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सफाई कर्मचारी का वेतन

Umrao Vivek

by Umrao Vivek Samajik Yayavar
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दिसंबर 2018 की बात है, भारत की मीडिया में जोरशोर से यह बताया जा रहा था कि कैनबरा में तापमान 49 ℃ डिग्री से अधिक है त्राहिमाम मचा हुआ है, मेरे पास बहुत लोगों ने भारत के अखबारों की स्कैन कापी भेजी। जबकि सच्चाई यह है कि उस समय कैनबरा में हम लोग रजाई ओढ़ रहे थे, किसी-किसी दिन तो अधिकतम तापमान 20 ℃ डिग्री भी नहीं पहुंच रहा था।
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मानसिक दीवालिएपन की स्थिति यह है कि खुद को बड़का पत्रकार मानने वाले लोग गूगल पर सर्च करते हैं, कोई ऐसी बात दिखी जो भारत के पाठकों के लिए चटपटी हो, तो उसकी हेडिंग देखकर ही अपने मन से मनगढ़ंत खबर बनाकर परोस देते हैं। एक ने परोसी तो दूसरा भी देखादेखी चिपकाना शुरू कर देता है। इतनी भी अंग्रेजी नहीं आती है, इतनी भी मेहनत नहीं करते हैं कि जिस खबर की हेडिंग लेकर उड़ लिए हैं, वह हेडिंग के अंदर क्या लिखा है या उससे जुड़ी बातों को समझने के लिए कुछ और भी दस्तावेजों का अध्ययन कर लें या अनेक अन्य मामलों में यही देख लें कि जिस वेबसाइट से माल उड़ा रहे हैं, उसका अपना स्तर क्या है, क्या आथेंटिसिटी है।
यही मानसिक दीवालियापन स्वीपर की खबर के संदर्भ में भी है। भारत से कुछ मित्रों ने जानना चाहा है, तो मुझे लगा कि एक लेख ही लिख दूं ताकि बहुत दूसरे लोगों तक भी कुछ जानकारी पहुंच जाए। कई मित्र तो कह रहे हैं कि विवेक भाई बस किसी तरह ऑस्ट्रेलिया आने का जुगाड़ करवा दो, कुछ नहीं तो स्वीपर की ही नौकरी कर लेंगे। आइए इस संदर्भ में तथ्यों को कुछ जानते समझते हैं।
पहली बात यह कि ऑस्ट्रेलिया में कार्य-सप्ताह 48 या 40 घंटे का नहीं, बल्कि 38 (अड़तीस) घंटे का होता है, लगभग साढ़े-सात घंटे का दिन होता है और पांच दिन का कार्य-सप्ताह होता है। यदि लगभग साढ़े-सात घंटे से अधिक काम किया, सप्ताह में 38 घंटे से अधिक काम किया तो उसको ओवरटाइम माना जाता है और दुगुना वेतन देना पड़ता है। यह भी तय है कि एक दिन में अधिकतम इतने घंटे, सप्ताह में अधिकतम इतने घंटे से अधिक काम लिया ही नहीं जा सकता है भले ही वेतन दस गुना कर दिया जाए। शनिवार, रविवार को मिलाकर जितने भी पब्लिक हालीडेज होते हैं, यदि कोई पब्लिक हालीडेज के दिनों में काम करता है तो उसको लगभग दुगुना वेतन मिलता है।
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दूसरी बात यह कि ऑस्ट्रेलिया में श्रम अच्छी तरह से परिभाषित है, यदि किसी काम में मानवश्रम जुड़ गया तो उसकी कीमत बढ़ जाती है। मशीन से बनाई वस्तुएं बहुत सस्ती, लेकिन मानव श्रम से बनाई वस्तुएं बहुत महंगी रहती हैं।
