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कामगारों के काम के घंटे

by Umrao Vivek Samajik Yayavar
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यूरोप के स्पेन नामक देश में सन 1593 में एक दिन में 8 घंटे काम करने की योजना लागू हुई (संभवतः तब तक कार्ल मार्क्स व लेनिन के परदादा भी नहीं पैदा हुए होंगे)

यूरोप के इंग्लैंड नामक देश के राबर्ट ओवन नामक उद्योगपति ने 1817 में एक दिन में 8 घंटे काम की योजना अपनी कंपनी में लागू की, इस योजना के अलावा उन्होंने मजदूरों की स्थिति के सुधार के लिए इतने बेहतरीन काम किए, जो आज तक भी बहुत देशों में लागू नहीं किए जा पा रहे हैं। (कार्ल मार्क्स व लेनिन की पैदाइश के पहले यह सब हो चुका था)।

इंटरनेशनल कामगार एसोशिएन ने जिनेवा कांफ्रेस में 1866 में एक दिन में 8 घंटे की योजना की मांग दुनिया में लागू करने के लिए कर दी थी। इस मांग के बहुत पहले से ही कई पाश्चात्य देशों में विभिन्न स्तरों पर एक दिन में 8 घंटे काम की योजनाएं लागू हो चुकी थीं।
1866 तक लेनिन पैदा नहीं हुए थे, और कार्ल मार्क्स की किताब कैपिटल का प्रकाशन तक नहीं हुआ था। सच तो यह है कि कार्ल मार्क्स के पैदा होने के पहले ही योरप में कामगारों के लिए इतने प्रयोग हो चुके थे, इतने आंदोलन हो चुके थे कि कार्ल मार्क्स ने अपनी किताब में कुछ नया नही दिया। (जिन लोगों को वास्तव में ही गहरा व व्यापक अध्ययन में ईमानदार व ऑब्जेक्टिव अभिरूचि है, वे इन तथ्यों को बेहतर समझते हैं)।
ऑस्ट्रेलिया में एक दिन में 8 घंटे काम की योजना अगस्त 1855 में शुरू हो चुकी थी। 1855 तक न तो कार्ल मार्क्स की किताब आई थी (किताब तक शुरू नहीं की थी), न ही लेनिन पैदा हुए थे।
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इंग्लैंड ने अपने कैदियों व सैनिकों (लगभग बराबर की संख्या में) की पहली खेप 1788 में ऑस्ट्रेलिया में न्यूसाउथ वेल्स राज्य में उतारी। कैदी व सैनिक दोनो मिलकर काम करते थे, क्योंकि उस समय वहां कुछ था ही नहीं, केवल समुद्र, रेत, जंगल, पहाड़, मिट्टी, पत्थर। कैदी भागकर जाते भी कहां, कैदी व सैनिक दोनों की स्थिति एक सी थी।
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1788 में पहली खेप आई, बिलकुल शून्य से शुरुआत हुई। अगस्त 1855 में सिडनी (उस समय अधिकतर लोग यहीं रहते थे) में एक दिन में 8 घंटे काम की योजना लागू कर दी गई थी। इसी विजय के लिए एक अक्टूबर 1855 को कामगारों ने जश्न मनाया। (यही कारण है कि न्यू साउथ वेल्स राज्य में मजदूर दिवस एक अक्टूबर को मनाया जाता है, न कि मई में)। दूसरे सबसे बड़े राज्य विक्टोरिता में भी 1856 में एक दिन में 8 घंटे की योजना लागू हो गई। उस समय ऑस्ट्रेलिया के 90% से भी अधिक लोग न्यू साउथ वेल्स व विक्टोरिया राज्यों में रहते थे। 1901 में ऑस्ट्रेलिया स्वतंत्र देश बना और 1916 में एक दिन में 8 घंटे का कानून बन गया। (सोवियत संघ 1922 में बना था)।
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1948 में ऑस्ट्रेलिया में 40 घंटे का सप्ताह बन गया, मतलब 1948 से ऑस्ट्रेलिया में सप्ताह में सभी के लिए शनिवार रविवार को सार्वजनिक अवकाश होने लगा। 1981 से सप्ताह 40 घंटे से घटाकर 38 घंटे कर दिया गया, मतलब एक दिन में काम के घंटे साढ़े-सात हो गए।
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न्यूजीलैंड व ऑस्ट्रेलिया में पिछले कुछ वर्षों से सप्ताह में 4 (चार) दिन काम मतलब सप्ताह में 3 (तीन) दिन का अवकाश की योजना में कुछ कंपनियां प्रयोग कर रही हैं। अब यह प्रयोग वैश्विक अभियान का स्वरूप ले लिया है। दुनिया भर के अनेक देशों की अनेकों कंपनियों ने इस संदर्भ में एक साथ कई महीनों तक (कुछ महीने कम लगभग एक साल की समय-अवधि) के ट्रायल की योजना बनाई है।
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विवेक उमराव

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