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जुर्म की दुनिया का कुख्यात अपराधी विकास दुबे भाग 1

हत्या और जुर्म अध्याय 16

by Sharad Kumar
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पूर्वांचल के कई नामी अपराधियों का नाम आपने सुना होगा लेकिन आज हम उत्तर प्रदेश के कानपुर के बिकरू नाम के एक छोटे से गांव से जन्म लेने वाले कुख्यात अपराधी विकास दुबे की कहानी बताएँगे की कैसे उत्तर प्रदेश में रहने वाला ये शक़्स अपराधी बना यूपी में अपराधियों की बात की जाए तो बरबस ही पूर्वांचल के बाहुबलियों और माफियाओं के नाम जुबान पर आते हैं। लेकिन कानपुर के विकास दुबे का नाम तब सामने आया, जब 2 जुलाई 2020 की आधी रात चौबेपुर के बिकरू गांव में दुबे और उसके गुर्गों ने डीएसपी, एसओ समेत आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी।

यूपी के वांछित अपराधियों में से एक और 5 लाख के इनामी रहे विकास दुबे ने 90 के दशक में जुर्म की दुनिया में कदम रखा। स्थानीय नेताओं के राजनैतिक संरक्षण के चलते वह पहले मारपीट करता, छोटे-मोटे अपराध करता और रंगदारी वसूलता था। मामला बढ़ता तो पुलिस थाने ले जाती लेकिन फिर छूट जाता। इसके बाद उसने एक गैंग बनाई और गुर्गों के साथ मिलकर वारदातों को अंजाम देना शुरू किया। 1990 में गांव के ही एक व्यक्ति के कत्ल के मामले में विकास दुबे पर एफआईआर तो दर्ज हुई, लेकिन थोड़े दिनों बाद ही पीड़ित पक्ष की ओर से वापस ले ली गई।

साल 1996 के चुनाव में विकास दुबे, बसपा से विधायक हरिकिशन श्रीवास्तव के साथ था और सामने भाजपा के संतोष शुक्ला खड़े थे। रिजल्ट घोषित हुआ तो हरिकिशन ने चुनाव जीत लिया और विजयी जुलूस निकाला। इस जुलूस में संतोष शुक्ला के साथ रहे लल्लन बाजपेई से विकास की झड़प हो गई। लेकिन जब यही संतोष शुक्ला जिलाध्यक्ष और नगर पंचायत चुनावों के बाद लल्लन बाजपेई बीजेपी से चेयरमैन बन गए तो उनके समर्थकों ने इलाके में उगाही शुरू कर दी।

शिवराजपुर इलाके में वर्चस्व की जंग लड़ने के दौरान साल 2000 में ताराचंद इंटर कॉलेज के सहायक प्रबंधक सिद्धेश्वर पांडेय और फिर रामबाबू यादव नामक व्यक्ति की हत्या में भी विकास दुबे का नाम सामने आया था। लेकिन इसी साल जेल में रहते हुए विकास दुबे ने शिवराजपुर सीट से जिला पंचायत का चुनाव भी जीता था।

साल था 2001 और तारीख थी 12 अक्टूबर। विकास दुबे ने अपने गुर्गों के साथ लल्लन बाजपेई के घर पर हमला बोल दिया। लल्लन बाजपेई ने इसकी खबर तत्कालीन राज्यमंत्री संतोष शुक्ला को दी। संतोष शुक्ला ने लल्लन को कहा कि वह शिवली थाने से पुलिस फ़ोर्स को साथ लेकर आ रहे हैं। लेकिन विकास दुबे को इस बात की भनक लगी तो वह खुद शिवली थाने पहुंच गया। शिवली थाने के अंदर ही संतोष शुक्ला और दुबे के बीच बहस हो गई और इसी बीच विकास दुबे ने संतोष शुक्ला को थाने के अंदर ही गोलियों से भून दिया।

शिवली थाने के अंदर एक राज्यमंत्री की हत्या ने हड़कंप मचा दिया। राज्यमंत्री हत्याकांड के बाद भी विकास दुबे को गिरफ्तार नहीं किया गया, लेकिन भारी दबाव के चलते उसने 2002 में आत्मसमर्पण कर दिया। मामले में खास कुछ हुआ नहीं क्योंकि एक भी व्यक्ति विकास दुबे के खिलाफ गवाही देने को तैयार नहीं हुआ। यहां तक कि संतोष शुक्ला के सरकारी गनर और ड्राइवर ने भी मुंह मोड़ लिया और विकास दुबे बरी हो गया।