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भारत में टैक्सी किराए पर लीजिए, ड्राइवर गाड़ी के साथ मुफ्त आता है। ऑस्ट्रेलिया में टैक्सी किराए पर लीजिए तो टैक्सी का किराया लगभग उतना ही पड़ेगा जितना भारत में होता है और सस्ता ही रहता है। मर्सिडीज वगैरह भी 4-5 हजार रुपए से 24 घंटे के लिए किराए पर मिल जाती हैं, चाहे जितना चलाइए (किलोमीटर की कोई सीमा नहीं)। लेकिन यदि आपने ड्राइवर भी चाहा तो आपको कार के किराए के अलावा ड्राइवर का वेतन लगभग 3 से 5 हजार रुपए प्रति घंटे की दर से देना पड़ेगा, 7.5 घंटे से अधिक होने पर यही 6 से 10 हजार रुपए घंटा वेतन हो जाएगा। आप कार चलवाइए या न चलवाइए, ड्राइवर यदि आपके साथ है तो उसका मीटर चालू रहेगा। लगा लीजिए हिसाब कि ड्राइवर के साथ कार किराए पर लेने पर कितना खर्चा बैठेगा।
दो बाते हैं। आप स्थाई तौर पर कहीं काम करते हैं या घंटे के हिसाब से काम करते हैं (मतलब जब आपका मन होगा तब ही काम करेंगे नहीं तो मौज करेंगे, मतलब कोई स्थाई बंदिश नहीं)। आइए इस बात को समझते हैं।
भारत में IIT का बहुत नाम है, खूब हव्वा रहता है, जिनके भी लड़के बच्चों का IIT में प्रवेश हो जाता है वे इतराए घूमते हैं। IIT से पढ़े लौंडे खुद को दुनिया का बादशाह मानते हैं, दूसरों को हिकारत से देखते हैं। तो यही IIT से बीटेक व एमटेक किए जो नए रंगरूट यहां आते हैं तो उनका शुरूआती वेतन भी तीन लाख रुपए से लेकर साढ़े-तीन लाख रुपए महीना तक होता है। जो रंगरूट IIT से नहीं भी पढ़े होते हैं, भारत के सड़ियल से सड़ियल प्राइवेट संस्थान से भी पढ़े होते हैं, लेकिन यदि वे भी यहां आने लायक योग्यता रखते हैं तो उनका भी शुरुआती वेतन तीन लाख रुपए से लेकर साढ़े-तीन लाख रुपए महीना तक होता है। कोई भेदभाव नहीं। आपकी योग्यता मायने रखती है, आप किस धर्म में पैदा हुए हैं, किस जाति में पैदा हुए हैं, किस संस्थान से पढ़े हैं, कितना नंबर लाए हैं, इसका कोई मतलब नहीं। आप वास्तव में कितने योग्य हैं, इसका मतलब होता है।
इसलिए यदि आप वास्तव में योग्य हैं, आपमें काबिलियत है तो कोशिश कीजिए कि विकसित देशों में जाने का कोई रास्ता मिल जाए। आप सामंती मानसिकता व संस्थानों की जातीय श्रेष्ठता के घिनौने-शोषण से बाहर आ सकते हैं, खुली हवा में सांस ले सकते हैं।
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स्वीपर, ड्राइवर, इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर, खानसामा, वेटर इत्यादि यदि स्थाई नौकरी करते हैं तो इन लोगों का शुरुआती वेतन लगभग सवा-दो लाख से पौने-तीन लाख रुपए महीना होता है। ट्रक ड्राइवर का शुरुआती वेतन लगभग तीन लाख रुपए महीना होता है। कुछ विशेष प्रकार के ट्रकों के ड्राइवरों का वेतन 15 से 20 लाख रुपए महीना या अधिक भी होता है (बहुत कंपनियों के CEOs का भी इतना वेतन नहीं होता है)।

