचान थी

उधर प्रीती की हालत दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही थी अब उसे भाभा हॉस्पिटल से मसीना हॉस्पिटल रेफेर कर दिया जाता है ताकि उसका अच्छे से इलाज हो सके क्यूंकि प्रीती के इंटरनल ओर्गेंस धीरे धीरे काम करना बंद कर रहे थे अब वहाँ यानी मसीना हॉस्पिटल के डॉक्टर्स को लगने लगा था की हालत काफी बिगड़ रहे है इसलिए उन्होंने प्रीती को मसीना हॉस्पिटल से रेफेर कर बॉम्बे हॉस्पिटल भेज दिया ताकि प्रीती को अच्छा इलाज मिल सके यहाँ पर प्रीती के लिए देश के सबसे बेस्ट डॉक्टर्स की एक टीम बनायीं जाती है लेकिन डॉक्टर्स के लाख प्रयास के बाद भी हालत सुधर नहीं रहे थे बल्कि और बिगड़ते जा रहे थे अब प्रीती वेंटिलेटर सपोर्ट पर चली जाती है लेकिन डॉक्टर्स हार नहीं मानते है और प्र्रति को बचाने की पूरी कोशिश करते है एसिड अटैक के दो महीने बीत गए थे लेकिन प्रीती की हालत में कोई सुधार नहीं थी १ जून २०१३ को दिल की धड़कन रुकने की वजह से मौत हो जाती है

अब प्रीती के शव को दिल्ली लाया जाता है ताकि उसका अंतिम संस्कार हो सके लेकिन घरवाले सी बी आई से जांच हो बोलकर शव का अंतिम संस्कार करने को मन कर देते है लेकिन फिर सरकार द्वारा आश्वाशन मिलने के बाद प्रीती का अंतिम संस्कार किया जाता है अभी तक पुलिस के पास पवन कुमार के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं थे इसलिए प्रीती के पिता अमर सिंह राठी अपने माध्यम से पता लगवाते है की जिसको पुलिस ने पकड़ रखा है उस दिन उसके फ़ोन की लोकेशन मुंबई की नहीं थी बल्कि रोहतक थी अब पुलिस की नाकामयाबी का पता भी इसी बात से चलता है इसलिए अब प्रीती के पिता सी आई दी मुंबई से एक याचिका दायर करते है की मामले की जांच सीआइडी मुंबई के द्वारा की जाए कोर्ट उनकी याचिका मान लेता है अब इस मामले की की जांच सीआईडी करे।

सीआईडी सबसे पहले प्रीती के रिश्तेदारों का बयान लेती है और पता चलता है की प्रीती के ही पड़ोस में अंकुर नाम का एक व्यक्ति रहता था
जो प्रीती से एक तरफ़ा प्यार करता था उसने प्रीती को [प्रपोज़ भी किया था पर प्रीती ने मना कर दिया था और दूसरी तरफ प्रीती को नेवी हॉस्पिटल की नर्स की जॉब भी मिल गयी है इस बात के ताने भी अंकुर के घरवाले दे रहे थे जिससे उसके अंदर प्रीती से बदला लेने की भावना ने जन्म ले लिया था इसलिए पुलिस शक के बिना पर अंकुर को गिरफ्तार करती है तो देखती है की उसकी स्किन भी एसिड से जली हुयी थी
बाद में उसकी शिनाख्त समीर भी करता है और तो और अंकुर के फ़ोन की लोकेशन भी उस दिन केमुंबई की पायी जाती है पुलिस अब अंकुर को कोर्ट में पेश करती है जहाँ उसे फ़ासी की सजा सुनाई जाती है

अंकुर को अपने किये पर कोई अफ़सोस नहीं था वो कोर्ट में सबके सामने कोर्ट का फैसला आने के बाद भी है रहा था और अपने हाथ से विक्ट्री का साइन भी दिखाता है बाद में अंकुर हाई कोर्ट में याचिका दायर कर वहाँ से फ़ासी की सजा से बच जाता है और कोर्ट उसे सन २०१९ में अब उम्र कैद की सजा सुनती है अब इस वक़्त अंकुर अपने किये की सजा जेल में बिता रहा है लेकिन प्रीती के घरवाले बाद में आये इस फैसले से खुश नहीं है और अब वो अपनी याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करेगी

 

“यह सभी अपराध वास्तव में घटित हो चुके है और इनका विवरण विकिपीडिया और अन्य श्रोतो से लिया गया है इन अपराध को करने वाले अपराधियों को सजा दी जा चुकी है और कुछ मामलो में अभी फैसला आना बाकी है और मामला न्यायालय में है आप सब से निवेदन है की इनकी कहानियो को पढ़ कर इनकी प्रेरणा न ले”

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