Home विषयजाति धर्मईश्वर भक्ति कृष्ण जन्मभूमि का इतिहास भाग – 3

कृष्ण जन्मभूमि का इतिहास भाग – 3

Mann Ji

by Mann Jee
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कटरा टीले पर 1618 में बुंदेला राजा बीर सिंह देव जी ने केशव देव मंदिर बनवा दिया था। इस मंदिर को तीन विदेशी यात्रियों ने देखा था और इसके विषय में लिखा था। बेर्नियर ने लिखा – आगरा और दिल्ली के बीच में एक प्राचीन और आलिशान मंदिर है जिसे कई कोस दूर से भी देखा जा सकता है। मनूची ने लिखा है – इस मंदिर के शिखर आगरा से भी देखे जा सकते है – वो ये भी लिखता है इस मंदिर का विध्वंस करके औरंगजेब ने उस स्थान पर एक मस्जिद बनायीं है और मथुरा का नाम इस्लामाबाद कर दिया है । एक डच यात्री वैन अदरीचेम ने भी इस मंदिर की भव्यता के बारे में लिखा है। मित्रमिश्र ने आनन्दकन्दसामसु में भी इस मंदिर के विषय में वर्णन दिया है। इस मंदिर में मुख्य प्रतिमा केशवदेव के अतिरिक्त मथुरामल , कल्याणराय , रघुनाथ , नरसिंह , देवकी , वसुदेव , यशोदानन्दन और कृष्ण की मूर्तियों का विवरण है।

इस सबसे इतर टेवेर्निएर ने इस मंदिर के बारे में पूरे चार पन्ने लिखे है। ये फ्रेंच जौहरी 1650 में इस मंदिर में आया था – बाहर का शानदार विवरण लिखा है – मंदिर छह कोस दूरी से दिखाई देता है – लाल पत्थरो से निर्मित ये मंदिर उंचाई पर एक प्लेटफार्म पर बना है । मंदिर के बाहर वानर गज आदि की मुर्तिया उकेरी हुई है । कई राक्षसों के वध की मुर्तिया भी बनी दिखती है। टेवेर्निएर ने दो रुपये की दक्षिणा देकर मंदिर के अंदर की मुर्तिया भी देखि – जिसका वर्णन कुछ इस प्रकार है।

स्वर्ण और चांदी से बने एक प्लेटफार्म पर एक श्याम वर्णीय मूर्ति स्थापित है जिसकी आंखे रूबी की है। इस मूर्ति पर लाल कपडा है और मुख के अलावा कुछ और नहीं दिखाई देता। इस मूर्ति के आसपास दो फ़ीट की दो और मुर्तिया है जो बिलकुल ऐसी ही है बस उनका मुख श्वेत है। वो बच्चोर अथवा रणछोड़ दास की बात भी करता है। इस मंदिर में उसने वो मशीन या रथ भी देखा है जो सोलह square फ़ीट है पंद्रह फ़ीट ऊँचा है और चार पहिये लगे है। इस मशीन / रथ का प्रयोग इन मूर्तियों के स्नान आदि के लिए , बाहर ले जाने के लिए किया जाता है।

सन्दर्भ के तौर पर देखे – इन किताबो से वो पन्ने जो इन विदेशी यात्रियों ने लिखे है। इस मंदिर को इसी कालखंड में दारा शिकोह ने एक पत्थर की रेलिंग दी थी – नोट करिये पत्थर की थी – सोने चांदी की नहीं। 1662 में मथुरा का फौजदार अब्द अल नबी खान ने जामा मस्जिद बनवायी गोविंददेव मंदिर के जगह – वही सब सामग्री इस्तेमाल की गयी। आज भी इस मस्जिद में एक फ़ारसी में शिलालेख लगा है जो इस बात की पुष्टि करता है।

अगले भाग में पढ़िए कैसे औरंगजेब ने इस मंदिर का विध्वंस करवा कर शाही ईदगाह का निर्माण किया – आखिर ये सब मुर्तिया , विग्रह कहाँ गए ? इस मंदिर से लूटी गयी संपंदा कैसे मुगलो ने हथियाई।

आगे भी जारी रहेगा……

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