Home विषयजाति धर्म बागेश्वर धाम के धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी का विवाद

बागेश्वर धाम के धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी का विवाद

आर ए एम देव

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बागेश्वर धाम के धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी के साथ विवाद जोड़े जा रहे हैं। कुछ स्टेज शो करनेवालों ने भी धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी द्वारा किये जानेवाले कर्मों के बारे में दावा किया है कि ये कोई ईश्वरी सिद्धियाँ नहीं हैं, वे भी ऐसा कर दिखा सकते हैं। कहाँ तक मैच कर पाए या कर पाएंगे यह विवाद का विषय है और बिना पूरी जानकारी के इस विवाद में पड़ना ठीक नहीं । अब रही बात माइंड रीडिंग की या दूसरे की सोच पकड़ने की तो यह एक लगभग सौ साल पुरानी पुस्तक है – Practical Mind Reading.यह पुस्तक नेट पर भी मिल जाएगी। किन्डल में फ्री है, पेपरबैक में 121 रुपयों की है। हार्डकवर 839/- इसके लेखक हैं विलियम वॉकर एटकिन्सन ।
एटकिन्सन महोदय की अन्य भी कई किताबें ढूँढने पर नेट पर मुफ़्त मिल जाएंगी। लेकिन सब से महत्व का मुद्दा आप की एकाग्रता और खुद में अडिग विश्वास का है, वो अगर आप के पास न हो तो ऐसी पुस्तकें केवल उलटी सुलटी चर्चा के काम आएंगी, जो काम उनसे लेना है वो आप से नहीं हो पाएगा। एटकिन्सन महोदय के अलावा अन्य भी कई लोगों ने कई और पुस्तकें लिखी हैं इस विषय में, जितनी ढूँढेंगे, मिलती रहेंगी।
यहाँ और एक महत्व का मुद्दा है जिसकी मैं बात हमेशा करते रहता हूँ। जिस तरह से लोगों की सोच को आंखोड़े बांधे पशु की तरह condition किया गया है, उन्हें क्या सोचना है यह मानो कंप्युटर की तरह मस्तिष्क में प्रोग्राम फ़ीड किया गया है कि आप स्वतंत्र बुद्धि से सोच ही नहीं सकते। और ये काम आर्टिफ़िशियल इंटेलीजंस और बड़ी कंपनियों द्वारा सोच समझकर किया जा रहा है।
योहान हारी (Johann Hari) नाम के विश्लेषक ने अपनी पुस्तक Stolen Focus: Why You Can’t Pay Attention में इसपर विस्तृत चर्चा की है, उनके विडिओ भी यू ट्यूब पर उपलब्ध हैं, Johann Hari से सर्च करें, ढेर सारा मसाला मिल जाएगा जो आप की नींद हराम कर सकता है।
विलियम वॉकर एटकिन्सन का 1932 में निधन हुआ, उस जमाने में एवं उसके बाद भी, याने चालीस एक वर्ष पहले इनके प्रयोगों से लोगों को परिणाम मिला करते थे ऐसा सुना था । तब लोगों में एकाग्रता का आज के जितना पतन नहीं हुआ था, आज दो मिनट भी एक विषय पर टिकना बहुतों के लिए मुश्किल हो गया है।
यह बात इतनी भयावह है कि मेरे एक मित्र ने बताया – वे खुद भारतीय शास्त्रीय संगीत के साधक हैं। शौकिया बाँसुरी वादक हैं और बाकायदा किसी गुरु के गंडाबंध शिष्य हैं। वे बोले कि मेरे लिए हैरत की बात थी कि मेरे लिए पौने घंटे से अधिक एक राग सुनना मुश्किल हो गया, वैसे तो मैं आधी रात तक चलती हुई महफिलें इन्जॉय करनेवाला व्यक्ति हुआ करता था। एकाग्रता और फोकस पर मेरी एक पुरानी पोस्ट पढ़कर उनका फोन आया था कि आप ने बिल्कुल सही लिखा है।
कुछ दिनों पहले मैंने जोसेफ मैकमोनिगल नामक व्यक्ति पर लिखा था जो इराक से अमेरिका के पहले युद्ध में सद्दाम हुसेन का माइंड पढ़ लेता था कि अगले 24 घंटों में सद्दाम क्या करने जा रहा है । यह जानकारी वो यू एस आर्मी के सेनानियों को देता था । उसने इस विधा पर पुस्तकें लिखी हैं उनका भी मैंने उल्लेख किया था । उसकी इस विधा द्वारा निकले परिणामों को बहुत हद तक सही पाए जाने से यू एस आर्मी का फायदा हुआ था और जोसेफ मैकमोनिगल की इस विधा के लिए उसे यू एस आर्मी ने Legion of Merit मेडल भी दिया था।
वैसे तो अमेरिका, रशिया आदि में इन विधाओं पर रिसर्च चलता रहता है और इस बात का मेरे पास ठोस सबूत नहीं लेकिन मुझे कोई आश्चर्य नहीं होगा अगर कम्युनिस्ट चीन में भी इन बातों पर जोरदार काम होता होगा। लेकिन ये सभी देश अन्य देशों में ऐसी बातों को अंधविश्वास साबित करने पर तुले रहते हैं। अमेरिका के तो इवेनजेलिस्ट्स (इसाई प्रचारक) भारत में चर्चों की चरस plant करने की मुहिम चलाते हैं

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