साल 2004 में एक केबल व्यापारी दिनेश दुबे की हत्या का आरोप भी विकास दुबे पर था और 2018 में अपने ही चचेरे भाई अनुराग पर जानलेवा हमले की साजिश में भी आरोपी दुबे ही था। विकास दुबे के ऊपर 60 से ज्यादा मुकदमें थे, 8 बार गैंगस्टर एक्ट, 6 बार गुंडा एक्ट, 1 बार रासुका (NSA)और 6 बार क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट लगा था। इतने मामलों में संलिप्त होने के बावजूद भी उस पर कोई एक्शन नहीं हुआ था। विकास दुबे जैसे अपराधी पर कार्रवाई न होने के पीछे का कारण उसे प्राप्त राजनीतिक संरक्षण और पुलिस तंत्र में गहरी पैठ थी।

वारदात की रात

इस आपराधिक महामारी को जड़ से खत्म करने के लिए 2-3 जुलाई की दरमियानी रात सीओ देवेंद्र मिश्रा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने बिकरू गांव में धावा बोला. लेकिन होनी को शायद कुछ और ही मंजूर था, पुलिस विभाग के किसी विभीषण ने विकास दुबे को इस एक्शन की जानकारी पहले ही देकर उसे सावधान कर दिया. एक साथ तीन थानों का फोर्स पूरी तैयारी के साथ रात के अंधेरे में विकास दुबे को दबोचने पहुंचा. थाने के सबसे छोटे पद से लेकर डिप्टी एसपी रैंक तक के अधिकारी छापेमारी करने पहुंचे थे, छापेमारी करने गई टीम में अधिकांश पुलिसकर्मी पहली बार ही बिकरू से रूबरू हुए थे.

बिकरू गांव में जैसी ही पुलिस पहुंची गांव का नजारा हैरान करने वाला था, पूरा गांव अंधेरे में डूबा हुआ था. गांव के अंदर जाने के लिए पुलिस की टीम आगे बढ़ी लेकिन सामने जेसीबी मशीन खड़ी थी. रास्ता इतना संकरा कि गाड़ी तो दूर की बात थी पुलिस वाले पैदल भी बड़ी मुश्किल से ही आगे बढ़े. जेसीबी मशीन को पार कर पुलिस वाले एक एक कर आगे बढ़ने लगे. अपराधियों के खात्मे का हौसला अंधकार को चीरता हुआ आगे बढ़ रहा था. थोड़ी दूर चलकर पुलिस की टीम गैंगस्टर के घर के कोने तक पहुंच गयी. यहां पुलिसकर्मी ने विकास दुबे के छत पर टॉर्च मारी. टॉर्च की रौशनी जैसे ही बदमाशों तक पहुंची, चारो तरफ से अंधाधुंध फायरिंग शुरू हो गई. गोलियों की बारिश और भीषण अंधकार के बीच पुलिस के जांबाज अपनी रक्षा के लिए इधर-उधर भागने लगे, गोलियों की गड़गड़ाहट के बीच जिसे जहां पनाह मिली वो अपनी जान बचाने के लिए छिप गया. उस खूनी रात की कहानी बताते हुए हादसे में घायल पुलिस अजय कश्यप की आंखें अपने साथियों के लिए डबडबा जाती हैं.

 

वो बताते हैं कि पहली बार में ही बदमाशों ने 20-22 राउंड फायरिंग शुरू कर दी. गोली सिपाही अजय सेंगर और सिपाही अजय कश्यप को लगी. घायल पुलिसकर्मियों ने कवरिंग फायर करते हुए पहले एक दीवार और ट्राली की आड़ ली और एक क्षतिग्रस्त मकान से होते हुए गली में पहुंच गए. घायल पुलिस वाले किसी तरह जान बचाते हुए अपनी जीप तक पहुंचे. वहां मौजूद आला अधिकारियों ने घायलों को अस्पताल भिजवाया. अजय ने बताया कि उसको अपने बचने की इतनी खुशी नहीं है जितना रंज अपने साथियों की शहादत का है. अंधाधुंध फायरिंग की ऐसी वारदात शायद ही किसी ने कभी देखी होगी या सुनी होगी, पूरा गांव सन्नाटे में लीन था. या यूं कहें कि गैंगस्टर विकास दुबे के डर से सहमा हुआ अपने घरों में दुबका था. बेखौफ अपराधी पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर रहे थे.

