Home विषयजाति धर्म अब सार्वजनिक स्थल पर नमाज पढ़ने पर एफआईआर होगी?’

अब सार्वजनिक स्थल पर नमाज पढ़ने पर एफआईआर होगी?’

by Swami Vyalok
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अब चूंकि, शताब्दी के महान फैक्ट चेकर जुबैर भाई छूट गए हैं, क्योंकि हमारे सुप्रीम कोर्ट में बैठे महानतम पारिवारिक लोग (जो आपस में ही एक-दूसरे को न्यायाधीश तय कर देते हैं) इस्लामिक गुंडों से पंगा नहीं ले सकते, तो मैं भी कुछ लिखने आया हूं, ताकि जुबैर भाई इसका फैक्ट-चेक कर देंगे। ये बिल्कुल ही दीगर बात है कि जुबैर के खुद के फैक्ट्स लापता हैं, शायद अम्मी-अब्बा हुजूर का भी पता नहीं, कुछ बांग्लादेशी दामाद टाइप मामला है।

बहरहाल, लुलु मॉल में नमाज के बाद दो लौंडो ने हनुमान-चालीसा भी पढ़ दी और कुछ हंगामा खोजनेवाले लोग यत्र-तत्र प्रकट भी हुए। यहां तक कि योगीजीवा को भी सामने आकर सफाई देनी पड़ी। चार गरीब मुसलमानों को भी पकड़ लिया पुलिसजी ने। उसके बाद तो रांडरोवन होना ही था, ‘क्या इस देश में अब सार्वजनिक स्थल पर नमाज पढ़ने पर एफआईआर होगी?

ये बड़ा मौजूं सवाल है जी। इसलिए, क्योंकि इस देश के दूसरे दर्जे के नागरिक हिंदुओं को तो आदत है- मुस्लिमों के यत्र-तत्र-सर्वत्र नमाज पढ़ने की। वे सड़क पर खड़े हो जाएंगे, बैठ जाएंगे, चलती ट्रेन में आपकी सीट के सामने उठने-बैठने लगेंगे, रेल की पटरी पर खड़े हो जाएंगे, संडास की बगल में उठक-बैठक लगाएंगे, गरज यह कि जहां उनकी मर्जी होगी, वे नमाज का फर्ज अदा करने लगेंगे।

अच्छा, मेरे ऑफिस के गलियारे में भी ये होता है। ठीक-ठाक कथित तौर पर कॉर्पोरेट ऑफिस में आते हैं बंदे। उनको जब मैं सिंक में पांव उचकाकर, पूरा पानी फैलाकर, बाथरूम की ऐसी-तैसी करते देखता हूं, तो सच पूछिए, गुस्सा नहीं आता, दया आती है। कंबख्तों, कहां से लाए हो ऐसा आला दिमाग? अमां, इतना ही अल्लाह को या नबी को याद करने का दौरा पड़ा है, तो मस्जिद में जाओ यार, घर पर जाओ, ये साला पूरे सार्वजनिक बाथरूम की सिंक में एक टांग पर लटकते हुए दूसरी टांग को धोते हुए, सब कुछ गीला कर देना कहां की शराफत है…लेकिन, तुमको कुछ कह दिया जाए, इस पर समझा दिया जाए तो तुम सर तन से जुदा, सर तन से जुदा करने लगोगे। इस्लाम ने तुम्हें इतना बंद-दिमाग और कुंद-जेहन कर दिया है।

भई, नमाज क्या है? अगर यह पॉलिटिकल नहीं है, तो शायद तुम्हारे खुदा, तुम्हारे नबी को याद करने का मौका है न..। भई, जब मुहम्मद ने पांच बार की नमाज की पाबंदी की होगी, तो उतना समय होगा सबके पास, समाज को बांधने के लिए किया होगा। तुम हो यार कि अभी भी 14वीं सदी में जाने की जिद पर अड़े हो। यहां न रेगिस्तान है, न बालू…उमड़ती-घुमड़ती गरमी है, फिर भी तुम छोटे भाई का पजामा और बड़े भाई का कुरता पहन लोगे…अपनी जनानी को काले तंबू में बांधने की जिद करने लगोगे, गजब तो ये कि सब कुछ तुम तब करोगे, जब थोड़े शदीद हो संख्या में, वरना तुम सा शरीफ तो किसी ने देखा ही नहीं होगा..।

भई, नहा-धोकर, इत्र-उत्र लगाकर, शेरवानी पहनकर जाओ यार मस्जिद में खुदा मियां को याद करने। ये क्या कि थर्ड फ्लोर पर बने बाथरूम में नरक मचा कर गलियारे में चटाई बिछा दी। और हां भाई लोग, सार्वजनिक जगहों पर इन सब की पाबंदी ही है। अब देखो न, तुम्हारी देखादेखी हिंदुओं के भी कुछ सल्फेटों ने यही सब शुरू कर दिया है। कुछ दिन में बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई सब यही करेंगे। सड़क पर ही करेंगे।

राह दिखाने के लिए थैंक्यू भाईजान….

और हां, ये भी देख लेना कि तुमको जहालत की राह पर धकेलने वाली बीवियां असल में अपनी जिंदगी में क्या पहनती हैं और तुम्हारी जनानियों को क्यों काले तंबू में रखना चाहती हैं….

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