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यदि आप स्थाई नहीं हैं, घंटे के हिसाब से काम करते हैं, तब आपको घंटे के हिसाब से वेतन अधिक मिलता है, क्योंकि यह जरूरी नहीं कि आप रोज साढ़े-सात घंटे का काम पाए हीं, हर हफ्ते 38 घंटे का काम पाएं ही, हर महीने हर हफ्ते काम पाएं ही। मतलब यदि आप फ्री-लांस हैं तो आपका प्रति घंटा वेतन अधिक रहता है। स्थाई कर्मचारियों के प्रति घंटे के वेतन की तुलना में फ्री-लांस वालों का प्रति घंटे वेतन दो-तीन या अधिक गुना अधिक रहता है।
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अब आते हैं, स्वीपर वाली बात पर। ऑस्ट्रेलिया में जाति तो होती नहीं कि कोई किसी जाति विशेष में पैदा हो गया तो स्वीपर का काम करेगा। ऑस्ट्रेलिया में स्वीपर का काम भी रिफाइंड होता है, कूड़ा उठाने वाला भी कार में आता है, हवाई जहाज में यात्रा करता है, विदेशों में पर्यटन करने जाता है, फाइव-स्टार होटलों में रुक सकता है, ब्रांडेड कपड़े पहनता है करोड़ों के अच्छे घर में रहता है।
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अधिकतर फ्री-लांस स्वीपर वे लोग होते हैं जो या तो गैर-कानूनी तौर पर घुसपैठिए होते हैं उनके पास कोई खास स्किल नहीं होती है लेकिन मानवीय आधारों पर यहां का कानूनी निवासी का स्टेटस दे दिया जाता है या फिर विदेशों से उच्चशिक्षा प्राप्त करने आने वाले छात्र लोग। छात्र लोग अपना खर्चा निकालने के लिए फ्री-लांस या पार्ट-टाइम काम कर लेते हैं।
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घुसपैठियों के संदर्भ में ऑस्ट्रेलिया लगातार सख्त होता आया है। कोविड के कारण विदेश से आकर पढ़ने वालों की संख्या कम रही है। और भी कारण हैं, जिसके कारण ऑस्ट्रेलिया के कुछ बड़े शहरों में कुछ विशेष इंडस्ट्रीज में स्वीपिंग का काम करने वालों की संख्या घटी है। तो आकर्षित करने के लिए फ्री-लांस स्वीपिंग का काम करने वालों का प्रति घंटा वेतन बढ़ा कर दिया जा रहा है। इसका मतलब यह नहीं है कि स्थाई कर्मचारियों का वेतन दस लाख रुपए महीना या दस करोड़ साल कर दिया गया है। कुछ शहरों के कुछ इलाकों के कुछ व्यापारों में ही ऐसा हुआ है, ऑस्ट्रेलिया के हर शहर में ऐसा हुआ है ऐसा नहीं है।
आशा करता हूं कि कई संदर्भों में कुछ अंदाजा लग ही गया होगा।
आपकी जानकारी के लिए। ऑस्ट्रेलिया में गरीबी रेखा एक लाख रुपए महीना प्रति वयस्क व्यक्ति है। ऑस्ट्रेलिया में न्यूनतम वेतन लगभग 2 लाख रुपए महीना है, यदि कोई महीना भर काम करता है, अड़तीस घंटे हर सप्ताह (शनिवार रविवार को छुट्टी), तो उसे कम से कम लगभग दो लाख रुपए मिलना ही मिलना है, कोई हीला हवाली नहीं।
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ऑस्ट्रेलिया केंद्र सरकार के सबसे निचले स्तर के नॉन-ग्रेजुएट कर्मचारी के वेतन की शुरुआत लगभग ढाई लाख रुपए महीना से होती है (गरीबी रेखा से केवल लगभग ढाई गुना, तथा न्यूनतम वेतन से कुछ अधिक)। ऑस्ट्रेलिया केंद्र सरकार के सचिव लोगों का वेतन कम अधिक लगभग 50 लाख रुपए महीना होता है।

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