 

जो भी पुलिसवाला उनके सामने आ जाए उसे ही अपना शिकार बना रहे थे. बदमाशों की गोलियों से बचने के लिए सीओ देवेंद्र मिश्रा जान बचाने के लिए एक घर में कूद गए. उसके बाद जो हुआ वो उस घर में मौजूद बहू ने बताया. उन्होंने बताया, ”फायरिंग की आवाज से हमारे बच्चे सहमे हुए थे, हम घर के अंदर बंद हो गए, बाहर से आवाज आ रही थी अम्मा दरवाजा खोल दो….दरवाजा खोल दो….पुलिस की कराहती हुई आवाज से कलेजा फटा जा रहा था लेकिन फायरिंग इतनी तेज थी कि हम आगे बढ़कर दरवाजा ना खोल सके. थोड़ी देर में वो पुलिसवाला वहीं पर लेट गया.” उन्होंने आगे बताया, ”कुछ ही मिनट बीते होंगे कि सामने के छत से आवाज आई वो देखो %$$###$$ वहां लेटा हुआ है, और असलहे-तमंचे के साथ कई लोग हमारे आंगन में कूद गए, उसके बाद उस पुलिसवाले पर ताबड़तोड़ फायरिंग की, फायरिंग की आवाज से बच्चे जोर-जोर से चिल्लाने लगे. मैं रात भर बच्चों को गोद में बिठाकर सहमी हुई एक बंद कमरे में बैठी रही, सुबह दरवाजा खटखटाने की आवाज आई तो मैं बाहर निकली और देखा तो सामने पुलिसवाले खड़े थे, पूछताछ करने आई पुलिस ने बताया कि रात में जिस पुलिसवाले की बेरहमी से हत्या की गई वो सीओ साहब थे.” कानपुर के खूनी रात की ये कहानी गैंग्सटर विकास दुबे के मामा की बहू ने सुनाई. वही मामा प्रेम प्रकाश पांडे जिसे पुलिसवालों ने जवाबी कार्रवाई में मार गिराया और इस महिला का पति रात फरार हो गया. कानपुर के बिकरू गांव में उस रात सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्र, एसओ शिवराजपुर महेश यादव, एक सब इंस्पेक्टर और 5 सिपाही शहीद हो गए.

यही नहीं एसओ बिठूर समेत 4 पुलिसकर्मी गोली लगने से घायल भी हुए. सुबह जैसे ही 8 जांबाजों के शहादत की खबर मिली, सबकी आंखे क्रोध से लाल हो गईं. अपने साथियों के शहादत का बदला लेने के लिए पूरे सूबे की पुलिस गैंगस्टर विकास और उसके साथियों की तलाश में जुट गई, लेकिन बड़ा सवाल अब भी यहीं था कि बदमाशों को पुलिस के आने की खबर किसने दी? ये जांच के मुख्य विषयों में था, धीरे-धीरे चिट्ठे खुलते गए और खाकी ही खाकी के खिलाफ सवालों के कटघरे में खड़ी हो गई. कई पुलिसवालों पर मुखबिरी का आरोप लगा जिसमें मुख्य आरोपी चौबेपुर थाने के एसओ विनय तिवारी रहे और उनकी गिरफ्तारी भी हो गई. इस घटना के बाद विकास के गैंग का शार्प शूटर अमर दुबे का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहा. अमर की शादी 4 दिन पहले ही विकास ने अपने घर से ही बड़े धूम धाम से कराई थी. अमर विकास के बेहद करीब था, विकास की नज़रों से उसकी दिल की बात समझ जाता.

 

एक इशारे पर गोलियों की बौछार कर देता. 2-3 जुलाई की रात भी उसने ऐसा ही किया, उस रात खाकी को लाल करने का उसपर भूत सवार था, जो सामने आया मारता गया, घटना को अंजाम देकर वो भी बिकरू से फरार हो गया. पुलिस तलाश में जुटी रही, आखिरकार उस खूनी रात का सबसे खूंखार हत्यारा अमर यूपी के हमीरपुर में पुलिस की पकड़ में आ गया और पुलिस ने उसे एनकाउंटर में मार गिराया. इस तरह एक के बाद एक हत्यारों को मारा जा रहा था लेकिन विकास अभी भी फरार था. घटना के 7वें दिन यानी 9 जुलाई को विकास कई राज्य घूमते हुए महाकाल के दरबार में उज्जैन पहुंच गया. चूहे- बिल्ली की दौड़ खत्म हुई और 9 जुलाई को सुबह 8-9 के बीच महाकाल के चौखट से विकास को गिरफ्तार किया गया लेकिन सवाल भी खड़ा हुआ की गिरफ्तारी या सरेंडर? उज्जैन में एमपी पुलिस ने यूपी पुलिस को सूचना दी शाम 7 बजे के करीब यूपी STF की टीम उज्जैन पहुंची और सड़क के रास्ते विकास को लेकर कानपुर के लिये रवाना हो गई.

To Be Continue ….

 

“यह सभी अपराध वास्तव में घटित हो चुके है और इनका विवरण विकिपीडिया और अन्य श्रोतो से लिया गया है इन अपराध को करने वाले अपराधियों को सजा दी जा चुकी है और कुछ मामलो में अभी फैसला आना बाकी है और मामला न्यायालय में है आप सब से निवेदन है की इनकी कहानियो को पढ़ कर इनकी प्रेरणा न ले”

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