Home लेखकMann Jee ब्रज इतिहास भाग -2

ब्रज इतिहास भाग -2

Mann Ji

by Mann Jee
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लोदी काल के बाद बाबर और हुमायुँ काल में ब्रज भूमि ने थोड़ी सांस ली और फिर से वैभवता की ओर कदम बढ़ाये। तथाकथिक सेक्युलर अकबर महान के समय मथुरा काजी अब्द उर रहमान ने अकबर के पास फरियाद लगायी – एक ब्राह्मण मथुरा में मंदिर पुनरुत्थार के लिए प्रतिबद्ध है । ये ब्राह्मण मस्जिदों के लिए जाने वाली निर्माण सामग्री खरीद रहा है और नबी की शान में गुस्ताखी भी कर रहा है। ब्राह्मण को दंड मिलना चाहिए । अकबर ने अबुल फज़ल को मथुरा भेजा और रपट तलब की।

अबुल फज़ल ने मथुरा जाकर छानबीन की और आरोप सही पाए । ब्राह्मण की समस्त संपत्ति जब्त कर ली गयी और उसे बंदी बना कर आगरा लाया गया । अकबरी दरबार में हिन्दू दरबारियों ने , बाकी हिन्दू लोगो ने अकबर से बहुत फरियाद की – ब्राह्मण को छोड़ दिया जाए लेकिन काजी और सदर ने उस ब्राह्मण का सर तन से जुदा कर दिया । अकबर को इस काण्ड से इतनी पीड़ा हुई कि काजी और सदर को कुछ ना कहा – उन्हें उनके पद से भी नहीं हटाया लेकिन उनको अपनी गुड बुक्स में से हटा दिया । ऐसा लिखा है अकबरी दरबारी मुल्ला बदायुनी ने।

औरंगजेब काल में खुद टोपी वाला बादशाह मथुरा पंहुचा और इस मंदिर को तोड़ने के लिए तैयार था । मासिर ऐ आलमगीरी में लिखा है – इस मंदिर के टूटने पर मजहब का परचम बुलंद हुआ , सनातन को गहरी चोट पहुंची , हिन्दू राजाओं के गले के नीचे पानी ना उतरा। खुदा का कहर बुतपूजको पर नाजिल हुआ और सब बुतो से स्वर्ण , चांदी और रत्नो नोच कर आगरा की मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे दफनाया गया ताकि ईमान वाले इन बुतो को अपने पैरो तले रोजाना दिन में पांच बार रौंद सके। मथुरा का नाम भी बदला गया – इस्लामाबाद !

ब्रज इतिहास आगे भी जारी है ….

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